मां बेटी चाय की दुकान चलाती थी फिर एक दिन जब बेटी की शादी हुई तो !

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मां-बेटी की चाय की दुकान और एक शादी के बाद बदलती जिंदगी

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में शोभा नाम की एक विधवा महिला अपनी बेटी कुसुम के साथ चाय की दुकान चलाती थी। पति के गुजर जाने के बाद शोभा ने अपनी बेटी की परवरिश मेहनत और प्यार से की। दोनों मां-बेटी रोज सुबह-सुबह दुकान खोलतीं, ग्राहकों को स्वादिष्ट चाय पिलातीं और दिनभर मेहनत करतीं। गांव में उनकी दुकान काफी लोकप्रिय थी, दूर-दूर से लोग चाय पीने आते थे।

शोभा अपने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए हमेशा नई साड़ी पहनती, हल्का श्रृंगार करती और मुस्कुराकर सबका स्वागत करती। कुसुम भी कभी-कभी मां का हाथ बंटाती थी। धीरे-धीरे कुसुम विवाह योग्य हो गई थी और उसकी खूबसूरती की चर्चा आसपास के गांवों में होने लगी थी।

कुसुम की शादी और नया जीवन

एक दिन गांव के ही पास के लड़के बृज किशोर ने पहली बार शोभा की दुकान पर चाय पी। उसे शोभा की खूबसूरती और उसकी बातों ने बहुत प्रभावित किया। वह रोज दुकान आने लगा, चाय के बहाने शोभा और कुसुम से बातें करता। लेकिन उसके मन में उलझन थी—वह शोभा को पसंद करता था, लेकिन शादी के लिए कुसुम को चुनना ज्यादा उचित समझा।

समय के साथ बृज किशोर और कुसुम की बातचीत बढ़ी, दोनों के बीच दोस्ती और फिर प्यार हो गया। बृज किशोर ने शादी का प्रस्ताव रखा, कुसुम ने मां से बात करने को कहा। शोभा ने बेटी की खुशी के लिए शादी के लिए हां कर दी, लेकिन साथ ही बृज किशोर को चेतावनी दी कि कुसुम को कभी दुख न देना।

शादी धूमधाम से हुई, कुसुम बृज किशोर के घर चली गई। मां-बेटी दोनों खुश थीं कि अब कुसुम का जीवन सवर जाएगा।

शादी के बाद की कठिनाईयाँ

शादी के बाद कुसुम के जीवन में सब कुछ वैसा नहीं रहा जैसा उसने सोचा था। पहली रात जब बृज किशोर उसके पास आया, कुसुम घबरा गई और उसे दूर जाने को कह दिया। कुछ दिन इसी तरह बीते, कुसुम हर बार पति को मना कर देती। तीन महीने तक दोनों के बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं बने।

बृज किशोर परेशान था, उसने अपनी सास शोभा को फोन किया। शोभा ने बेटी को समझाया कि अब वह उसकी पत्नी है, उसे पति का साथ देना चाहिए। लेकिन कुसुम मन से तैयार नहीं थी।

समस्या बढ़ती गई, बृज किशोर ने कुसुम को धमकी दी कि अगर वह उसका साथ नहीं देगी तो तलाक दे देगा। कुसुम डर गई, मां को सब कुछ बता दिया। शोभा ने बेटी को समझाया, लेकिन कुसुम का मन नहीं बदला।

सास के प्रति आकर्षण और समाज का सच

समय के साथ बृज किशोर के मन में कुसुम की बजाय उसकी सास शोभा के प्रति आकर्षण बढ़ता गया। वह बार-बार कुसुम से कहता कि उसकी मां उससे ज्यादा खूबसूरत है। एक दिन वह ससुराल गया और रात में शोभा के पास जाकर अपनी इच्छा जाहिर की। शोभा ने मना किया, उसे समझाया कि यह रिश्ता पवित्र है, समाज क्या कहेगा।

लेकिन बृज किशोर ने धमकी दी कि अगर उसकी बात नहीं मानी तो वह कुसुम को तलाक दे देगा। शोभा डर गई, बेटी के भविष्य की चिंता में बृज किशोर की बात मान गई। लेकिन जब वह स्थिति आई, शोभा रोने लगी, हाथ जोड़कर कहने लगी कि वह यह सब नहीं सह पाएगी।

बृज किशोर ने फिर उसे धमका कर, बहला-फुसलाकर अपनी बात मनवा ली। उस रात शोभा की हालत बहुत खराब हो गई। सुबह पड़ोसियों ने देखा कि शोभा बेसुध पड़ी है। उसे अस्पताल ले जाया गया, डॉक्टरों ने इलाज किया। कुसुम को भी मां की हालत का पता चला, वह फूट-फूटकर रोने लगी।

बेटी का फैसला और नया संघर्ष

अस्पताल में मां से मिलने के बाद कुसुम ने फैसला लिया कि अब उसे अपने पति से छुटकारा पाना है। उसने पुलिस में शिकायत की, पति पर केस दर्ज कराया और तलाक का नोटिस भेज दिया। कुसुम ने मां से कहा, “अब मुझे अपनी चिंता नहीं करनी है। मैं खुद को संभाल लूंगी।”

शोभा और कुसुम ने फिर से अपनी चाय की दुकान शुरू की। दोनों ने मिलकर मेहनत की, दुकान को और बढ़ाया। अब वे दोनों खुश थीं, आत्मनिर्भर थीं। गांव में उनकी दुकान की चर्चा और भी बढ़ गई।

समाज के लिए संदेश

इस कहानी से यह सीख मिलती है कि किसी भी महिला के साथ रंगभेद या अपमानजनक व्यवहार नहीं करना चाहिए। हर महिला सम्मान की हकदार है, चाहे वह मां हो, बेटी हो या पड़ोसन। समाज को चाहिए कि महिलाओं को बराबरी का अधिकार दे, उन्हें समझे और उनका साथ दे।

गलत कदम उठाने वाले का अंजाम हमेशा दुखद होता है। रिश्तों में विश्वास, प्यार और समझ जरूरी है। मजबूरी में लिए गए फैसले अक्सर जीवन को बर्बाद कर देते हैं।