सावित्री देवी का जीवन बहुत ही साधारण था। वह अपने छोटे से घर में दिनभर पूजा-पाठ करतीं, रसोई संभालतीं और मोहल्ले के बच्चों को कहानियाँ सुनाती थीं। गांव में लोग उन्हें प्यार से “सावित्री मां” कहकर बुलाते थे।
उनका बेटा अर्जुन वर्मा पढ़ाई में बहुत तेज था। गांव से निकलकर कड़ी मेहनत की और आईएएस परीक्षा पास करके डीएम बन गया। लेकिन मां में कोई बदलाव नहीं आया। ना रेशमी साड़ी, ना ज़ेवर—बस हल्की सूती साड़ी, पैरों में चप्पल और माथे पर एक छोटी सी बिंदी।
एक दिन सावित्री देवी को गांव के रिश्तेदारों को पैसे भेजने के लिए शहर के बैंक जाना पड़ा। उन्होंने कभी अपने बेटे के नाम का सहारा नहीं लिया, क्योंकि उन्हें अपनी पहचान अपने बेटे से नहीं, अपने आत्मसम्मान से थी।
बैंक के बाहर लंबी लाइन लगी थी। सावित्री देवी भी धीरे-धीरे लाइन में लगीं।
उनके कपड़े पुराने थे, बाल सफेद, और हाथ में एक छोटा सा थैला।
सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें देख कर भौंहें सिकोड़ लीं।
“अरे अम्मा, यहाँ भीख मांगने आ गई हो क्या? चलो हटो!” उसने डपटते हुए कहा।
सावित्री देवी ने नम्रता से कहा,
“बेटा, भीख नहीं मांग रही, अपने पैसे निकालने आई हूँ।”
गार्ड और बैंक के स्टाफ हंसने लगे।
“तुम्हारे पास बैंक खाता है?”
गार्ड ने उनकी पर्ची छीनी और फाड़ दी, और गुस्से में धक्का दे दिया।
सावित्री देवी गिर पड़ीं।
भीड़ तमाशा देखती रही, कोई मदद को आगे नहीं आया।
उसी समय कुछ गाड़ियाँ बैंक के सामने आकर रुकीं।
जिले के डीएम अर्जुन वर्मा निरीक्षण के लिए पहुंचे थे।
भीड़ देख कर अंदर गए, और जब उन्होंने अपनी मां को जमीन पर गिरा देखा, तो उनके होश उड़ गए।
“मां!”
वो चिल्लाए और दौड़कर उन्हें उठाया।
पूरा बैंक स्तब्ध रह गया।
डीएम की गर्जती आवाज गूंजी—
“तुम लोगों ने मेरी मां के साथ ऐसा सलूक किया?”
बैंक मैनेजर, स्टाफ और गार्ड को बुलाकर उन्होंने कहा—
“इंसान की इज्जत उसके कपड़ों से नहीं होती।
जिस महिला को तुमने भिखारी समझा, वो इस जिले के डीएम की मां हैं!”
बैंक स्टाफ के चेहरे पीले पड़ गए, गार्ड काँपने लगा,
“साहब, हमने सोचा था कि…”
अर्जुन ने गुस्से में टोका,
“सोचना तुम्हारा काम नहीं है, इंसानियत दिखाना तुम्हारा कर्तव्य है।”
लेकिन तभी मां ने बेटे का हाथ पकड़ लिया।
“बेटा, शांत हो जाओ। गुस्से में इंसान सही-गलत का फैसला नहीं कर पाता।”
अर्जुन हैरान था।
“मां, इन्होंने आपको जमीन पर गिराया, अपमानित किया… और आप चाहती हैं कि मैं इन्हें माफ कर दूं?”
मां बोलीं,
“सजा से डर आता है, लेकिन सीख से बदलाव आता है।
अगर तुम इन्हें जेल भेज दोगे तो ये भूल जाएंगे।
मगर अगर तुम इन्हें इंसानियत सिखाओगे, तो ये उम्रभर याद रखेंगे।”
अर्जुन की आँखें नम हो गईं।
अगले दिन डीएम ऑफिस में एक बड़ी बैठक बुलाई गई।
उन्होंने आदेश दिया:
अब से जिले के हर बैंक, स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर में ‘सम्मान अभियान’ चलाया जाएगा।
कोई इंसान अपने कपड़ों या रूप से नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व से पहचाना जाएगा।
बैंक स्टाफ को सजा नहीं, बल्कि एक विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
सीखा गया कि
गरीब, बुजुर्ग या साधारण लोगों का सम्मान करना ही असली सेवा है।
पोस्टर लगाए गए —
“इंसान की पहचान उसके दिल से होती है, ना कि कपड़ों से।”
अर्जुन ने कहा,
“मेरे साथ जो हुआ, उसने मुझे यह सिखाया कि समस्या गरीबी की नहीं, सोच की है।
जब तक हम कपड़े देखकर इंसान का मूल्य तय करते रहेंगे, तब तक असली विकास अधूरा रहेगा।”
बैंक का वही गार्ड और स्टाफ मंच पर खड़े थे, शर्म से झुके हुए।
सावित्री देवी ने उन्हें मंच पर बुलाया और कहा —
“तुम्हारी गलती ने हमें सीखने का अवसर दिया, इसलिए मैं तुम्हें माफ करती हूँ।”
भीड़ तालियों से गूंज उठी।
अर्जुन मां के चरणों में झुक गया।
“मां, आज मैं समझ गया — डीएम की कुर्सी से बड़ी शक्ति मां की सीख होती है।”
सीख:
“सम्मान किसी ओहदे या कपड़े से नहीं,
बल्कि इंसान के व्यवहार और सोच से होता है।”
अगर आप चाहें, तो इस कहानी का वीडियो स्क्रिप्ट या शॉर्ट स्टोरी वर्जन भी तैयार किया जा सकता है।
News
कहानी: एक अनजान मां का कर्ज़ और इंसानियत की मिसाल
कहानी: एक अनजान मां का कर्ज़ और इंसानियत की मिसाल रवि कुमार बिहार के आरा जिले के छोटे से गांव…
बलराम और सूरज: त्याग, शिक्षा और इंसानियत की कहानी
बलराम और सूरज: त्याग, शिक्षा और इंसानियत की कहानी अवध क्षेत्र के सूरजपुर नामक एक छोटे, पिछड़े गांव में, जहां…
Former Uttar Pradesh DGP Retires: A Life of Service, Now Turning to Spiritual Reflection
Former Uttar Pradesh DGP Retires: A Life of Service, Now Turning to Spiritual Reflection Lucknow, India – The recently retired…
A coaching instructor, Aditya Ranjan, has come under public scrutiny after allegations surfaced that he falsely represented himself as an Excise Inspector
Controversy Surrounds Coaching Teacher Over Excise Inspector Claim New Delhi, India – A coaching instructor, Aditya Ranjan, has come under…
राधिका की कहानी: क्षमा, त्याग और इंसानियत का पाठ
राधिका की कहानी: क्षमा, त्याग और इंसानियत का पाठ क्या दौलत की चमक इंसानियत की रोशनी से तेज़ हो सकती…
राधिका वर्मा की संघर्ष और सफलता की कहानी
राधिका वर्मा की संघर्ष और सफलता की कहानी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में रमेश चंद्र वर्मा और…
End of content
No more pages to load

