दरोगा पत्नी ने बेरोज़गार पति को अपमानित किया 5 मिनट बाद SP आए और सैल्यूट किया पूरा थाना सन्न रह गया

पद से बड़ा किरदार: एक बेरोजगार पति और दरोगा पत्नी की कहानी
अध्याय 1: मधुपुर की गलियाँ और राघव के सपने
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव मधुपुर में सुबह की शुरुआत जलेबियों की खुशबू से होती थी। इसी गाँव में ‘राघव’ नाम का एक युवक रहता था। उसके पिता ‘मोहन साहब’ गाँव की सबसे पुरानी मिठाई की दुकान के मालिक थे। राघव एक सीधा-साधा लड़का था, जो कॉलेज से आने के बाद अपने पिता का हाथ बटाता था।
लेकिन राघव की आँखों में कुछ बड़ा करने का सपना था। एक रात उसने अपने माता-पिता से कहा, “बाबूजी, मुझे दिल्ली जाना है, यूपीएससी (UPSC) की तैयारी के लिए।” मोहन साहब ने बस इतना कहा, “बेटा, अगर सपना बड़ा है तो डर मत, जा दिल्ली।”
अध्याय 2: दिल्ली का संघर्ष और त्याग
दिल्ली की भीड़ और तंग कमरों के बीच राघव ने ७ साल बिताए। उसने दिन-रात पढ़ाई की। उसी दौरान उसका एक दोस्त था ‘अभिषेक’। अभिषेक की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। कई बार जब अभिषेक के पास कोचिंग की फीस नहीं होती, तो राघव अपने हिस्से के पैसे उसे दे देता और कहता, “आज तू रख ले, कल भगवान देखेगा।”
राघव ने कई प्रयास किए, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। गाँव से माँ राधिका देवी का फोन आता, “बेटा, कब तक चलेगा यह सब? हमारे बाल सफेद हो गए हैं।” राघव ने एक आखिरी प्रयास करने का फैसला किया और परीक्षा देकर मधुपुर लौट आया।
अध्याय 3: शादी और निधि का चयन
गाँव लौटने पर राघव की शादी ‘निधि’ नाम की लड़की से तय हुई। निधि भी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थी। शादी के ही दिन खबर आई कि निधि का चयन पुलिस दरोगा (सब-इंस्पेक्टर) के पद पर हो गया है। पूरे गाँव ने कहा कि राघव की किस्मत खुल गई, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह सफलता राघव के स्वाभिमान की परीक्षा लेने वाली थी।
अध्याय 4: वर्दी का अहंकार
निधि की पोस्टिंग शहर के एक थाने में हुई। राघव उसका पूरा ख्याल रखता—सुबह नाश्ता बनाना, कपड़े प्रेस करना और दोपहर में उसका टिफिन लेकर थाने जाना। शुरुआत में सब ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे निधि के व्यवहार में बदलाव आने लगा। उसे अब राघव ‘पति’ नहीं बल्कि अपनी शान में एक ‘बोझ’ लगने लगा।
एक दिन जब राघव टिफिन लेकर पहुँचा, तो निधि ने कड़क आवाज़ में कहा, “तुम यहाँ मत आया करो। और अगर कोई पूछे, तो कहना कि तुम मेरे पति नहीं हो।” यह शब्द राघव के दिल को चीर गए, पर वह खामोश रहा।
अध्याय 5: “वह घर का नौकर है”
थाने में जब सहकर्मी निधि से पूछते कि राघव कौन है, तो वह झूठ बोलती कि वह घर का नौकर है। यह बात राघव तक पहुँची, लेकिन उसने कोई हंगामा नहीं किया। वह बस चुपचाप अपनी माँ और पिता की सेवा में लगा रहता। उसने अपने भीतर एक गहरा सन्नाटा पाल लिया था।
अध्याय 6: नए एसपी साहब का आगमन
एक दिन जिले में खबर फैली कि नए एसपी (SP) साहब हर थाने का दौरा करने वाले हैं। पूरे थाने में हड़कंप मच गया। निधि भी बहुत थकी हुई और तनाव में थी। अगली सुबह वह बिना कुछ खाए थाने चली गई। राघव ने हमेशा की तरह नाश्ता बनाया और टिफिन लेकर थाने की ओर चल पड़ा।
अध्याय 7: थाने का वह अपमानजनक मंजर
थाने के बाहर सिपाहियों ने राघव को रोका और उसका मजाक उड़ाया। जब वह अंदर गया, तो निधि उसे देखते ही आगबबूला हो गई। उसने सबके सामने चिल्लाकर कहा, “तुम यहाँ क्यों आए हो? तुम मेरे पति हो, एक बेरोजगार आदमी! मैं दरोगा हूँ और तुम मेरे लायक नहीं हो। तुम मेरी बदनामी हो।”
राघव की उंगलियां कांप रही थीं। उसने बस टिफिन नीचे रखा। तभी थाने के गेट पर सायरन की आवाज गूँजी। जिले के नए एसपी साहब का काफिला अंदर आया।
अध्याय 8: एसपी साहब का सैल्यूट
जैसे ही एसपी साहब अंदर आए, पूरा थाना ‘सावधान’ की मुद्रा में खड़ा हो गया। निधि भी कड़क होकर खड़ी हो गई। लेकिन एसपी साहब की नजर अचानक किनारे खड़े राघव पर पड़ी। वे ठिठक गए।
एसपी साहब धीरे-धीरे राघव की ओर बढ़े और अचानक उन्हें ‘सैल्यूट’ किया। पूरा थाना सन्न रह गया। एसपी साहब ने राघव को गले लगा लिया और पूछा, “कैसे हो राघव?”
निधि के पैरों तले जमीन खिसक गई। एसपी साहब ने सबकी ओर मुड़कर कहा, “आज अगर मैं इस कुर्सी पर बैठा हूँ, तो इसकी वजह यही इंसान है। जब मेरे पास फीस के पैसे नहीं थे, तब इस इंसान ने अपनी मेहनत की कमाई मुझे दी थी। पद इंसान को बड़ा नहीं बनाता, किरदार बनाता है।”
अध्याय 9: पछतावे की आग
एसपी साहब ने निधि की ओर देखकर कहा, “जिस इंसान को आप आज बेरोजगार कहकर अपमानित कर रही हैं, वह इस थाने में मौजूद सबसे बड़ा आदमी है।” निधि की वर्दी आज उसे बोझ लगने लगी। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
अध्याय 10: इतिहास रचने वाला परिणाम
तीसरे दिन राघव के घर यूपीएससी की एक चिट्ठी आई। राघव ने उसे पढ़ा और चुपचाप रख दिया। निधि ने कांपते हाथों से वह कागज देखा—राघव का चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में हो गया था। राघव अब अधिकारी बन चुका था।
निधि रोते हुए उसके पैरों में गिर पड़ी, “मुझे माफ कर दो, मैंने तुम्हें बहुत छोटा समझा।” राघव ने बस इतना कहा, “निधि, नौकरी इंसान को ऊँचा नहीं करती, संस्कार करते हैं। मैं बदला लेने के लिए अफसर नहीं बना, मैं सिस्टम बदलने के लिए अफसर बना हूँ।”
उपसंहार
राघव की कहानी हमें सिखाती है कि वक्त बदलता है, लेकिन इंसान की सादगी और उसका त्याग उसे हमेशा महान बनाए रखता है। मधुपुर का वह ‘बेरोजगार पति’ आज जिले का सबसे बड़ा अधिकारी था, लेकिन उसका मन आज भी उतना ही शांत और विनम्र था जितना वह मिठाई की दुकान पर था।
शिक्षा: अहंकार इंसान के विवेक को खत्म कर देता है, जबकि धैर्य और परोपकार उसे सफलता के शिखर पर ले जाते हैं।
News
पति को गरीब समझकर दिया तलाक, पर वो निकला शहर का सबसे बड़ा अरबपति!
पति को गरीब समझकर दिया तलाक, पर वो निकला शहर का सबसे बड़ा अरबपति! विहान सिंघानिया: पहचान का खेल और…
10 साल बाद लौटा फौजी: राम मंदिर की सीढ़ियों पर भीख मांगती मिली पत्नी
10 साल बाद लौटा फौजी: राम मंदिर की सीढ़ियों पर भीख मांगती मिली पत्नी अध्याय 1: सरयू के तट पर…
Karan Kundrra ने बताया Tejasswi Prakash संग रिश्ते का असली सच! एक्टर के खुलासे से उड़े फैंस के होश !
Karan Kundrra ने बताया Tejasswi Prakash संग रिश्ते का असली सच! एक्टर के खुलासे से उड़े फैंस के होश !…
अच्छी बहू की तलाश में अरबपति मां लिया भिखारी का भेष फिर जो हुआ…….
अच्छी बहू की तलाश में अरबपति मां लिया भिखारी का भेष फिर जो हुआ……. सोने का दिल: अंजलि सिंघानिया की…
अंहकार मे डूबी पत्नी ने पति को नौकर समझकर अपमानित किया….सच सामने आते ही सब दंग रह गए
अंहकार मे डूबी पत्नी ने पति को नौकर समझकर अपमानित किया….सच सामने आते ही सब दंग रह गए अहंकार का…
12 Years Missing IPS Officer Returned | MUMBAI Crime Story (SHOCKING)
12 Years Missing IPS Officer Returned | MUMBAI Crime Story (SHOCKING) सत्य का संघर्ष: मैरी देसाई की वापसी भारत में…
End of content
No more pages to load






