घर के नौकर की वजह से घर में मां और बेटी के साथ हुआ बहुत बड़ा कां#ड/

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मेरठ के अतराड़ा गांव में दोहरे हत्याकांड से सनसनी: पारिवारिक कलह, ब्लैकमेल और गुस्से ने ली मां-बेटी की जान

मेरठ (उत्तर प्रदेश)। जिले के अतराड़ा गांव में घटित एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। पारिवारिक तनाव, आपसी अविश्वास, ब्लैकमेल और सामाजिक भय के जाल में उलझी एक कहानी का अंत दोहरे हत्याकांड में हुआ। इस मामले में एक नाबालिग लड़की द्वारा अपनी मां और बड़ी बहन की हत्या किए जाने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।


परिवार की पृष्ठभूमि

गांव की निवासी मधु देवी तीन वर्ष पहले विधवा हो गई थीं। पति की लंबी बीमारी के बाद मृत्यु होने से परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उनके पास लगभग 12 एकड़ कृषि भूमि थी, जिससे वे खेती-किसानी कर घर का खर्च चलाती थीं। परिवार में दो बेटियां थीं—बड़ी बेटी साक्षी, जो कॉलेज में पढ़ती थी, और छोटी बेटी रजनी, जो स्कूल की छात्रा थी।

मधु देवी मेहनती महिला मानी जाती थीं। गांव में उनका सम्मान था, हालांकि कुछ लोग उनके व्यवहार को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी करते थे। बेटियां अक्सर चाहती थीं कि उनकी मां खेती का काम छोड़कर कोई दूसरा व्यवसाय शुरू करें ताकि सामाजिक छवि बेहतर रहे और भविष्य में शादी-विवाह में बाधा न आए।


खेत के लिए नौकर की नियुक्ति

परिवार की सलाह पर मधु देवी ने खेतों के काम के लिए एक युवक को नौकरी पर रख लिया। युवक अनिल (काल्पनिक नाम) गांव में सब्जी बेचता था और बेहतर आय के लालच में खेत पर काम करने को तैयार हो गया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य प्रतीत हुआ। वह रोज सुबह खेत जाता और शाम को लौट आता।

लेकिन जांच में सामने आया कि धीरे-धीरे घर के भीतर का माहौल बदलने लगा। आरोप है कि मधु देवी और बाद में उनकी बड़ी बेटी साक्षी ने युवक पर दबाव डालकर उसके साथ अनुचित संबंध बनाए। युवक ने कथित रूप से डर और सामाजिक बदनामी के भय से चुप्पी साधे रखी।


ब्लैकमेल और बढ़ता तनाव

पुलिस सूत्रों के अनुसार, युवक को धमकी दी जाती थी कि यदि उसने किसी को कुछ बताया तो उस पर झूठे आरोप लगाकर जेल भिजवा दिया जाएगा। यह स्थिति लंबे समय तक चलती रही।

इसी बीच छोटी बेटी रजनी को घर के माहौल में बदलाव का आभास हुआ। एक दिन उसने घर में कुछ ऐसा देख लिया, जिसने उसे भीतर तक झकझोर दिया। बाद में उसे अपनी बहन की सहेली से भी जानकारी मिली कि मामला उससे कहीं अधिक गंभीर है।

रजनी के मन में गुस्सा, शर्म और भय का मिश्रण बनने लगा। उसे लगा कि परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है और भविष्य अंधकारमय हो सकता है। उसने किसी से खुलकर बात नहीं की, बल्कि अंदर ही अंदर आक्रोश पनपता रहा।


घटना की रात

पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, 2 जनवरी 2025 की रात परिवार ने सामान्य रूप से भोजन किया। इसके बाद सभी अपने-अपने कमरों में सोने चले गए। देर रात करीब 11:30 बजे रजनी रसोई में गई और वहां से सब्जी काटने वाला चाकू उठा लाई।

पहले वह अपनी मां के कमरे में गई और सो रही मां पर हमला कर दिया। इसके बाद वह अपनी बहन के कमरे में गई और उस पर भी वार किया। दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

घटना के बाद रजनी सीधे नजदीकी पुलिस थाने पहुंची और कथित रूप से पूरी घटना की जानकारी दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।


पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई

थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ हत्या की धारा में मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने गुस्से और पारिवारिक विवाद को कारण बताया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या युवक अनिल के साथ कथित ब्लैकमेल और दबाव की घटनाएं सत्य हैं।

युवक से भी पूछताछ की गई है। फिलहाल वह जांच में सहयोग कर रहा है। पुलिस यह स्पष्ट करना चाहती है कि घटनाओं की वास्तविक श्रृंखला क्या थी और किन परिस्थितियों में यह दोहरा हत्याकांड हुआ।


सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल अपराध नहीं, बल्कि गहरे सामाजिक और मनोवैज्ञानिक तनाव का परिणाम है।

परिवार के भीतर संवाद की कमी

सामाजिक बदनामी का भय

ब्लैकमेल और दबाव

किशोरावस्था में भावनात्मक असंतुलन

ये सभी कारक मिलकर विस्फोटक स्थिति पैदा कर सकते हैं। यदि समय रहते किसी विश्वसनीय व्यक्ति, परामर्शदाता या पुलिस से संपर्क किया जाता, तो शायद यह त्रासदी टल सकती थी।


गांव में मातम और आक्रोश

घटना के बाद अतराड़ा गांव में सन्नाटा पसरा है। लोग स्तब्ध हैं कि एक ही परिवार में ऐसा भयानक अंत कैसे हो सकता है। पड़ोसियों का कहना है कि परिवार बाहर से सामान्य दिखता था, लेकिन भीतर कितनी उथल-पुथल चल रही थी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।

कुछ ग्रामीणों ने इस घटना को नैतिक पतन का परिणाम बताया, तो कुछ ने इसे मानसिक दबाव और गलत निर्णय का नतीजा कहा।


कानून क्या कहता है?

भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है। यदि आरोपी नाबालिग है तो मामला किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष जाएगा, जहां उसकी आयु और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा।

अदालत में यह भी देखा जाएगा कि क्या आरोपी ने आत्मरक्षा, उकसावे या मानसिक असंतुलन की स्थिति में यह कदम उठाया।


निष्कर्ष

मेरठ के अतराड़ा गांव की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। यह बताती है कि पारिवारिक समस्याओं को दबाने के बजाय संवाद और कानूनी सहायता का सहारा लेना कितना आवश्यक है।

गुस्से में उठाया गया कदम कभी समाधान नहीं होता। इस घटना में दो जिंदगियां चली गईं और एक किशोरी का भविष्य भी अधर में लटक गया।

अब सबकी नजर अदालत के फैसले पर है, जो तय करेगा कि कानून इस जटिल और दर्दनाक मामले को किस नजरिए से देखता है। लेकिन यह निश्चित है कि यह घटना लंबे समय तक लोगों के मन में सवाल छोड़ जाएगी—क्या यह सब टाला जा सकता था?