Govinda के भांजे Vinay Anand ने उनके 90s के Stardom और मौजूदा कठिन दौर के बारे में पूरी बात बता दी

गोविंदा के दिवालिया होने की खबरों पर भड़के विनय आनंद: 90s के सुपरस्टार के संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी

बॉलीवुड के ‘चीची’ यानी गोविंदा एक ऐसे अभिनेता हैं, जिनकी चमक दशकों बाद भी कम नहीं हुई है। हालांकि, पिछले काफी समय से वे बड़े पर्दे से दूर हैं, लेकिन सुर्खियों में वे आज भी बने रहते हैं। कभी अपने बेबाक बयानों की वजह से, तो कभी अपने परिवार के साथ अनबन के चलते। हाल ही में सोशल मीडिया पर गोविंदा की आर्थिक स्थिति को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ रही थीं, जिन्हें उनके भांजे विनय आनंद ने सिरे से खारिज कर दिया है।

क्या वाकई तंगी के दौर से गुजर रहे हैं गोविंदा?

पिछले कुछ समय से इंटरनेट पर गोविंदा के कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें वे छोटे आयोजनों और मंचों पर डांस करते नजर आ रहे हैं। इन वीडियो को देखकर लोगों ने कयास लगाने शुरू कर दिए कि गोविंदा के पास काम नहीं है और वे ‘दिवालिया’ होने की कगार पर हैं। सोशल मीडिया पर तो यहां तक कहा जाने लगा कि सुपरस्टार ‘सड़क पर आ गए हैं’।

इन अफवाहों पर लगाम लगाते हुए उनके भांजे और अभिनेता विनय आनंद ने ‘हिंदी रश’ पॉडकास्ट में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने उन लोगों को ‘बेवकूफ’ करार दिया जो गोविंदा की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं।

“90s में जब फ्लैट 12 लाख का था, तब वे 1 करोड़ लेते थे”

विनय आनंद ने गोविंदा के उस दौर की याद दिलाई जब बॉलीवुड पर सिर्फ और सिर्फ उनका राज था। विनय ने बताया कि 90 के दशक में, जब मुंबई के पॉश इलाके लोखंडवाला में एक फ्लैट की कीमत महज 12 से 13 लाख रुपये हुआ करती थी, तब गोविंदा एक फिल्म के लिए 1 करोड़ रुपये चार्ज करते थे।

उन्होंने आगे कहा, “गोविंदा आज भी अगर कहीं खड़े हो जाएं, तो उनके नाम पर ही 25-30 लाख रुपये आ जाएंगे। उन्होंने 70-80 फिल्में की हैं और उनमें से सिर्फ शुरुआती पांच फिल्मों की कमाई ही इतनी थी कि आज के कई स्टार्स उनके आसपास भी नहीं टिकते। ऐसे लेजेंड के बारे में दिवालिया होने जैसी बातें करना सिर्फ और सिर्फ मूर्खता है।”

क्या विनय आनंद को मिला ‘गोविंदा का भांजा’ होने का फायदा?

अक्सर बॉलीवुड में नेपोटिज्म की बात होती है, लेकिन विनय आनंद की कहानी कुछ अलग रही। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें गोविंदा का रिश्तेदार होने का कोई फायदा मिला, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। विनय ने बताया कि उन्होंने ‘लो मैं आ गया’, ‘दिल ने फिर याद किया’, ‘सौतेला’ और ‘आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया’ जैसी फिल्मों में काम किया, लेकिन यह सब उनके अपने संघर्ष का नतीजा था।

विनय ने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या मैं कभी डेविड धवन की किसी फिल्म में नजर आया? या गोविंदा के किसी करीबी डायरेक्टर ने मुझे कभी कास्ट किया? उनके दोस्तों ने मुझे कभी काम नहीं दिया। मेरा बहुत सारा समय काम मांगने में और संघर्ष करने में बीता है।”

बॉलीवुड से दूरी और भोजपुरी सिनेमा में बादशाहत

विनय आनंद हिंदी सिनेमा में भले ही बहुत लंबी पारी नहीं खेल सके, लेकिन उन्होंने भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई। ‘खूनी दंगल’, ‘तोसे प्यार बा’ और ‘चाचा भतीजा’ जैसी सुपरहिट फिल्में देकर वे वहां के बड़े स्टार बन गए। विनय का कहना है कि बिहार की जनता ने उन्हें जो प्यार और सम्मान दिया, उसके बाद वे बॉलीवुड की चकाचौंध को पूरी तरह भूल गए।

निष्कर्ष

गोविंदा भले ही आज फिल्मों में सक्रिय न हों, लेकिन विनय आनंद की बातें यह साफ करती हैं कि एक ‘सुपरस्टार’ कभी सड़क पर नहीं आता। उसकी विरासत और उसकी मेहनत उसे हमेशा ऊंचाइयों पर रखती है। विनय के अनुसार, गोविंदा के बारे में उड़ रही ये खबरें महज ‘सस्ती पब्लिसिटी’ का हिस्सा हैं और असलियत में उनका स्टारडम आज भी बरकरार है।

लेखन: [आपका नाम] साभार: लल्लनटॉप सिनेमा (इनपुट: शुभांजल)