यह एक झकझोर देने वाली और सनसनीखेज आपराधिक घटना है। मेरठ के इस मामले ने न केवल पुलिस प्रशासन को चुनौती दी, बल्कि सामाजिक रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं पर भी कई सवाल खड़े किए हैं। आपकी मांग के अनुसार, मैंने इस पूरी घटना को एक विस्तृत और आकर्षक खोजी लेख (Investigative Feature) के रूप में तैयार किया है।
मेरठ का ‘रील’ हत्यारा: प्यार, प्रतिशोध और सोशल मीडिया पर लाइव मर्डर की सनसनीखेज दास्तां
मेरठ, उत्तर प्रदेश: 26 फरवरी 2026 की वह दोपहर मेरठ के लिए आम दिनों जैसी ही थी। शहर की सड़कों पर सामान्य चहल-पहल थी, लोग अपने कामों में व्यस्त थे। लेकिन दोपहर के ठीक 1:30 बजे, महमूसा थाना क्षेत्र के ढलानवाला इलाके में जो हुआ, उसने न केवल उत्तर प्रदेश पुलिस की नींद उड़ा दी, बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। एक शख्स बीच सड़क पर गिरता है, उस पर गोलियां बरसाई जाती हैं और कातिल भागने के बजाय कैमरे के सामने आकर ‘रील’ बनाता है। यह कहानी है धोखे, बदले और एक ऐसे सनकी अपराधी की, जिसने कानून को सरेआम ठेंगा दिखाया।
भाग-1: सरेराह कत्लेआम और अपराधी का बेखौफ अंदाज
घटना की शुरुआत तब होती है जब 28 वर्षीय सुनील, जो मूल रूप से हस्तिनापुर के मानपुर गांव का निवासी था, अपनी बाइक पर सवार होकर ढलानवाला के बाजार की ओर निकलता है। सुनील पिछले दो साल से इसी इलाके में रह रहा था और खेती-किसानी के जरिए अपना जीवन यापन कर रहा था। उसे अंदाजा भी नहीं था कि मौत उसका पीछा कर रही है।
जैसे ही सुनील बाजार के पास पहुंचता है, पीछे से एक बाइक सवार तेजी से आता है और बिना किसी चेतावनी के सुनील की कमर में गोली मार देता है। गोली लगते ही सुनील संतुलन खो देता है और बाइक समेत सड़क पर गिर पड़ता है। आसपास के लोग सहम जाते हैं, लेकिन असली दहशत अभी शुरू होनी बाकी थी। अपराधी अपनी बाइक रोकता है, सुनील के पास पैदल चलकर आता है और यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह जिंदा न बचे, उसके सिर और शरीर पर दो और गोलियां दाग देता है। सुनील की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो जाती है।
आमतौर पर अपराधी कत्ल के बाद तुरंत फरार हो जाते हैं, लेकिन यहाँ मंजर कुछ और ही था। वह अपराधी लगभग 3 मिनट तक वहीं खड़ा रहा, हाथ में तमंचा लहराता रहा और भीड़ को चुनौती दी— “अगर किसी ने मुझे पकड़ने या रोकने की कोशिश की, तो उसका भी यही हश्र होगा।” लोग डर के मारे पत्थर बन गए। इसके बाद वह अपराधी अपनी बाइक पर सवार हुआ और जाते-जाते 4 मिनट की एक ‘रील’ शूट की, जिसे उसने सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो में उसने सीधे तौर पर यूपी पुलिस को चुनौती दी कि अगर उसे पकड़ने की कोशिश की गई, तो वह पुलिसवालों को भी मार डालेगा।
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भाग-2: पुलिस की कार्रवाई और अपराधी की पहचान
सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होते ही हड़कंप मच गया। लोग पूछने लगे कि आखिर यह शख्स कौन है जिसे कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं? महमूसा थाने की पुलिस और आला अधिकारी तुरंत हरकत में आए। घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया प्रोफाइल की मदद से अपराधी की पहचान प्रदीप धीमान (30 वर्ष) के रूप में हुई। प्रदीप फलौदा क्षेत्र के सनौता गांव का रहने वाला था।
पुलिस जब प्रदीप के घर पहुंची, तो वहां उसकी मुलाकात उसके बड़े भाई परविंदर से हुई। परविंदर ने पुलिस को एक पत्र सौंपा जो प्रदीप छोड़कर गया था। उस पत्र में लिखा था:
“मैंने जो भी किया है, उसमें मेरे परिवार का कोई हाथ नहीं है। पुलिस मेरे घरवालों को परेशान न करे। यह मेरा निजी बदला है।”
पुलिस ने तकनीक का सहारा लिया और प्रदीप के मोबाइल की लोकेशन ट्रेस की। लोकेशन गडीना के जंगलों में मिली। आनन-फानन में चार थानों की फोर्स और लगभग 150 पुलिसकर्मियों ने पूरे जंगल को घेर लिया। पूरी रात तलाशी अभियान चला और आखिरकार 27 फरवरी की सुबह प्रदीप एक गन्ने के खेत में छिपा हुआ मिला। वहां भी उसने हार नहीं मानी और करीब डेढ़ घंटे तक पुलिस को छकाया। कभी खुद को गोली मारने की धमकी दी तो कभी पुलिस पर फायर करने की। लेकिन अंततः पुलिस ने उसे सूझबूझ से दबोच लिया।

भाग-3: बदले की आग के पीछे की असली कहानी
जब प्रदीप पुलिस की गिरफ्त में आया और पूछताछ शुरू हुई, तो जो सच सामने आया उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। यह सिर्फ एक मर्डर केस नहीं था, बल्कि एक टूटे हुए परिवार और ईगो की लड़ाई थी।
शादी और बिखराव: प्रदीप और उसके भाई परविंदर की शादी साल 2017 में दो सगी बहनों, पूनम और रूबी से हुई थी। प्रदीप एक मेडिकल स्टोर चलाता था और उसकी दो बेटियां भी थीं। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन प्रदीप को शराब और जुए की लत लग गई। इसी बात को लेकर घर में कलेश रहने लगा।
अफेयर और विश्वासघात: लगभग दो साल पहले प्रदीप काम के सिलसिले में मुजफ्फरनगर गया। जब वह वापस आया, तो उसे पता चला कि उसकी पत्नी पूनम का अफेयर पड़ोस के सुनील (मृतक) के साथ चल रहा है। प्रदीप ने विरोध किया, पूनम की पिटाई की, लेकिन नतीजा यह हुआ कि पूनम अपनी दोनों बेटियों को लेकर सुनील के साथ भाग गई।
समझौता और दरार: प्रदीप ने बाद में पूनम से बात की और अपनी दोनों बेटियों को वापस ले आया। उसने एक सादे कागज पर ‘तलाकनामा’ लिखकर पूनम को आजाद कर दिया। इसके बाद पूनम ने सुनील से कोर्ट मैरिज कर ली और उसके साथ रहने लगी। प्रदीप ने अपनी सारी जमीन अपने भाई के नाम कर दी और अपनी बेटियों की परवरिश की जिम्मेदारी अपनी भाभी (पूनम की बहन) को सौंप दी। वह सब कुछ भूलकर शांत हो गया था, लेकिन सुनील और पूनम को यह मंजूर नहीं था।
भाग-4: वह फोन कॉल जिसने कातिल बना दिया
प्रदीप ने पुलिस को बताया कि वह अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सुनील और पूनम उसे अक्सर वीडियो कॉल करके चिढ़ाते थे। हाल ही में पूनम गर्भवती हुई। सुनील ने प्रदीप को फोन किया और उसे ‘नामर्द’ कहा। सुनील ने ताना मारा— “तू आठ साल में बेटा नहीं दे पाया, देख मैंने आठ महीने में इसे प्रेग्नेंट कर दिया। तू बेटा पैदा करने के लायक ही नहीं है।”
जब सुनील यह गंदी बातें कह रहा था, तो फोन के दूसरी तरफ पूनम जोर-जोर से हंस रही थी। प्रदीप के लिए अपनी पूर्व पत्नी की वह हंसी और सुनील की गालियां बर्दाश्त से बाहर हो गई। उसके पुरुषत्व और सम्मान को जो चोट पहुंची, उसने उसे एक खूंखार अपराधी में बदल दिया। उसने फैसला कर लिया कि वह इन दोनों को जिंदा नहीं छोड़ेगा।
भाग-5: रेकी और हत्या की साजिश
प्रदीप ने तीन तमंचों का इंतजाम किया। उसने कई दिनों तक सुनील की दिनचर्या (Routine) पर नजर रखी। उसे पता चला कि सुनील कब घर से निकलता है और किस रास्ते से बाजार जाता है। 26 फरवरी को वह पूरी तैयारी के साथ निकला था। उसने सुनील को मार गिराया और अपना प्रतिशोध पूरा किया।
भाग-6: कानूनी पेच और सामाजिक सवाल
सुनील की मौत के बाद पूनम अब मुश्किल में है। वह अब पुलिस के पास जाकर गुहार लगा रही है कि उसे प्रदीप की जमीन और उसकी दोनों बेटियां वापस चाहिए। उसका तर्क है कि वह अपने बच्चों की परवरिश करना चाहती है। हालांकि, प्रदीप का परिवार और उसकी अपनी बहन रूबी अब उसे पहचानने से भी इनकार कर रही हैं। प्रदीप की मां, उषा देवी का कहना है कि पूनम की वजह से उनका हंसता-खेलता परिवार बर्बाद हो गया, इसलिए उसे फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी।
पुलिस की जांच के मुख्य बिंदु:
हथियार कहाँ से आए? प्रदीप ने दो अन्य लोगों के नाम लिए हैं, जो सुनील के दोस्त बताए जा रहे हैं। पुलिस जांच कर रही है कि क्या उन्होंने ही हथियार मुहैया कराए थे।
सोशल मीडिया का दुरुपयोग: पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि अपराधी ने रील बनाकर जिस तरह कानून को चुनौती दी, वह समाज में कितना खतरनाक संदेश देता है।
संपत्ति विवाद: चूंकि जमीन अब प्रदीप के भाई के नाम है, इसलिए पूनम का कानूनी दावा कितना मजबूत होगा, यह अदालत तय करेगी।
निष्कर्ष
मेरठ की यह घटना हमें सिखाती है कि पारिवारिक कलह और अनैतिक संबंध जब ईगो (अहंकार) के साथ मिलते हैं, तो परिणाम कितना भयावह हो सकता है। प्रदीप आज सलाखों के पीछे है, सुनील मर चुका है और पूनम बेसहारा है। इन सबके बीच सबसे ज्यादा नुकसान उन दो मासूम बेटियों का हुआ है, जिनके पिता कातिल बन गए और मां ने उन्हें छोड़ दिया था।
उत्तर प्रदेश पुलिस अब इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सजा दिलाने की तैयारी कर रही है ताकि समाज में यह संदेश जाए कि रील बनाकर कानून को चुनौती देने वालों का अंजाम क्या होता है।
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