अंहकार मे डूबी पत्नी ने पति को नौकर समझकर अपमानित किया….सच सामने आते ही सब दंग रह गए

अहंकार का पतन: आरव वीर राजपूत की कहानी

यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जिसने गरीबी को अपना ढाल बनाया ताकि वह दुनिया का असली चेहरा देख सके। यह कहानी है आरव वीर राजपूत की, जिसे दुनिया एक “बेचारा घर जमाई” समझती थी, लेकिन वह पूरे देश के कॉर्पोरेट जगत का बेताज बादशाह था।

अध्याय 1: तिरस्कार की दहलीज

मुंबई के आलीशान “मल्होत्रा विला” में आज मातम जैसा माहौल था, लेकिन किसी की मौत पर नहीं, बल्कि एक शादी पर। शहर की मशहूर बिजनेस टायकून आरोही मल्होत्रा की शादी उसके पिता ने जबरदस्ती एक साधारण से दिखने वाले लड़के, आरव से करवा दी थी।

“तो यही है वो लड़का जिसकी वजह से अब इस घर में हमें शर्म झेलनी पड़ेगी। मां, पापा ने सच में मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी!” आरोही ने चिल्लाते हुए कहा। उसकी मां, श्रीमती मल्होत्रा ने आरव को ऊपर से नीचे तक देखा और घृणा से कहा, “तुम्हें हल चलाने के अलावा आता क्या है? जाओ, जाके झाड़ू लगाओ।”

आरव ने सिर झुकाकर शांति से जवाब दिया, “जी मां जी, कोशिश करूंगा कि आपको मुझसे कोई शिकायत ना हो।” आरोही ने उसे चेतावनी दी, “गलतफहमी में मत रहना। तुम उस तरफ रहोगे, मैं इस तरफ। मेरी हद में आने की गलती मत करना।”

आरव के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी। वह मन ही मन सोच रहा था, “इंसान को उसकी गरीबी नहीं, उसका घमंड अंधा बनाता है।”

अध्याय 2: नौकर या दामाद?

अगले कुछ महीनों तक आरव के साथ घर के नौकरों से भी बदतर व्यवहार किया गया। वह सुबह उठकर सबके लिए चाय बनाता, घर की सफाई करता और आरोही के ताने सुनता।

“पापा ने पति नहीं, घर के लिए फ्री का नौकर ले लिया है,” आरोही अक्सर अपनी सहेलियों से फोन पर कहती थी। एक दिन जब आरव चाय लेकर आया, तो श्रीमती मल्होत्रा ने कहा, “ध्यान रखना, कप में एक बूंद भी कम ज्यादा हुई तो दोबारा बनानी पड़ेगी।”

उधर, आरव का एक दूसरा जीवन भी था। रात के अंधेरे में जब पूरा घर सो जाता, आरव अपने पुराने फोन से कुछ गुप्त कॉल करता था। “फेज वन पूरा हो चुका है। अब फेज टू शुरू करो। किसी को शक तक नहीं होना चाहिए,” आरव ने अपने पीए मिस्टर खन्ना को निर्देश दिया। मिस्टर खन्ना ने दूसरी तरफ से कहा, “यस सर, सब कुछ आपकी योजना के मुताबिक चल रहा है। ‘आरआर होल्डिंग्स’ अब बाजार पर कब्जा कर रही है।”

आरव ने ठंडे स्वर में कहा, “थोड़ा और गिरने दो। डर जरूरी है ताकि सबक हमेशा याद रहे।”

अध्याय 3: वह अपमानजनक पार्टी

आरोही की सहेली कियारा ने एक बड़ी पार्टी रखी थी। कियारा ने जिद की कि आरोही अपने पति के साथ आए। आरोही बहुत झिझक रही थी, लेकिन उसे जाना पड़ा। उसने आरव को पुराने और सस्ते कपड़े पहनाए और कहा, “पार्टी में एक कोने में चुपचाप खड़े रहना। किसी से बात मत करना, मेरी इज्जत का सवाल है।”

पार्टी में सबका ध्यान आरोही पर था, लेकिन जैसे ही लोगों ने आरव को देखा, ठहाके लगने शुरू हो गए। “ये कौन है? लगता है ड्राइवर को भी अंदर बुला लिया है,” किसी ने मजाक उड़ाया। आरोही के प्रतिद्वंद्वी बिजनेसमैन ने तंज कसा, “आरोही, बिजनेस में तो तुम्हारी हालत खराब है ही, लेकिन लगता है तुम्हारे पति को कपड़े पहनने की तमीज भी नहीं है।”

आरव वहां पत्थर की तरह शांत खड़ा रहा। तभी आरोही ने गुस्से में उसे वहां से चले जाने को कहा, “मुझे मत छुओ! छोड़ो मुझे! अपने काम से मतलब रखो तुम।” आरव बस एक तरफ खड़ा होकर मल्होत्रा ग्रुप के गिरते हुए शेयर देख रहा था।

अध्याय 4: मल्होत्रा ग्रुप का पतन

अचानक, मल्होत्रा ग्रुप पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी कंपनी के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स हाथ से निकलने लगे। उनके टेंडर “रॉयल ग्लोबल” नाम की एक नई कंपनी ने बहुत ही कम कीमत पर छीन लिए।

“मां, कंपनी डूब रही है! 500 करोड़ का घाटा हुआ है!” आरोही रोते हुए घर आई। श्रीमती मल्होत्रा ने फिर से आरव पर दोष मढ़ा, “देख लिया! इस मनहूस के कदम पड़ते ही सब बर्बाद हो गया। जाओ, जाके झाड़ू लगाओ, यही तुम्हारी औकात है।”

तभी बैंक का नोटिस आया। सात दिनों के भीतर अगर 500 करोड़ का इंतजाम नहीं हुआ, तो मल्होत्रा विला और उनकी पूरी कंपनी सील कर दी जाएगी। आरोही पूरी तरह टूट चुकी थी। वह दर-दर भटक रही थी, लेकिन कोई उसकी मदद करने को तैयार नहीं था।

अध्याय 5: असली राजा का उदय

सातवें दिन की शाम, जब बैंक के अधिकारी घर के बाहर खड़े थे, तभी एक खबर आई। “आरआर होल्डिंग्स” नाम की कंपनी ने मल्होत्रा ग्रुप के खाते में 600 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए हैं।

“मां, हम बच गए! आरआर होल्डिंग्स के चेयरमैन खुद हमसे मिलने आ रहे हैं!” आरोही ने खुशी से चिल्लाकर कहा। शाम को घर को सजाया गया। आरव को फिर से कोने में रहने को कहा गया।

तभी बाहर तीन काली लग्जरी गाड़ियां रुकीं। मिस्टर खन्ना बाहर निकले। आरोही और उसकी मां ने उनका स्वागत किया। “मिस्टर खन्ना, आपके चेयरमैन कहां हैं?”

खन्ना ने मुस्कुराते हुए कहा, “मेरे बॉस तो यहीं हैं, इसी घर में।” और वे सीधे आरव के पास गए और झुककर कहा, “गुड इवनिंग सर। आपके कहे अनुसार सारा निवेश पूरा हो चुका है।”

पूरा कमरा सन्न रह गया। आरोही के हाथ से चाय का कप गिर गया। “ये… ये क्या मजाक है?” श्रीमती मल्होत्रा की आवाज कांप रही थी। मिस्टर खन्ना ने गरजते हुए कहा, “ये मामूली आदमी नहीं, ये हैं आरव वीर राजपूत। आरआर होल्डिंग्स के चेयरमैन और भारत के सबसे युवा अरबपति।”

अध्याय 6: अंतिम न्याय

आरव ने अपनी गर्दन सीधी की। उसकी आंखों में अब वो नौकर वाली विनम्रता नहीं, बल्कि एक सम्राट वाला तेज था। “आज भी मैं वही आरव हूं, बस अब आपकी नजर बदल गई है,” आरव ने शांत स्वर में कहा।

आरोही रोने लगी, “अगर आप इतने बड़े इंसान थे, तो आपने यह सब क्यों सहा?” आरव ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, “तुम्हारे पिता चाहते थे कि मैं देखूं कि तुम इंसान की इज्जत उसकी दौलत से करती हो या उसके वजूद से। और मुझे अफसोस है कि तुम इस परीक्षा में पूरी तरह फेल हो गई।”

श्रीमती मल्होत्रा अब आरव के पैर पकड़ने की कोशिश कर रही थीं, “अरे दामाद जी, हम तो बस आपकी परीक्षा ले रहे थे।” आरव पीछे हट गया, “बस कीजिए। सच को सफाई की जरूरत नहीं होती। आपने गरीबी का मजाक नहीं उड़ाया, आपने इंसानियत का कत्ल किया।”

आरव ने मल्होत्रा ग्रुप के सारे कागजात टेबल पर रख दिए। “सारे कर्ज चुका दिए गए हैं। यह घर और कंपनी अब आपके नाम है। मैंने आपसे बदला नहीं लिया, बल्कि आपको वो सबक दिया है जो पैसा नहीं सिखा सकता।”

आरव ने अपना कोट पहना और दरवाजे की तरफ चल दिया। “मैं इस घर में तभी लौटूंगा जब यहां दामाद नहीं, पति और बेटा समझा जाऊंगा… जो होना अब नामुमकिन है।”

आरव अपनी गाड़ी में बैठकर चला गया। मल्होत्रा खानदान के पास अब दौलत तो थी, लेकिन उन्होंने वह अनमोल हीरा खो दिया था जिसे वे कभी पहचान नहीं पाए।

शिक्षा: किसी के साधारण लिबास को उसकी औकात मत समझना, क्योंकि अक्सर समुद्र की गहराई में ही सबसे कीमती मोती छिपे होते हैं।