बचपन का प्यार सड़क किनारे भीख मांगते मिला… फिर जो हुआ | Heart touching story

.
.

बचपन का प्यार सड़क किनारे भीख मांगते मिला… फिर जो हुआ | दिल छू लेने वाली कहानी

शिवानी हमेशा से एक होनहार और मेहनती लड़की रही थी। उसकी ज़िंदगी में संघर्ष की कोई कमी नहीं थी, लेकिन वह हर मुश्किल को मुस्कान के साथ झेलती थी। प्राइवेट नौकरी में उसका ट्रांसफर अचानक केरल के खूबसूरत शहर मुन्नार में हो गया। यह वही जगह थी जहाँ उसने अपने बचपन के सबसे सुनहरे दिन बिताए थे। यहाँ की हरियाली, ऊँचे-ऊँचे पहाड़ और चाय के बागानों की खुशबू उसके दिल में दबी पुरानी यादों को ताजा कर देती थी।

ऑफिस ज्वॉइन करने के कुछ ही दिनों में शिवानी ने तय कर लिया कि वह एक बार फिर अपने बचपन की उन यादों को जीना चाहती है। एक दिन छुट्टी लेकर वह अपनी पसंदीदा जगह, मुन्नार की पहाड़ियों की ओर निकल पड़ी। कार की खिड़की से बाहर झाँकते हुए हर मोड़ पर उसे अपनी पुरानी जिंदगी की झलक मिल रही थी। जैसे ही वह उस चट्टान के पास पहुँची जहाँ कभी घंटों बैठा करती थी, उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

लेकिन वहाँ पहुँचते ही उसकी आँखों के सामने एक हैरान कर देने वाला दृश्य था। एक आदमी गंदे कपड़ों में, बिखरे बाल और दाढ़ी, शराब की बदबू से घिरा, सड़क किनारे पड़ा था। पहले तो शिवानी उसे पहचान नहीं पाई, लेकिन जैसे ही उसने झुककर गौर से देखा, उसके होश उड़ गए। “राजू! यह तुम हो?” उसकी आवाज काँप रही थी।

राजू धीरे-धीरे उठकर बैठा, आँखें लाल थीं। जैसे ही उसने शिवानी को देखा, उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। वह फूट-फूट कर रोने लगा। शिवानी को अब कोई परवाह नहीं थी कि उसके कपड़े गंदे हो जाएँगे या लोग क्या सोचेंगे। वह झुककर राजू को गले से लगा लेती है। राजू उस गले लगने में ऐसे टूटकर रो रहा था जैसे बरसों का दबा हुआ दर्द बाहर आ रहा हो।

लेकिन आखिर यह राजू कौन था? शिवानी उसे इतनी अच्छी तरह से क्यों पहचानती थी? असल में, राजू और शिवानी का रिश्ता बचपन से ही बहुत गहरा था। दोनों एक ही अनाथ आश्रम में पले-बढ़े थे। राजू के माता-पिता नहीं थे, उसने आश्रम को ही अपना घर मान लिया था। वहीं शिवानी भी थी। दोनों हमउम्र थे, साथ-साथ बड़े हुए, साथ पढ़ाई की, साथ सपने देखे।

राजू बचपन से ही बड़ा सपना देखता था – करोड़पति बनने का। वह अक्सर कहता, “देखना, एक दिन मैं बहुत बड़ा आदमी बनूंगा।” बाकी बच्चे हँसते, लेकिन शिवानी उसकी आँखों में चमकते सपनों को सच मानती थी। धीरे-धीरे शिवानी के मन में राजू के लिए मासूम प्यार पनपने लगा, पर उसने कभी इज़हार नहीं किया।

कॉलेज खत्म होते-होते दोनों को प्राइवेट कंपनियों में नौकरी मिल गई। नई जिम्मेदारियाँ, नए सपने, नई जगह। शिवानी चाहती थी कि अब दोनों शादी कर लें, लेकिन राजू का सपना था – करोड़पति बनना। एक शाम शिवानी ने हिम्मत करके पूछा, “राजू, अब शादी के बारे में क्या सोचते हो?” राजू ने सीधी आवाज में कहा, “जब तक करोड़पति नहीं बन जाता, शादी नहीं करूंगा। और जब करूंगा तो किसी अमीर घर की लड़की से।”

यह सुनकर शिवानी का दिल टूट गया। उसने मुस्कुरा कर अपनी आँखें झुका लीं। उसी रात उसने ठान लिया कि अब वह अपने अतीत को पीछे छोड़ देगी। अचानक कंपनी से ट्रांसफर का ऑफर आया और शिवानी ने बिना देर किए हाँ कर दी। वह चुपचाप केरल छोड़कर नए शहर चली गई।

राजू ने अपने सपने को और मजबूती से पकड़ लिया। दिन-रात मेहनत, हर छोटी-बड़ी नौकरी, हर पैसे की बचत। पाँच साल तक राजू ने खूब मेहनत की, पैसे जोड़े, निवेश किए। आखिरकार वह दिन भी आया जब उसे लगा कि अब वह करोड़पति बन गया है। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। डॉक्टर ने जाँच के बाद बताया – “राजू, तुम्हें कैंसर है, वह भी आखिरी स्टेज का।”

डॉक्टर बोला, “इलाज कराओगे तो दो महीने, नहीं तो तीस दिन।” राजू की दुनिया उजड़ गई। उसने तय किया कि अब वह बचे हुए दिन खुलकर जिएगा। बैंक से पैसे निकाले, महंगे होटल में रहा, महँगी कार खरीदी, ऐश की जिंदगी जी। लेकिन महीने के आखिर में जब मौत नहीं आई, तो उसने फिर से जाँच कराई। नई रिपोर्ट आई – “तुम्हें कोई बीमारी नहीं है।” पहली रिपोर्ट में गलती थी। डॉक्टर ने माफी माँगी, लेकिन तब तक राजू सब कुछ गँवा चुका था – पैसे, सपने, आत्मविश्वास।

अब राजू टूट चुका था। शराब उसका सहारा बन गई। धीरे-धीरे पैसे भी खत्म हो गए। होटल छोड़कर सड़कों पर भटकने लगा। पुराने दोस्त, सहकर्मी सबने साथ छोड़ दिया। जो कभी करोड़पति बनने का सपना देखता था, आज सड़क किनारे भीख माँग रहा था।

इधर पाँच साल बीत चुके थे। शिवानी ने खुद को काम में व्यस्त कर लिया था। वो अपने अतीत को भूलने की कोशिश कर रही थी। लेकिन एक दिन कंपनी ने फिर से उसका ट्रांसफर केरल कर दिया। पुराने दिनों की याद में वह फिर उसी चट्टान पर गई, जहाँ कभी राजू के साथ बैठा करती थी। वहाँ पहुँचकर उसने देखा – सड़क किनारे वही राजू पड़ा था।

शिवानी की आँखें भर आईं। वह दौड़कर राजू के पास गई, उसका नाम पुकारा। राजू ने धीरे-धीरे आँखें खोलीं, जैसे ही उसने शिवानी को देखा, फिर से फूट-फूट कर रोने लगा। शिवानी ने उसे गले से लगा लिया। उसने राजू को अपने फ्लैट ले जाकर नहलाया, साफ कपड़े पहनाए, बाल कटवाए। आईने में खुद को देखकर राजू की आँखों से फिर आँसू बह निकले।

शिवानी ने प्यार से समझाया, “राजू, ऊपर वाले ने जो चाहा, वो हो गया। लेकिन तुम्हें ऐसे टूटकर जीना ठीक नहीं है। तुम पढ़े-लिखे हो, मेहनती हो। चाहो तो फिर से नौकरी कर सकते हो। करोड़पति न सही, लेकिन सुकून से तो जी सकते हो।”

राजू ने सिर झुका कर कहा, “शिवानी, तुम सही कह रही हो। मैंने पैसों की दौड़ में सब कुछ खो दिया, लेकिन अब तुम्हारे साथ रहकर लगता है कि मैं फिर से जी सकता हूँ।” शिवानी ने उसे अपने फ्लैट में रहने दिया। धीरे-धीरे राजू ने नौकरी की तलाश शुरू की और एक महीने में ही उसे काम मिल गया।

एक दिन राजू ने हिम्मत करके पूछा, “शिवानी, तुमने अब तक शादी क्यों नहीं की?” शिवानी ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया, “क्योंकि कोई अच्छा इंसान मिला ही नहीं। शायद मैं अब भी उसी का इंतजार कर रही थी।” राजू ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “तो क्यों न तुम मुझसे ही शादी कर लो? बचपन से हम साथ हैं। अब मुझे समझ आ गया है कि करोड़पति पत्नी का सपना बेकार था, मुझे तो बस तुम्हारी जरूरत है।”

शिवानी की आँखों से आँसू छलक पड़े। उसने कहा, “राजू, याद है जब मैंने तुमसे शादी का सवाल पूछा था, तब तुमने मुझे ठुकरा दिया था? लेकिन आज जब तुम खुद कह रहे हो, तो मेरा दिल मना नहीं कर पा रहा।” राजू ने उसका हाथ थामा, “मुझे माफ कर दो, शिवानी। अब मैं अपनी बाकी जिंदगी तुम्हारे साथ ही बिताना चाहता हूँ।”

मार्च 2022 में दोनों ने सादगी से शादी कर ली। भले ही उनके पास करोड़ों की दौलत नहीं थी, लेकिन एक-दूसरे का साथ, विश्वास और प्यार था – और वही उनकी सबसे बड़ी दौलत थी।

दोस्तों, पैसा जिंदगी के लिए जरूरी है, लेकिन रिश्तों और सच्चे प्यार को भूल जाएँ तो करोड़पति बनकर भी इंसान खाली रह जाता है। शिवानी का धैर्य और प्यार ही राजू की सबसे बड़ी दौलत बना। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो अपने विचार ज़रूर साझा करें। प्यार और विश्वास से बड़ी कोई दौलत नहीं।

.
play video: