जब बहु ने किया झूठा दहेज केस, फिर ससुर ने चली ऐसी चाल कि, बहु के पैरों तले जमीन खिसक गई 😲

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“जब बहू ने किया झूठा दहेज केस, फिर ससुर ने चली ऐसी चाल कि बहू के पैरों तले जमीन खिसक गई”

यह कहानी उस समय की है जब एक भारतीय परिवार के सम्मान और रिश्तों पर एक बहू की वजह से संकट आ गया था। कभी जो परिवार प्यार और समझ के साथ अपने रिश्तों को निभा रहा था, उसी परिवार को एक झूठी साजिश ने पूरी तरह से उलझा दिया।

रिटायर्ड एसआई अशोक त्रिपाठी और उनकी पत्नी सुनैना त्रिपाठी, एक छोटे से गांव के सम्मानित और सादे लोग थे। उनकी पूरी जिंदगी सादा और संतुष्ट थी। उनका एक बेटा, मनीष, बेंगलुरु में एक अच्छी नौकरी करता था। शादी के बाद, मनीष अपनी पत्नी सिद्धि के साथ बेंगलुरु शिफ्ट हो गया था। अशोक और सुनैना अपने बेटे और बहू से मिलने के लिए हमेशा इंतजार करते रहते थे, लेकिन एक दिन जब उनका बेटा अचानक घर आया, तो उनकी ज़िंदगी पूरी तरह से बदल गई।

पहली मुलाकात:

यह सब तब शुरू हुआ जब मनीष अचानक अपने माता-पिता से मिलने आया। मनीष का चेहरा घबराया हुआ था, उसकी आंखों में तनाव था, और उसकी जुबान से कोई भी स्पष्ट शब्द नहीं निकल रहा था। सुनैना और अशोक दोनों परेशान हो गए, क्योंकि मनीष का इस तरह का व्यवहार कुछ नया था। मनीष ने बताया कि उसकी पत्नी सिद्धि अपने मायके जा रही थी, और वह अकेला ही घर आया था।

सुनैना ने कई बार पूछा कि क्या कुछ हुआ है, लेकिन मनीष बार-बार यही कहता रहा कि “कुछ नहीं, बस ऐसी ही आई हूं।” इस दौरान दोनों माता-पिता को कुछ गड़बड़ महसूस हो रही थी, लेकिन उन्होंने मनीष से कुछ भी पूछने की हिम्मत नहीं की।

दूसरी मुलाकात:

अगले दिन, सिद्धि अचानक घर में आ गई। उसकी आंखों में घमंड और गुस्सा था। सिद्धि ने सीधे अपनी अलमारी खोली और सभी महंगे कपड़े, गहने और सामान एक सूटकेस में फेंकने लगी। सुनैना चौंकी और दौड़कर सिद्धि के पास गई।

“बहू, यह क्या कर रही हो? यह सब क्यों निकाल रही हो?” सुनैना ने पूछा।

सिद्धि ने जवाब दिया, “अभी तो मैं सिर्फ कपड़े और गहने लेकर जा रही हूं। कुछ दिन और रुकिए, फिर सब कुछ ले जाऊंगी, और तुम्हारे बेटे की आधी तनख्वाह भी।”

यह सुनकर सुनैना के चेहरे पर शॉक था। सिद्धि ने अचानक ही ऐसा क्यों किया, इसे कोई समझ नहीं पा रहा था। सिद्धि ने कहा कि वह मनीष से तलाक लेना चाहती है, क्योंकि मनीष किसी और से बात करता है। यह सुनकर अशोक और सुनैना दोनों के होश उड़ गए।

पुलिस का आना:

अशोक और सुनैना को इस पूरी स्थिति का कोई सही अंदाजा नहीं था कि क्या चल रहा था। तभी पुलिस आई। दो कांस्टेबल और एक महिला कांस्टेबल दरवाजे पर खड़ी थी। पुलिस ने कहा कि उनके खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज हुआ है। यह सुनकर त्रिपाठी परिवार के होश उड़ गए। अशोक और सुनैना की आंखों में आंसू थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और थाने ले गई।

थाने में पूछताछ:

तीनों को लॉकअप में डाल दिया गया। पुलिस ने अशोक जी को थप्पड़ मारा, और सुनैना को प्रताड़ित किया। मनीष ने अपनी पूरी स्थिति अपनी पत्नी सिद्धि को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह कुछ नहीं कर पा रहा था। मनीष का दिल इस साजिश से टूट चुका था। वह मजबूर था, लेकिन फिर भी अपने माता-पिता के लिए कुछ नहीं कर पा रहा था।

कभी वह परिवार अपने गांव में पंचायत के फैसले करवाता था, आज वही परिवार खुद थाने में अपने सम्मान के लिए खड़ा था। पुलिस ने मनीष को भी प्रताड़ित किया। इस दौरान पुलिस ने कहा, “अब तुम्हारा क्या होगा?” और उन्होंने उन्हें सबक सिखाने की धमकी दी।

जमानत मिलना:

थोड़ी देर बाद, अनिल, अशोक जी का पुराना दोस्त, जो एक वकील था, थाने पहुंचा। उसने बिना समय गंवाए कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी। जमानत मिल गई, लेकिन मनीष की जमानत में और समय लगने वाला था।

“तुम्हारी इज्जत दांव पर है, अनिल,” अशोक जी ने कहा। “हम कुछ नहीं कर पा रहे।”

अनिल ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा, “देखो, केस में जीतने की संभावना कम है। लेकिन मैं तुम्हारे लिए सब कुछ करूंगा।”

कोर्ट में सच्चाई का सामने आना:

अगले दिन कोर्ट में सुनवाई हुई। सिद्धि ने दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए। लेकिन अनिल ने सीसीटीवी फुटेज पेश किया, जिसमें सिद्धि को किसी अजनबी लड़के के साथ दिखाया गया था। यह वीडियो सिद्धि के खिलाफ साक्ष्य बन गया। सिद्धि ने जो झूठे आरोप लगाए थे, वह पूरी तरह से बेनकाब हो गए।

सीसीटीवी में सिद्धि और उस लड़के के बीच बातचीत साफ दिखाई गई थी। सिद्धि ने अपने रिश्ते को छिपाकर अपने परिवार को धोखा दिया था। कोर्ट में सिद्धि का चेहरा सफेद पड़ गया। उसने झूठे आरोप लगाए थे, और अब पूरी दुनिया के सामने उसकी सच्चाई आई थी।

मनीष का फैसला:

मनीष ने सिद्धि से कहा, “तुम्हारे कारण मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई। अब तुम्हें मेरे साथ नहीं रहना चाहिए। तुमने पूरी तरह से मेरी जिंदगी का चैन छीन लिया।”

सिद्धि, जिसे कभी मनीष से प्यार था, अब अकेली और लाचार महसूस कर रही थी। वह अपनी साजिश में फंस चुकी थी। सिद्धि के माता-पिता ने भी उसे बाहर निकाल दिया।

अंतिम सजा:

सिद्धि को उसकी सारी गलती का अहसास हुआ, लेकिन अब वह किसी से कुछ नहीं मांग सकती थी। उसकी जिंदगी में कुछ भी बचा नहीं था। मनीष ने अपनी मां और पिता से माफी मांगी और उन्हें अपना सम्मान वापस दिलवाने की पूरी कोशिश की।

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि किसी को झूठे आरोपों से सजा देने से पहले हमें सच को जानना चाहिए। दहेज के नाम पर समाज में बहुत सारी साजिशें होती हैं, लेकिन हमें हमेशा सच्चाई का साथ देना चाहिए।

समाप्त