महिला ने बाल साफ करने की क्रीम लगाई जिसकी वजह से महिला के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/
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हवस, विश्वासघात और प्रतिशोध: लाडपुरा का वह भयानक अध्याय
1. अभाव और इच्छाओं का द्वंद्व
राजस्थान का कोटा जिला अपनी शिक्षा और उद्योगों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इसके ग्रामीण अंचल आज भी अपनी सादगी और संघर्षों के लिए जाने जाते हैं। लाडपुरा गाँव में रहने वाले सुल्तान सिंह की कहानी भी ऐसी ही थी। सुल्तान एक सीधा-सादा व्यक्ति था जो गाँव के पास ही एक ईंटों के भट्टे पर कड़ी मेहनत करता था। तपती धूप और धूल के बीच वह दिनभर पसीना बहाता ताकि महीने के अंत में ₹16,000 कमा सके।
एक मजदूर के लिए ₹16,000 की राशि बड़ी होती है, लेकिन सुल्तान के लिए यह कभी पर्याप्त नहीं थी। इसका कारण थी उसकी पत्नी शिवानी देवी। शिवानी स्वभाव से अत्यंत खर्चीली और चंचल थी। उसे गाँव की सादगी पसंद नहीं थी; उसे शहर की चमक-धमक, महंगे मेकअप और नए-नए कपड़ों का जुनून था। सुल्तान जो पैसे महीने भर की मेहनत के बाद लाता, शिवानी उन्हें हफ़्ते भर में ही उड़ा देती थी।
सुल्तान अक्सर उसे समझाता, “शिवानी, हम गरीब लोग हैं। थोड़ा पैसा भविष्य के लिए बचाना जरूरी है।” पर शिवानी पर इसका कोई असर नहीं होता। थक-हारकर सुल्तान ने घर का वित्तीय नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया और शिवानी को केवल उतनी ही राशि देने लगा जितनी नितांत आवश्यक थी। यहीं से शिवानी के मन में विद्रोह और गलत रास्तों पर चलने की भावना पनपने लगी।

2. मेडिकल शॉप और ‘बाल साफ करने वाली क्रीम’ का बहाना
अक्टूबर 2025 की शुरुआत में लाडपुरा गाँव में एक नई हलचल हुई। सुल्तान के घर के ठीक सामने एक खाली पड़ी दुकान में योगेश नाम के एक युवक ने अपनी मेडिकल शॉप खोली। योगेश शहर से आया था, दिखने में आकर्षक था और बात करने में चतुर था।
शिवानी ने जब योगेश को देखा, तो उसके दिमाग में एक शैतानी योजना ने जन्म लिया। उसने सोचा कि यदि वह इस लड़के को अपने प्रभाव में ले ले, तो उसकी सौंदर्य प्रसाधनों (मेकअप) की जरूरतें भी पूरी हो जाएंगी और उसे पैसे भी मिल जाएंगे।
10 अक्टूबर 2025 को शिवानी पहली बार योगेश की दुकान पर पहुँची। उसने बहाना बनाया, “मुझे एक अच्छी बाल साफ करने वाली क्रीम (Hair Removal Cream) चाहिए।” योगेश ने मुस्कुराते हुए उसे क्रीम दी। जब पैसों की बात आई, तो शिवानी ने अपनी गरीबी का रोना रोया और धीरे से इशारा किया कि उसका पति घर पर नहीं रहता। योगेश, जो खुद भी कमजोर चरित्र का था, शिवानी के इशारों को समझ गया।
अगले दिन शिवानी फिर उसी क्रीम के बहाने गई और इस बार उसने योगेश को सीधे अपने घर आने का निमंत्रण दे दिया। योगेश दुकान बंद कर शिवानी के घर पहुँचा। उस दिन दोनों के बीच अनैतिक संबंध बने। बदले में शिवानी ने योगेश से ₹2,000 लिए। शिवानी को लगा कि उसने अपनी आर्थिक तंगी का ‘समाधान’ ढूंढ लिया है।
3. साहूकार का कर्ज और दूसरा कांड
शिवानी और योगेश का प्रेम प्रसंग चल ही रहा था कि एक दिन गाँव का साहूकार मदन सिंह सुल्तान के घर पहुँचा। मदन सिंह ने शिवानी को बताया कि सुल्तान ने उससे ₹25,000 कर्ज लिया था, जिसका ब्याज भी अब तक नहीं चुकाया गया है। उसने धमकी दी, “यदि दो दिन में पैसे नहीं मिले, तो मैं तुम्हारे घर पर कब्जा कर लूँगा।”
जब सुल्तान काम से लौटा, तो शिवानी ने उससे इस बारे में पूछा। सुल्तान ने स्वीकार किया कि उसने कर्ज लिया था, पर वह उसे चुकाने में असमर्थ था। शिवानी ने यहाँ भी वही रास्ता अपनाया जो उसने योगेश के साथ अपनाया था। उसने सोचा कि यदि वह मदन सिंह को अपने जाल में फंसा ले, तो कर्ज का बोझ भी उतर जाएगा और उसकी अय्याशी भी चलती रहेगी।
दो दिन बाद जब मदन सिंह फिर आया, तो शिवानी ने उसे घर के अंदर बुला लिया। उसने साहूकार को ‘बहती गंगा में हाथ धोने’ का प्रस्ताव दिया। मदन सिंह, जो पहले से ही नीच स्वभाव का था, तुरंत मान गया। उसने वादा किया कि वह ब्याज माफ कर देगा और शिवानी को और पैसे भी देगा। इस प्रकार, शिवानी अब एक साथ दो पुरुषों के साथ अनैतिक संबंधों में लिप्त हो गई।
4. पड़ोसन की नजर और भेद का खुलना
पाप का घड़ा कभी न कभी भरता ही है। शिवानी की पड़ोसन आरजू देवी एक चतुर महिला थी। उसने गौर किया कि जब सुल्तान काम पर जाता है, तब कभी योगेश तो कभी मदन सिंह चोरी-छिपे शिवानी के घर आते-जाते हैं। उसे शक हुआ और उसने उन पर नजर रखना शुरू कर दिया।
आरजू ने देखा कि शिवानी बार-बार योगेश की दुकान पर जाकर ‘बाल साफ करने वाली क्रीम’ मांगती है, जो कि केवल एक कोड वर्ड या बहाना था। उसने मदन सिंह को भी देर रात शिवानी के घर से निकलते देखा। आरजू ने तय कर लिया कि वह सुल्तान को इस गदंगी के बारे में सब कुछ बताएगी।
5. सुल्तान का प्रतिशोध: एक भयानक रात
25 अक्टूबर 2025 की शाम को जब सुल्तान ईंटों के भट्टे से साइकिल पर लौट रहा था, आरजू देवी ने उसे रास्ते में ही रोक लिया। उसने सुल्तान को शिवानी की बेवफाई, योगेश और मदन सिंह के साथ उसके संबंधों के बारे में विस्तार से बताया। सुल्तान के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस पत्नी के लिए वह दिन-रात मेहनत करता था, वह उसकी पीठ पीछे इतना घिनौना खेल खेल रही थी।
सुल्तान घर पहुँचा, लेकिन उसने शिवानी पर अपना गुस्सा जाहिर नहीं किया। उसने शांति से खाना खाया। लेकिन उसके दिमाग में प्रतिशोध की एक ऐसी ज्वाला जल रही थी जिसने उसे हैवान बना दिया।
रात करीब 9:30 बजे, सुल्तान ने घर का दरवाजा अंदर से बंद किया। उसने शिवानी को पकड़ा, उसके हाथ-पैर बांध दिए और उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि वह चिल्ला न सके। उसने शिवानी के मेकअप के सामान को खंगाला। वहाँ ‘बाल साफ करने वाली’ 101 क्रीम की डिब्बियां पड़ी थीं। सुल्तान ने उन सारी क्रीमों को निकाला और उनमें पास पड़ी फेविकोल (शक्तिशाली गोंद) की डिब्बी मिला दी।
उसने इस जहरीले और चिपचिपे लेप को अपनी पत्नी के संवेदनशील अंगों में जबरन भर दिया। शिवानी तड़पती रही, उसकी आँखों में मौत का खौफ था, लेकिन सुल्तान का दिल नहीं पसीजा। दर्द और संक्रमण की वजह से शिवानी बेहोश हो गई।
पर सुल्तान का गुस्सा इतने से शांत नहीं हुआ। उसने पास रखा एक धारदार हथियार (पसी) उठाया और अपनी पत्नी की गर्दन काट दी। उसने शिवानी की लाश के टुकड़े किए और उन्हें दो बोरियों में भर दिया।
6. अंत और न्याय की दहलीज
रात के सन्नाटे में सुल्तान उन बोरियों को अपनी साइकिल पर लादकर खेतों की ओर निकल गया। वह लाश को ठिकाने लगाने के लिए गड्ढा खोद ही रहा था कि तभी गाँव का जमींदार अर्जुन सिंह वहां से गुजरा। अर्जुन सिंह ने टॉर्च जलाई और सुल्तान को देख लिया। सुल्तान ने भागने की कोशिश की, लेकिन अर्जुन ने उसे पहचान लिया और पुलिस को फोन कर दिया।
पुलिस ने मौके पर पहुँचकर सुल्तान को गिरफ्तार किया और शिवानी के शव के टुकड़ों को बरामद किया। पुलिस स्टेशन में सुल्तान ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने पुलिस को बताया कि उसने ऐसा क्यों किया। पुलिस भी उसकी कहानी सुनकर दंग रह गई, लेकिन कानून के अनुसार हत्या का कोई औचित्य नहीं हो सकता था।
निष्कर्ष: समाज के लिए एक चेतावनी
यह घटना हमें कई गंभीर सबक देती है:
इच्छाओं की सीमा: यदि इच्छाएं नैतिकता की सीमा लांघ जाएं, तो वे स्वयं के विनाश का कारण बनती हैं।
विश्वास का मूल्य: वैवाहिक जीवन विश्वास की नींव पर टिका होता है। विश्वासघात न केवल रिश्तों को बल्कि जिंदगियों को भी तबाह कर देता है।
कानून और प्रतिशोध: सुल्तान के साथ धोखा हुआ था, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन कानून अपने हाथ में लेना उसे अपराधी बना गया। उसे अपनी पत्नी को दंडित करने के लिए कानूनी या सामाजिक रास्ते अपनाने चाहिए थे।
आज सुल्तान जेल की सलाखों के पीछे अपने भाग्य का फैसला होने का इंतजार कर रहा है, जबकि शिवानी की हवस और खर्चीले स्वभाव ने उसे मौत की नींद सुला दिया। लाडपुरा गाँव आज भी उस काली रात को याद कर सिहर उठता है।
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