जब IPS मैडम के पिता शोरूम में गाड़ी खरीदने गए.. तो मैनेजर ने उन्हें भिखारी समझकर पीटा! फिर जो हुआ…
दोपहर के लगभग 1:00 बजे थे, जब शहर के सबसे बड़े सुजुकी शोरूम में एक 70 साल के बुजुर्ग व्यक्ति दाखिल हुए। उन्होंने एक पुरानी सी कमीज और पैजामा पहन रखा था, और उनके हाथ में एक साधारण सा थैला था। शोरूम में दाखिल होते ही वहां मौजूद सभी ग्राहक और कर्मचारी उन्हें अजीब नजरों से देखने लगे। इन बुजुर्ग व्यक्ति का नाम था राजेश गुप्ता।
राजेश जी धीरे-धीरे सेल्स एग्जीक्यूटिव के काउंटर की ओर बढ़े। काउंटर पर एक युवा पुरुष कर्मचारी बैठा था, जिसका नाम सुमित मौर्या था। राजेश जी सुमित के पास पहुंचे और बड़ी विनम्रता से बोले, “बेटा, मुझे एक नई गाड़ी लेनी है। मुझे थोड़ी जानकारी चाहिए थी। यह रहे मेरे सारे कागजात।” यह कहते हुए उन्होंने अपना थैला सुमित की तरफ बढ़ाया। लेकिन सुमित ने राजेश जी के कपड़ों को देखकर उन्हें परखा और कहा, “बाबा, कहीं आप गलत जगह तो नहीं आ गए? मुझे नहीं लगता कि आप जैसी हैसियत वाले लोग इस शोरूम में आते हैं।”
पहले अनुभव का सामना
राजेश जी सहजता से बोले, “बेटा, एक बार तुम देख तो लो, शायद मैं यहीं से गाड़ी लेना चाहूं।” सुमित ने अपने चेहरे पर एक झुझुलाहट भरी मुस्कान लाते हुए कहा, “बाबा, इसमें थोड़ा समय लगेगा और आपको थोड़ी देर इंतजार करना होगा।”
राजेश जी वहीं खड़े होकर इंतजार करने लगे। थोड़ी देर बाद उन्होंने फिर कहा, “बेटा, अगर तुम व्यस्त हो तो तुम मैनेजर को बुला दो। दरअसल, मुझे उनसे भी कुछ काम है।” सुमित ना चाहते हुए भी अपना फोन उठाया और मैनेजर प्रतीक के कैबिन का नंबर डायल किया।
प्रतीक ने राजेश जी को दूर से ही देखा और सुमित से पूछा, “क्या यह हमारे शोरूम का ग्राहक है या ऐसे ही कोई आ गया है भीख मांगने?” सुमित कहता है, “सर, यह बात तो मुझे नहीं पता लेकिन यह आपसे मिलने की बात कर रहे हैं।” तब मैनेजर प्रतीक कहता है, “ऐसे लोगों के लिए मेरे पास समय नहीं है। तुम ऐसा करो, इन्हें बिठा दो। थोड़ी देर बैठकर यहां से चले जाएंगे।”
सुमित ने राजेश जी को वेटिंग एरिया में बैठा दिया और कहा, “बाबा, आप वहां बैठ जाओ। थोड़ी देर में मैनेजर साहब फ्री हो जाएंगे और आपसे मिल लेंगे।” राजेश जी वेटिंग एरिया की तरफ चले गए। वहां के सभी ग्राहक सूट बूट में थे, जबकि राजेश जी ने साधारण कपड़े पहन रखे थे। इसी वजह से वे आकर्षण का केंद्र बन गए थे।
सहानुभूति का एक पल
शोरूम में एक और सेल्स एग्जीक्यूटिव था, जिसका नाम रवि था। रवि जैसे ही शोरूम में आता है तो वह देखता है कि एक बुजुर्ग व्यक्ति वेटिंग एरिया में बैठा हुआ है, जिसकी तरफ सभी लोग देख रहे हैं। कोई उन्हें भिखारी कह रहा था तो कोई कह रहा था कि यह यहां कैसे आ गए? रवि यह सभी बातें सुन लेता है। इसके बाद रवि सीधा राजेश जी के पास जाता है और बड़े आदर से उनसे पूछता है, “बाबा, आप यहां क्यों आए हैं? मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं?”
राजेश जी रवि को बताते हैं, “मुझे मैनेजर से मिलना है और उनसे मुझे कुछ काम है।” यह सुनकर रवि उनसे कहता है, “ठीक है बाबा, आप थोड़ी देर यहां इंतजार कीजिए। मैं अभी मैनेजर से बात करके आता हूं।” इसके बाद रवि मैनेजर प्रतीक के कैबिन में जाता है और उन्हें उस बुजुर्ग व्यक्ति के बारे में बताता है। लेकिन मैनेजर प्रतीक पहले से ही उस बुजुर्ग व्यक्ति के बारे में जानता था और कहता है, “मुझे पता है, मैंने ही उन्हें वहां बिठा रखा है। थोड़ी देर वहां बैठेंगे और फिर चले जाएंगे।”
इसके बाद प्रतीक रवि को कोई और काम बता देता है और कहता है, “तुम अपना काम करो और तुम्हें इस चीज से कोई मतलब नहीं है।” रवि दूसरे काम में लग जाता है और धीरे-धीरे राजेश जी को वहां बैठे हुए लगभग एक घंटा हो गया था। एक घंटे तक वे धैर्य रखते हैं, लेकिन उसके बाद उन्हें यह बात सहन नहीं होती। वह खड़े होते हैं और मैनेजर प्रतीक के कैबिन की तरफ बढ़ने लगते हैं।
अहंकार का परिणाम
प्रतीक देखता है कि वह बुजुर्ग व्यक्ति उसके पास ही आ रहा है, तो वह फौरन अपने कैबिन से बाहर निकलता है और अकड़ते हुए पूछता है, “हां बाबा, बताइए आपको क्या काम है?” राजेश जी अपना थैला आगे बढ़ाते हुए कहने लगते हैं, “बेटा, मेरे पास इस गाड़ी की बुकिंग डिटेल है और मुझे इसमें कुछ दिक्कत आ रही है। आप देखकर यह बताइए कि क्या दिक्कत है? मेरी गाड़ी अभी तक बुक क्यों नहीं हुई?”
मैनेजर प्रतीक थोड़ी देर तक सोचता है और कहता है, “बाबा, जब लोगों के पास पैसे नहीं होते तो ऐसा ही हो जाता है। मेरे ख्याल से आपने भी बुकिंग करवा कर छोड़ दी होगी। अब आपके पास पैसे नहीं होंगे तो यहां क्यों आए हैं?” राजेश जी कहते हैं, “बेटा, पहले तुम एक बार बुकिंग चेक तो कर लो। उसके बाद ही कुछ मुझे बताओ।”
मैनेजर प्रतीक हंसने लगता है और कहता है, “बाबा, यह सालों का अनुभव है। आप जैसे लोगों की शक्ल देखकर ही मैं बता देता हूं कि कौन व्यक्ति किस तरह का है। मैं चाहता हूं कि अब आप यहां से चले जाएं।” इसके बाद राजेश जी उस थैले को उसकी टेबल पर रखते हैं और कहते हैं, “ठीक है बेटा, मैं तो चला जाऊंगा। लेकिन तुम इस थैले में जो भी डिटेल लिखी हुई है, उसे एक बार जरूर देख लेना।” ऐसा कहकर राजेश जी वहां से जाने लगते हैं और जाते-जाते जैसे ही वह गेट पर पहुंचते हैं, तो फौरन मुड़कर कहते हैं, “बेटा, तुम्हें यह सब कुछ करने का बहुत बुरा नतीजा भुगतना पड़ेगा।”

एक नई सुबह
मैनेजर प्रतीक को जब यह धमकी सुनाई देती है, तो वह सोचता है कि बुढ़ापे में ऐसे ही कह दिया होगा। कोई भी कैसी भी दिक्कत नहीं है। प्रतीक अपने काम पर चला जाता है। इधर टेबल पर वह थैला पड़ा हुआ था। इसके बाद रवि वहां से उस थैले को उठाता है और अपने कंप्यूटर में लॉग इन करके थैले के अंदर दी गई जानकारी के हिसाब से ढूंढने लगता है।
ढूंढने के बाद जब पुराना रिकॉर्ड खंगाला जाता है, तो उसे पता चलता है कि यह जो व्यक्ति यहां पर आया था, यह इस कंपनी के एक तरह से मालिक ही हैं क्योंकि इस कंपनी के 60% शेयर इनके पास हैं। अब इस बात को सुनकर रवि बड़ा ही हैरान होता है। वह पूरी तरह से कंफर्म हो जाता है कि यह इस कंपनी के मालिक ही हैं। इसके बाद रवि उस रिपोर्ट की कॉपी निकालता है और मैनेजर प्रतीक के पास जाता है।
मैनेजर प्रतीक अपने कैबिन में किसी अमीर ग्राहक से बात कर रहे थे। रवि में आई कम इन करके कैबिन के अंदर आता है। मैनेजर प्रतीक उसे इशारा करता है और इशारे से पूछता है कि वह किस लिए आया है। रवि इशारों से ही बता देता है कि यह एक रिपोर्ट है जो उस व्यक्ति की है जो वहां पर आया था। मैनेजर प्रतीक अपने उस ग्राहक से थोड़ी देर के लिए एक्सक्यूज लेते हैं और कहते हैं, “देखो भाई रवि, हमारे पास ऐसे वैसे लोगों के लिए समय नहीं है।”
सच्चाई का खुलासा
रवि बड़े आदर भाव से मैनेजर से कहता है, “सर, अगर आप इसको एक बार देख लें तो बड़ा ही अच्छा रहेगा।” लेकिन मैनेजर प्रतीक उस रिपोर्ट को आगे की तरफ सरकाते हुए कहता है, “मुझे इसको नहीं देखना और मुझे ऐसे ग्राहकों में कोई भी दिलचस्पी नहीं है।” रवि उस रिपोर्ट को वहां से लेकर अपने काम में लग जाता है।
अगले दिन ठीक उसी समय पर राजेश जी फिर से आते हैं। लेकिन आज उनके साथ उनकी बेटी आईपीएस सौम्या गुप्ता थी, जो अपनी वर्दी में थी। उनके हाथ में एक ब्रीफ केस भी था। शोरूम में दाखिल होते ही सभी लोग उन्हें देखकर चौंक जाते हैं। सौम्या सीधे मैनेजर प्रतीक को अपनी तरफ आने का इशारा करती है।
मैनेजर डरते हुए अपने कैबिन से निकलकर उनके सामने आकर खड़ा हो जाता है। तभी सौम्या मैनेजर प्रतीक से कहती हैं, “मैनेजर साहब, मेरे पिताजी ने आपसे कहा था ना कि यह बात आपको बहुत भारी पड़ेगी। आपने जो कुछ भी कल मेरे पिता के साथ किया था, वह बिल्कुल भी बर्दाश्त के लायक नहीं है। तो अब आप अपनी सजा भुगतने के लिए तैयार हो जाइए।”
इस बात को सुनकर मैनेजर प्रतीक थोड़ा सा बौखला जाता है। लेकिन फिर वह सोचता है कि क्या सजा मुझे दे सकते हैं? भला मेरे साथ क्या कर सकते हैं? और कहने लगता है, “आप होती कौन हैं मुझे इस तरह से हटाने वाली?” सौम्या मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मैं इस कंपनी के मालिक की बेटी हूं। मेरे पिता राजेश गुप्ता के पास इस कंपनी के 60% शेयर हैं। और जहां तक तुम्हें हटाने की बात है, एक आईपीएस अधिकारी होने के नाते मैं यह सुनिश्चित करूंगी कि मेरे पिता के साथ हुए दुर्व्यवहार के लिए आप पर उचित कार्यवाही हो।”
सबक सिखाना
यह बात सुनकर शोरूम के जितने भी कर्मचारी थे और जो कुछ ग्राहक कल भी इस शोरूम में आए थे, वे सभी लोग एकदम से हैरान हो जाते हैं। इसके बाद सौम्या अपने ब्रीफ केस को खोलती हैं और उसमें से एक डॉक्यूमेंट निकालती हैं जो कि रवि की पदोन्नति का था। उसे एक शोरूम मैनेजर बना दिया गया था। इसके बाद वह दूसरा लेटर निकालती हैं, जिसे मैनेजर प्रतीक को दे देती हैं और कहती हैं, “अगर तुम्हें कहीं और ड्यूटी करनी है, तो तुम बेशक से कर लो। लेकिन मैनेजर बनकर तुम हमारे शोरूम में नहीं रह सकते।”
यह बात सुनकर मैनेजर प्रतीक के पसीने छूटने लगते हैं और वह अपनी कल की गलती के लिए गिड़गिड़ाकर राजेश जी और सौम्या से माफी मांगने लगता है। लेकिन तभी सौम्या उसे रोकती हैं और कहती हैं, “माफी किस बात की मांग रहे हो? तुमने जो व्यवहार किया, वह हमारे इस कंपनी की पॉलिसी के खिलाफ है। क्या तुमने कभी भी इस कंपनी की पॉलिसी नहीं पढ़ी?”
यहां पर गरीब और अमीर में कोई भी फर्क नहीं किया जाएगा और सभी को एक ही तराजू में तोला जाएगा। सौम्या कहती हैं, “तुम्हारे इस शोरूम में काम करने वाला रवि, जिसके हाथ में कुछ भी नहीं था, लेकिन फिर भी उसने मेरे पिता से आकर पूछा और उनकी मदद करना चाहा, तो इस पोस्ट के लिए वह असली हकदार है। वह ग्राहकों को उनके कपड़ों से जज नहीं करेगा।”
बदलाव का आगाज
ऐसा कहकर सौम्या दूसरे कर्मचारी सुमित को भी बुलाती हैं और फटकार लगाती हैं। सुमित हाथ जोड़ने लगता है और उनसे माफी मांगने लगता है। कहता है, “मैडम जी, मुझे माफ कर दो। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई और आगे से आपको ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिलेगा।” सौम्या ने कहा, “मैं तुम्हारी इस गलती को पहली और आखिरी बार माफ कर रही हूं। आइंदा किसी भी ग्राहक को उनके कपड़ों से जज मत करना।”
इसके बाद सौम्या अपने पिता के साथ वापस जाने लगती हैं और सभी लोगों से कहकर जाती हैं कि “रवि से बहुत कुछ तुम्हें सीखने की जरूरत है और इससे जितना हो सके उतना सीख लीजिए, तुम्हारे लिए अच्छा होगा। अब मैं बीच-बीच में यहां पर किसी ना किसी को भेजती रहूंगी जो तुम्हारी इन हरकतों के बारे में अच्छी तरह से मुझे रिपोर्ट दे सके।”
ऐसा कहकर सौम्या और उसके पिताजी वहां से चले जाते हैं और शोरूम का पूरा स्टाफ इस बारे में बात करने लगता है और सोचता है कि अब अच्छी तरह से काम करना होगा। कहीं अगली बार उनका नंबर ना आ जाए। इस बात को सोचकर पूरा शोरूम सुधर जाता है और सभी लोग अच्छी तरह से उस शोरूम के अंदर काम करने लगते हैं।
निष्कर्ष
राजेश जी का यह कारनामा चारों तरफ फैल गया था और सभी लोग उस शोरूम की बढ़ाई करने लगते हैं और कहते हैं कि “मालिक हो तो ऐसा हो वरना बेशक ना हो, क्योंकि ज्यादा मालिक अपने बिजनेस को खोलकर चले जाते हैं। फिर चाहे पीछे से मैनेजर किस तरह का काम करें या पीछे से कोई भी कर्मचारी कैसा भी काम करें, उन्हें इस चीज से कोई भी मतलब नहीं होता है। लेकिन राजेश जी ने अपने मालिक होने का पूरा कर्तव्य निभाया और उस शोरूम के कर्मचारियों को एक अच्छा सबक सिखाया।
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके पहनावे या बाहरी दिखावे से नहीं करना चाहिए। विनम्रता और सहानुभूति ऐसे गुण हैं जो हमें जीवन में सफलता और सम्मान दिलाते हैं। रवि ने जो दया और आदर दिखाया, उसकी वजह से उसे वह पदोन्नति मिली जिसका वह हकदार था। वहीं, मैनेजर प्रतीक और सुमित ने अपने अहंकार और गलत व्यवहार की वजह से अपनी नौकरी और सम्मान दोनों खो दिया।
यह कहानी इस बात पर भी जोर देती है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो अपने कर्मचारियों को सही दिशा और नैतिकता का मार्ग दिखाए। तो दोस्तों, आपको यह कहानी कैसी लगी? अगर अच्छी लगी हो तो कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताएं और ऐसी ही नई इंटरेस्टिंग कहानियां सुनने के लिए हमारे चैनल “ट्रू स्पार्क” को सब्सक्राइब और वीडियो को एक लाइक जरूर करें, जिससे हमारा हौसला और भी बढ़ता रहे और हम आपके लिए ऐसी ही नई कहानियां लेकर आते रहें। धन्यवाद।
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