गरीब पति को छोड़ गई थी पत्नी, 5 साल बाद जब पति ‘CEO’ बनकर लौटा… इंसानियत रो पड़ी

गरीब पति, टूटा रिश्ता और दूसरी शुरुआत: रमेश और कविता की दिल छू लेने वाली कहानी

कानपुर की तंग गलियों में शुरू हुई यह कहानी सिर्फ एक घर की नहीं, बल्कि हर उस रिश्ते की है, जो वक्त के थपेड़ों से टूटता है। यह कहानी है रमेश वर्मा की, जो एक साधारण इंसान था, लेकिन सपने बड़े देखता था। और कविता की, जो उसकी पत्नी थी, पर जिंदगी की कठोर सच्चाईयों के आगे झुक गई।

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शुरुआत: सपनों का पीछा करने वाला पति और उम्मीदों से भरी पत्नी

रमेश, एक इंजीनियरिंग ग्रैजुएट, जो अपने छोटे से कमरे में एक सेकंड हैंड लैपटॉप के साथ अपने सपनों को कोडिंग में ढालने की कोशिश कर रहा था। उसकी आंखों में जुनून था और दिल में अपने स्टार्टअप का सपना। वह चाहता था कि गली-मोहल्ले की छोटी दुकानें भी ऑनलाइन जाएं।

कविता, उसकी पत्नी, एक सीधी-सादी लड़की थी। शादी के बाद वह रमेश के जुनून और सपनों पर भरोसा करती थी। वह उसके साथ खड़ी रहती, उसे चाय बनाकर देती और कभी-कभी उसके काम में मदद भी करती।

सपनों की कीमत: गरीबी और रिश्तों में दरार

लेकिन कहते हैं ना, सपनों को पूरा करने की कीमत चुकानी पड़ती है। रमेश ने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपना स्टार्टअप शुरू किया। शुरुआत में सब कुछ ठीक लग रहा था, लेकिन धीरे-धीरे हालात बिगड़ने लगे। घर में पैसे खत्म होने लगे, दोस्तों ने साथ छोड़ दिया, और कविता के घर से ताने आने लगे।

कविता धीरे-धीरे टूटने लगी। मकान मालिक के ताने, खाली अलमारी, और गिरवी रखे गहनों ने उसकी हिम्मत तोड़ दी। एक दिन, जब बिजली विभाग ने बिल न चुकाने पर कनेक्शन काट दिया और कविता के माता-पिता ने उन्हें इस हालत में देखा, तो कविता ने रमेश को छोड़ने का फैसला कर लिया।

जिंदगी का सबसे बड़ा झटका

अगली सुबह, कविता ने अपना छोटा सा सूटकेस उठाया और अपने माता-पिता के साथ चली गई। रमेश दरवाजे पर खड़ा था, उम्मीद कर रहा था कि कविता पलटेगी और कहेगी, “मैं नहीं जाऊंगी।” लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कविता ने रमेश को छोड़ दिया।

कुछ दिनों बाद तलाक के कागज रमेश को मिले। उसने बिना किसी शिकायत के उन पर साइन कर दिए। उसे लगा कि अगर कविता उसकी जिंदगी से दूर होकर खुश रहेगी, तो यह सही होगा।

मुंबई की ओर सफर: नए सिरे से शुरुआत

रमेश ने हार नहीं मानी। उसने अपनी आखिरी बचत से मुंबई की टिकट खरीदी। सफर के दौरान उसकी मुलाकात राजीव मल्होत्रा नाम के एक सज्जन से हुई, जो एक डिजिटल साक्षरता कंपनी चलाते थे। उन्होंने रमेश की तकनीकी समझ को पहचाना और उसे अपने साथ काम करने का मौका दिया।

रमेश ने कड़ी मेहनत की। उसने अपने पुराने ऐप को नए रूप में ढाला और उसे छोटे दुकानदारों के लिए उपयोगी बनाया। उसकी मेहनत रंग लाई। कुछ ही सालों में वह कंपनी का सीईओ बन गया।

कविता की नई जिंदगी और अयान का जन्म

दूसरी तरफ, कविता को रमेश के जाने के बाद पता चला कि वह गर्भवती है। उसने अपने परिवार के विरोध के बावजूद बच्चे को जन्म दिया और उसका नाम अयान रखा। कविता ने सिलाई-कढ़ाई का काम शुरू किया और अकेले दम पर अपने बेटे को पाला।

वापसी: रमेश का कानपुर लौटना

5 साल बाद, रमेश, जो अब नवचेतना सॉलशंस का सीईओ बन चुका था, ने अपने नए प्रोजेक्ट “घर से उड़ान” की शुरुआत के लिए कानपुर का चुनाव किया। इस योजना का उद्देश्य छोटे शहरों की महिलाओं को उनके व्यवसाय में मदद करना था।

कविता ने भी इस योजना के लिए आवेदन किया। उसे नहीं पता था कि इस योजना के पीछे रमेश है। जब वह इंटरव्यू के लिए पहुंची, तो उसके सामने रमेश को देखकर वह चौंक गई। दोनों की आंखें मिलीं, और 5 साल का दर्द और खामोशी एक पल में सामने आ गई।

सच का सामना: अयान का राज

इंटरव्यू के दौरान, रमेश की नजर अयान की स्कूल डायरी पर पड़ी। उसमें लिखा नाम अयान वर्मा देखकर रमेश समझ गया कि यह उसका बेटा है। उसने कविता से सच्चाई पूछी। कविता ने रोते हुए स्वीकार किया कि अयान रमेश का बेटा है।

माफी और नई शुरुआत

रमेश ने कविता और अयान को अपना लिया। उसने कविता को माफ कर दिया और कहा:
“मैंने दुनिया जीत ली, पर अपना घर हार गया। अब मुझे अपना घर वापस चाहिए।”

रमेश ने अपनी कंपनी का हेड ऑफिस कानपुर में खोला और कविता के साथ उसी छोटे से मकान में रहने का फैसला किया। उसने कविता के बिजनेस को बढ़ावा दिया और अपने परिवार को वापस जोड़ लिया।

सफलता की नई परिभाषा

कुछ महीनों बाद, एक इंटरव्यू में रमेश से पूछा गया कि उनकी सफलता का राज क्या है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा:
“सफलता यह नहीं है कि आप कितना पैसा कमाते हैं। असली सफलता यह है कि जब आप गिरें, तो संभालने वाला कोई हो। और जब आप जीतें, तो उस जीत को बांटने वाला कोई अपना हो।”

आपकी राय?

क्या हर रिश्ते को दूसरा मौका मिलना चाहिए? क्या आप रमेश की जगह होते, तो क्या आप माफ कर पाते? या स्वाभिमान प्यार से बड़ा होता?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

नोट: अगर यह कहानी आपको भावुक कर गई हो, तो इसे दूसरों के साथ शेयर करें। रिश्तों को जोड़ने के लिए माफी और समझदारी सबसे जरूरी होती है।