Shimla Hospital Doctor Patient Fight: शिमला में मरीज से मारपीट करने वाले डॉक्टर ने खोले बड़े राज!

हाथापाई के वायरल वीडियो ने खोली अस्पतालों की कड़वी सच्चाई: डॉक्टर और मरीज के रिश्ते पर बड़ा सवाल!

आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अस्पताल के एक वार्ड में डॉक्टर और मरीज के बीच हाथापाई होती दिख रही है। वीडियो ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है, लोग तरह-तरह की राय बना रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोग हैं जो इस घटना की असलियत को समझने की कोशिश कर रहे हैं। आखिर क्या है इस वायरल वीडियो के पीछे की सच्चाई? क्यों एक डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया गया और उसके खिलाफ FIR भी दर्ज हो गई? क्या सचमुच डॉक्टर ही दोषी हैं या मरीज की भी कोई गलती थी? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की गहराई से, डॉक्टर राघव नरवाला की जुबानी।

घटना की शुरुआत: एक मामूली बातचीत से बिगड़ गया माहौल

25 तारीख को दोपहर करीब 12 बजे अर्जुन नामक मरीज अस्पताल के वार्ड में भर्ती होता है। डॉक्टर राघव नरवाला, जो सीनियर रेजिडेंट की पोस्ट पर कार्यरत हैं, रूटीन चेकअप के लिए मरीज के पास जाते हैं। डॉक्टर मरीज से उसकी समस्या और पुराने रिकॉर्ड्स के बारे में पूछते हैं। इसी दौरान डॉक्टर को लगता है कि यह मरीज उन्हें पहले से जानता है। डॉक्टर सहजता से कहते हैं, “तू तो देखा बंदा है, क्या पहले भर्ती था?” लेकिन मरीज को यह बात नागवार गुजरती है और वह गंदी टोन में जवाब देता है, “तू करके कैसे बात कर सकता है?”

डॉक्टर हैरान रह जाते हैं, उन्हें लगता है कि शायद उनकी बात का गलत मतलब निकाला जा रहा है। मरीज वार्ड में जोर-जोर से चिल्लाने लगता है, उसके साथ मौजूद अटेंडेंट भी बहस में शामिल हो जाता है। नर्सें भी मामले को शांत करने की कोशिश करती हैं, लेकिन बात बढ़ती ही जाती है।

गाली-गलौज और मारपीट तक पहुंची बात

मरीज डॉक्टर को व्यक्तिगत स्तर पर अपमानित करता है, “क्या तू अपने बाप से भी ऐसे ही बात करता है?” डॉक्टर ने संयम रखा, लेकिन मरीज ने गाली-गलौज शुरू कर दी और डॉक्टर को धक्का देकर हाथ-पैर चलाने लगा। मरीज ने IV स्टैंड पकड़ लिया, जिससे डॉक्टर को अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाना पड़ा। डॉक्टर को छाती, मुंह, हाथ और बाजुओं पर चोटें आईं, जिसमें हाथ की हड्डी का फ्रैक्चर भी शामिल है।

वीडियो वायरल और सोशल मीडिया की सच्चाई

इस पूरी घटना का केवल 10-15 सेकंड का हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें डॉक्टर को ही गलत ठहराया गया। किसी ने डॉक्टर का पक्ष जानने की कोशिश नहीं की। घटना के बाद अस्पताल परिसर में 200-250 लोग इकट्ठा हो गए, माहौल डरावना हो गया, इलाज में बाधा आई, लेकिन इन सब बातों को नजरअंदाज कर दिया गया।

पुलिस कार्रवाई और डॉक्टर की मांग

पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान लिए, दोनों की मेडिकल रिपोर्ट (MLC) काटी गई। डॉक्टर ने भी क्रॉस FIR दर्ज कराई है। डॉक्टर एसोसिएशन और फाइमा संगठन डॉक्टर के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री से भी डॉक्टरों की टीम ने मुलाकात की है, निष्पक्ष जांच की मांग की है।

डॉक्टर राघव नरवाला कहते हैं, “हमसे ही हमेशा संयम की उम्मीद की जाती है, लेकिन क्या हमारी बात सुनना जरूरी नहीं है? क्या हमारे परिवार, हमारे साथियों से हमारा व्यवहार नहीं पूछा जाना चाहिए? निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।”

मामले का दूसरा पहलू और समाधान की उम्मीद

इस घटना के दोनों पहलू हैं—मरीज भी परेशान था, डॉक्टर भी काम के दबाव में थे। अगर दोनों पक्ष उस वक्त माफी मांग लेते, तो शायद मामला सुलझ जाता। डॉक्टर कहते हैं, “अगर सुलह हो जाए, दोनों अपनी गलती मान लें, तो ठीक है। वरना अब मामला कोर्ट तक जाएगा।”

अस्पतालों में स्टाफ की कमी और सुरक्षा का सवाल

सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की कमी हमेशा रही है। अगर उस वक्त सुरक्षा गार्ड्स तुरंत आते, तो शायद बड़ी घटना टल जाती। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए कि डॉक्टरों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है जितनी मरीजों की।

डॉक्टर और मरीज: विश्वास की डोर कमजोर न हो

डॉक्टर आठ साल की मेहनत और पढ़ाई के बाद मरीजों की सेवा करते हैं। उनका संयम और समर्पण काबिले तारीफ है। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को समझदारी दिखानी चाहिए ताकि डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास की डोर कमजोर न पड़े।

निष्कर्ष: निष्पक्ष जांच और सुधार की जरूरत

इस वायरल वीडियो ने अस्पतालों की व्यवस्था, सुरक्षा और डॉक्टर-मरीज संबंधों पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी के आधार पर राय बनाना खतरनाक हो सकता है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, दोनों पक्षों की बात सुनना और अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

आशा है कि जल्द ही इस मामले का समाधान हो, डॉक्टर राघव नरवाला स्वस्थ हों और समाज में डॉक्टरों और मरीजों के बीच भरोसा बना रहे।

आखिरकार, डॉक्टर भी इंसान हैं—उनकी मेहनत, सेवा और समर्पण को समझना होगा। और मरीजों की परेशानियों को भी संवेदनशीलता से देखना होगा। तभी अस्पतालों में सुकून और विश्वास की फिजा कायम रह सकती है।

आपका क्या कहना है इस वायरल वीडियो और डॉक्टर-मरीज विवाद पर? अपने विचार नीचे कमेंट करें।