UP के Kanpur में महिला के Private Part में मिले कपड़े के टुकड़े। BF संग भागी, कैसे हुई मौत?

.

कहानी की शुरुआत: एक सामान्य लड़की, असामान्य हालात

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के बिनू के मझावन कस्बे में रहने वाले धर्मवीर की 21 वर्षीय बेटी मानसी की कहानी इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह कहानी एक आम भारतीय परिवार, उसकी परंपराओं, एक लड़की के सपनों, सामाजिक दबाव, प्रेम, विद्रोह और अंत में रहस्यमय मौत के इर्द-गिर्द घूमती है।

मानसी एक साधारण, पढ़ी-लिखी और महत्वाकांक्षी लड़की थी। तीन साल पहले उसकी शादी कानपुर देहात के एक युवक से हुई थी। शादी के बाद भी मानसी का मन अपने पति के साथ नहीं लग पाया। वह अपने जीवन में कुछ और करना चाहती थी, लेकिन परिवार और समाज की बंदिशों ने उसे बांध रखा था। सोशल मीडिया के इस युग में जब हर कोई फेसबुक-इंस्टाग्राम से जुड़ा है, मानसी की मुलाकात विधनों के जगदीशपुर गांव के मनीष यादव से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी, फिर प्यार हो गया।

प्रेम का इम्तिहान: घर छोड़ प्रेमी के साथ भागना

करीब छह महीने पहले, एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के बहाने मानसी घर से निकली और मौका देखकर मनीष के साथ भाग गई। इस घटना ने उसके परिवार को झकझोर कर रख दिया। पिता धर्मवीर ने बिधु थाने में बेटी की गुमशुदगी दर्ज कराई। दस दिन बाद पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया। थाने में पूछताछ के दौरान मानसी ने साफ-साफ कह दिया कि वह अब अपने पति के साथ नहीं, बल्कि मनीष के साथ ही रहना चाहती है। पुलिस और समाज के दबाव के बावजूद, उसने अपने फैसले पर अडिग रहने का साहस दिखाया।

मानसी का यह निर्णय उसके परिवार के लिए सदमा था। एक बेटी, जो कभी पिता की लाडली थी, अब अपने प्रेमी के लिए घर-परिवार, रिश्ते-नाते, समाज की इज्जत – सबकुछ छोड़ चुकी थी। समाज में तरह-तरह की बातें होने लगीं – “लड़की बिगड़ गई”, “मां-बाप ने संस्कार नहीं दिए”, “पति के रहते गैर मर्द के साथ भाग गई” आदि।

नई जिंदगी की चुनौतियाँ: प्रेम की हकीकत

मानसी और मनीष ने साथ रहना शुरू कर दिया। लेकिन यह नई जिंदगी उतनी आसान नहीं थी, जितनी उन्होंने सोची थी। मानसी का अपने मायके और ससुराल से रिश्ता लगभग खत्म हो चुका था। वह पूरी तरह मनीष और उसके परिवार पर निर्भर हो गई थी। इस दौरान मानसी का फोन अक्सर बंद रहता, वह घरवालों से कट चुकी थी। परिवार वालों को बस यही उम्मीद थी कि उनकी बेटी खुश रहे।

लेकिन, प्रेम में भागकर शादी करने वाली लड़कियों की हकीकत अक्सर कड़वी होती है। घर-समाज से कटकर, एक नए परिवार में खुद को स्थापित करना आसान नहीं होता। मनीष और उसके परिवार के साथ रहते हुए मानसी ने कई बार खुद को अकेला महसूस किया। न मायके का सहारा, न ससुराल का अपनापन, न समाज की स्वीकृति – सबकुछ जैसे छिन गया था।

मौत का रहस्य: आत्महत्या या हत्या?

8 दिसंबर को अचानक मानसी की मौत की खबर आई। पुलिस ने धर्मवीर को फोन कर बताया कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जब मानसी का शव अस्पताल पहुंचा, तो डॉक्टरों और पुलिस ने जो देखा, वह चौंकाने वाला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मानसी के प्राइवेट पार्ट में कपड़े के टुकड़े मिले थे। इससे शक और गहरा हो गया कि यह मौत सामान्य नहीं, बल्कि संदिग्ध है।

परिवार वालों ने आरोप लगाया कि मानसी की हत्या की गई है। उनका कहना था कि मानसी आत्महत्या नहीं कर सकती। जबसे वह मनीष के साथ गई थी, उसका फोन बंद रहता था। कई बार जब परिवार ने दूसरे नंबर से कॉल किया, तो मनीष ने फोन छीन लिया। 6 दिसंबर को मानसी ने अपनी मौसी की बेटी आकांक्षा को मनीष के नंबर से फोन किया और अपने जीजा का नंबर मांगा, मगर मनीष ने फिर फोन छीन लिया। इससे परिवार को और शक हो गया।

आखिरी वीडियो: प्रेमी को निर्दोष बताने की गुहार या दबाव?

मौत से ठीक पहले मानसी ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें वह गंभीर हालत में थी। उसने कहा –
“अगर मुझे कुछ हो जाए तो मेरे बॉयफ्रेंड और उसके परिवार को कुछ मत कहना। ये लोग बिल्कुल बेकसूर हैं। अगर मैं जिंदा रही तो इन्हीं के साथ रहूंगी, अगर मर गई तो इन्हें कोई कुछ ना कहे।”

मानसी की यह बातें उसके प्रेमी और उसके परिवार को निर्दोष साबित करने की कोशिश थी। मगर सवाल यह उठता है कि कोई लड़की इतनी गंभीर हालत में भी अपने प्रेमी और उसके परिवार को क्यों बचाना चाहेगी? क्या उस पर दबाव था? या सचमुच वह अपनी मर्जी से उनके साथ रहना चाहती थी?

यह वीडियो वायरल हो गया। कुछ लोग मानसी की मजबूरी समझ रहे हैं, तो कुछ इसे आत्महत्या का केस मान रहे हैं। मगर परिवार का दर्द यही है कि उनकी बेटी की मौत का सच सामने आए।

पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया

पुलिस ने पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। प्रेमी मनीष को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। थाना प्रभारी तेज बहादुर सिंह के अनुसार, मामले की गहराई से जांच हो रही है। वहीं, घाटमपुर एसीपी कृष्णकांत यादव ने बताया कि मानसी के आखिरी वीडियो को भी जांच में शामिल किया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और अन्य सबूतों की छानबीन की जा रही है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। क्या यह आत्महत्या थी, या हत्या? क्या मानसी पर मानसिक या शारीरिक अत्याचार हुआ? क्या उसके साथ बलात्कार के बाद हत्या की गई? या फिर उसने खुद ही मौत को गले लगा लिया? इन सवालों के जवाब अभी मिलना बाकी हैं।

समाज और मीडिया की भूमिका: सवालों के घेरे में सब

मानसी की मौत ने समाज और मीडिया में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक लड़की को अपने फैसले लेने का हक है? क्या प्रेम करना और अपनी मर्जी से किसी के साथ रहना गुनाह है? अगर मानसी ने सच में आत्महत्या की, तो उसके पीछे कौन सी परिस्थितियाँ जिम्मेदार थीं? और अगर उसकी हत्या हुई, तो दोषी कौन है?

सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई – “लड़कियां आज़ाद हैं, तो अपने फैसलों की जिम्मेदारी भी लें”, “मां-बाप को बच्चों की सुननी चाहिए”, “प्रेम में भागना गलत नहीं, लेकिन समाज की हकीकत समझनी चाहिए” आदि। मीडिया ने भी इस केस को सनसनीखेज बना दिया। हर चैनल, हर अखबार ने मानसी की मौत को अलग-अलग एंगल से दिखाया। कहीं इसे ऑनर किलिंग बताया गया, तो कहीं लव-जिहाद, कहीं आत्महत्या, तो कहीं बलात्कार के बाद हत्या।

संघर्ष, दर्द और सवाल

मानसी की कहानी में प्रेम है, विद्रोह है, परिवार से बगावत है, समाज की बंदिशें हैं, और अंत में एक दर्दनाक मौत है। उसकी मौत ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारे समाज में आज भी लड़कियों को अपनी जिंदगी के फैसले लेने की आज़ादी है? क्या प्रेम में भाग जाना गुनाह है? क्या परिवार और समाज का दबाव इतना बड़ा है कि कोई लड़की मौत को गले लगा ले?

मानसी के आखिरी शब्द – “अगर मुझे कुछ हो जाए तो मेरे बॉयफ्रेंड और उसके परिवार को कुछ मत कहना” – आज भी कानपुर के हर गली, हर नुक्कड़ पर गूंज रहे हैं। पुलिस जांच जारी है, परिवार न्याय की उम्मीद में है, और समाज एक बार फिर सोचने को मजबूर है कि आखिर गलती किसकी थी – मानसी की, मनीष की, या हमारे समाज की?

परिवार का दर्द और समाज की चुप्पी

धर्मवीर और उनका परिवार आज भी सदमे में है। बेटी की मौत का दर्द, समाज की बातें, पुलिस की पूछताछ – सबकुछ उन्हें तोड़ रहा है। मां-बाप को खुद पर भी गुस्सा है – “काश हमने बेटी की बात सुनी होती, काश उसे समझाया होता, काश समाज की परवाह न की होती…”। लेकिन अब सबकुछ खो चुका है।

समाज भी चुप है। कोई खुलकर मानसी का पक्ष नहीं लेता, कोई मनीष को दोषी ठहराता है, कोई लड़की को। लेकिन सच्चाई यही है कि ऐसी घटनाएं हर दिन घट रही हैं – कभी मानसी, कभी पूजा, कभी सिम्मी… और हर बार एक परिवार टूट जाता है।

सीख और सवाल

यह कहानी हमें सिखाती है कि भावनाओं में बहकर लिए गए फैसले कभी-कभी जीवनभर का पछतावा बन सकते हैं। साथ ही, परिवार और समाज को भी चाहिए कि बच्चों की बात सुनें, उन्हें समझें, और अगर वे गलत रास्ते पर जा रहे हैं, तो उन्हें प्यार से समझाएं, ना कि ठुकराएं।

मानसी की मौत एक सवाल बनकर रह गई है – क्या प्रेम की आज़ादी का अर्थ खुद की आज़ादी खो देना है? क्या हमारे समाज में लड़की की जान की कीमत बस एक अफवाह, एक आरोप या एक वीडियो से तय हो सकती है?

क्या पुलिस जांच में सच सामने आएगा? क्या परिवार को न्याय मिलेगा? क्या समाज कभी बदलेगा? या फिर मानसी जैसी बेटियां यूं ही खोती रहेंगी?

अंत में

मानसी की कहानी सिर्फ कानपुर या उत्तर प्रदेश की नहीं, बल्कि पूरे भारत की है। यह कहानी हर उस लड़की की है, जो सपने देखती है, प्यार करती है, समाज से लड़ती है और कभी-कभी अपनी जान गँवा बैठती है। यह कहानी हर मां-बाप की है, जो अपने बच्चों के लिए सपने देखते हैं, लेकिन समाज के डर से उन्हें खो देते हैं। और यह कहानी हर उस समाज की है, जो आज भी लड़की की आज़ादी से डरता है, प्रेम को गुनाह मानता है, और बेटियों की मौत पर भी चुप्पी साध लेता है।

क्या हम कभी बदलेंगे? या मानसी जैसी कहानियां यूं ही दोहराई जाती रहेंगी?

समाप्त