गुरु-शिष्य का रिश्ता और वो बंद कमरा | आखिर क्या हुआ था?

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बंद कमरे का रहस्य: साध्वी प्रेम बायसा और वह डिजिटल खामोशी

अध्याय 1: मारवाड़ की वह गूँजती आवाज़

राजस्थान की तपती रेत और मारवाड़ की पावन धरा ने सदियों से संतों और साधकों को जन्म दिया है। इसी मिट्टी से एक नाम उभरा—प्रेम बायसा। महज 10 साल की उम्र में, जहाँ बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, प्रेम ने हाथ में माला और जुबां पर कथा थाम ली थी। उनकी वाणी में वह जादू था कि जब वे व्यासपीठ पर बैठती थीं, तो हजारों की भीड़ मंत्रमुग्ध हो जाती थी। उनके सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स थे और वे आधुनिक युग की एक ‘आध्यात्मिक स्टार’ बन चुकी थीं।

लेकिन प्रसिद्धि की अपनी एक कीमत होती है। साध्वी प्रेम बायसा का जीवन बाहर से जितना भव्य और शांत दिखता था, आश्रम की चहारदीवारी के भीतर वह उतना ही पेचीदा था।

अध्याय 2: 8 जनवरी 2021—वह पल जो ठहर गया

कहानी की असली जड़ उस दिन में है, जिसे दुनिया ने 4 साल बाद देखा। 8 जनवरी 2021 की एक सर्द दोपहर थी। साध्वी अपने निजी कक्ष में विश्राम कर रही थीं। कमरे में उनके गुरु वीरमनाथ दाखिल हुए। वीरमनाथ वही शख्स थे जिन्होंने प्रेम को उंगली पकड़कर आध्यात्मिकता की राह दिखाई थी। भक्तों की नज़र में उनका रिश्ता पिता और पुत्री जैसा पवित्र था।

उस कमरे के कोने में एक सीसीटीवी कैमरा लगा था। यह कैमरा सुरक्षा के लिए था या किसी साजिश का हिस्सा, यह आज भी रहस्य है। कैमरे ने वह दृश्य रिकॉर्ड किया जहाँ साध्वी मानसिक रूप से बहुत टूटी हुई लग रही थीं और वीरमनाथ उन्हें सांत्वना दे रहे थे। वह क्षण अत्यधिक निजी और भावनात्मक था। उस समय कमरे में एक सहायिका भी मौजूद थी, जिसने इस दृश्य को सामान्य माना। पर वह रिकॉर्डिंग किसी की हार्ड ड्राइव में एक ‘टाइम बम’ की तरह सुरक्षित हो गई।

अध्याय 3: ब्लैकमेलिंग का वह काला जाल

2022 से 2024 के बीच साध्वी की लोकप्रियता शिखर पर थी। इसी दौरान पर्दे के पीछे कुछ लोग सक्रिय हुए—जोगाराम, उसकी पत्नी कृष्णा और ड्राइवर रमेश। आरोप है कि इन लोगों के हाथ वह सीसीटीवी फुटेज लग गई थी।

धीरे-धीरे साध्वी पर दबाव बनाया जाने लगा। “अपनी छवि बचानी है तो कीमत चुकानी होगी,” यह संदेश साफ था। सूत्रों के अनुसार, उस वीडियो को सार्वजनिक न करने के बदले 30 लाख रुपये की मांग की गई। साध्वी, जो दुनिया को आत्मिक शांति का पाठ पढ़ाती थीं, खुद एक भयानक मानसिक युद्ध लड़ रही थीं। उन्हें डर था कि समाज उस वीडियो के ‘संदर्भ’ को नहीं समझेगा और उनके गुरु के साथ उनके रिश्ते पर कीचड़ उछाला जाएगा।

अध्याय 4: 13 जुलाई 2025—तूफान का आना

आखिरकार वह हुआ जिसका डर था। 13 जुलाई 2025 को वह वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया। कुछ ही घंटों में साध्वी प्रेम बायसा के चरित्र पर सवाल उठने लगे। रील बनाने वाली दुनिया अब उनकी आलोचना में डूबी हुई थी।

साध्वी ने कैमरे के सामने आकर सफाई दी, “वह मेरे पिता समान गुरु हैं, मैं उस समय अवसाद में थी।” उनकी आँखों के आँसू उनकी सच्चाई बयां कर रहे थे, लेकिन सोशल मीडिया की ‘मॉब लिंचिंग’ (भीड़ तंत्र) ने उन्हें दोषी करार दे दिया था।

अध्याय 5: वह रहस्यमयी मेडिकल बैग और अंतिम सांसें

वीडियो वायरल होने के बाद साध्वी की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। यहाँ कहानी एक डरावना मोड़ लेती है। जब उनकी हालत खराब हुई, तो किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को बुलाने के बजाय, एक पुराने परिचित सहायक को फोन किया गया। वह शख्स एक मेडिकल बैग लेकर कमरे में दाखिल हुआ।

साक्षी बताते हैं कि उस शख्स ने साध्वी को एक इंजेक्शन दिया। दावा था कि यह उन्हें ‘नींद और शांति’ देगा। लेकिन उस सुई के चुभते ही शांति नहीं, बल्कि मौत के सन्नाटे की शुरुआत हुई। इंजेक्शन लगने के कुछ ही मिनटों में साध्वी का शरीर नीला पड़ने लगा और उनकी चेतना चली गई। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें ‘मृत’ घोषित कर दिया।

अध्याय 6: डिजिटल प्रेत—मौत के 3 घंटे बाद की पोस्ट

साध्वी की मृत्यु की खबर से पूरा राजस्थान शोक में था। पुलिस अस्पताल पहुँच चुकी थी और शव को मोर्चरी में ले जाया जा रहा था। तभी, शाम के वक्त साध्वी के आधिकारिक Instagram अकाउंट पर एक पोस्ट अपडेट हुई।

यह पोस्ट किसी धमाके से कम नहीं थी। मौत के 3 घंटे बाद एक मृत इंसान कैसे पोस्ट कर सकता है? कैप्शन में लिखा था:

“मैंने धर्म के लिए जीवन जिया, लेकिन कुछ लोगों ने मेरे पवित्र रिश्ते को कलंकित किया। अब मेरी मृत्यु ही मेरी बेगुनाही का सबूत होगी।”

यह पोस्ट एक सोची-समझी साजिश थी या साध्वी द्वारा पहले से शेड्यूल की गई आखिरी गुहार? साइबर सेल आज भी इस गुत्थी को सुलझाने में लगी है। क्या किसी के पास उनके अकाउंट का एक्सेस था जिसने मामले को ‘आत्महत्या’ का रूप देने के लिए यह पोस्ट डाली?

अध्याय 7: अनसुलझे सवाल और कानून की तलाश

आज साध्वी प्रेम बायसा हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी मृत्यु कई सवाल छोड़ गई है:

    वह रहस्यमयी शख्स कौन था? वह मेडिकल बैग लेकर आया शख्स घटना के बाद से ही फरार है। उसने कौन सी दवा दी थी?

    सीसीटीवी का एक्सेस किसके पास था? आश्रम के अंदर का वह गद्दार कौन था जिसने फुटेज निकालकर ब्लैकमेलर्स को दी?

    सिस्टम की विफलता: जब साध्वी ने पहले ही ब्लैकमेलिंग की शिकायत की थी, तो प्रशासन ने उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की?

पुलिस ने जोगाराम और उसके साथियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। फॉरेंसिक रिपोर्ट (विसरा रिपोर्ट) का इंतजार है, जो यह बताएगी कि उस इंजेक्शन में क्या था।

निष्कर्ष: डिजिटल युग की एक त्रासदी

साध्वी प्रेम बायसा की कहानी हमें चेतावनी देती है। यह दिखाती है कि कैसे हमारी ‘निजता’ (Privacy) पर तकनीक का पहरा है और कैसे समाज बिना सच जाने किसी की जिंदगी तबाह कर सकता है। एक गुरु और शिष्या का रिश्ता, जो शायद सिर्फ एक भावनात्मक सहारा था, उसे ‘वायरल वीडियो’ की संस्कृति ने मौत के घाट उतार दिया।

जोधपुर की गलियों में आज भी सन्नाटा है, और लोग बस यही पूछ रहे हैं—“क्या वह सुई दवा थी या जहर?”