“मुझे बैंक में पैसे जमा करने हैं… गरीब कचरा वाला लड़का बोला, पैसा देख सबकी आंखें फटी रह गईं | Story
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लखनऊ की सच्चाई
दिसंबर 2022 की एक ठंडी सुबह थी, और लखनऊ शहर अब भी धुंध की हल्की चादर में लिपटा हुआ था। सड़कों पर ओस की बूंदें चमक रही थीं और कहीं-कहीं से गरम मसाला चाय की खुशबू हवा में घुल रही थी। धीरे-धीरे शहर जागने लगा। हॉर्न की आवाजें, फूल बेचती बुजुर्ग औरतों की पुकारें और मंदिर की घंटियां सब मिलकर एक नए दिन की शुरुआत का ऐलान कर रहे थे।
इसी भीड़ में, एक गरीब कचरा बीनने वाला लड़का, राजू, बैंक के गेट पर खड़ा था। उसके फटे कपड़े, पैरों में टूटी चप्पल और कंधे पर गंदी सी पोटली थी। गार्ड ने उसे ऊपर से नीचे देखा और तुरंत हाथ बढ़ाकर बोला, “ए, बाहर जाओ। यहां मत खड़े रहो।”
राजू घबरा गया, लेकिन रुका नहीं। आसपास खड़े लोग भी हंसने लगे। गार्ड ने मजाक में कहा, “जा अंदर देख ले। पर लाइन में मत घुसना।”
राजू ने हिम्मत जुटाई और बैंक के अंदर गया। उसे पता था कि उसके पास पैसे हैं, लेकिन उसकी स्थिति ने उसे कमजोर बना दिया था। वह काउंटर के पास पहुंचा और बोला, “मुझे पैसे जमा करने हैं।”
काउंटर पर बैठी कर्मचारी ने उसकी पोटली की तरफ देखा और हंसते हुए बोली, “इसमें कितने होंगे? 100, 200?” दूसरे काउंटर से आवाज आई, “अरे, पहले असली ग्राहकों का काम निपटाओ।” बच्चा किनारे बैठा रहा।
राजू की आंखों में आंसू थे। उसने कहा, “मैडम, प्लीज पैसे जमा कर लीजिए। अगर यह खो गए तो मेरे मां-बाप बहुत परेशान हो जाएंगे।”
इस बार कर्मचारी झल्ला गई। “अरे ठीक है, खोलो पोटली। देखते हैं क्या लाया है।” जैसे ही पोटली खुली, कमरे की हवा बदल गई। उसमें 10 लाख रुपये के नए नोट थे।
बैंक में सन्नाटा छा गया। सभी लोग राजू को देख रहे थे। राजू ने बताया कि उसके माता-पिता ने खेत बेचकर यह पैसे इकट्ठा किए थे।
प्रिया शर्मा, जो एसडीएम थीं और गुप्त निरीक्षण पर आई थीं, ने यह सब देखा। उन्होंने महसूस किया कि राजू की आवाज में सच्चाई थी। उन्होंने तुरंत गार्ड को बुलाया और कहा, “इस बच्चे को अकेला मत छोड़ो। उसे सम्मान दो।”
तभी बैंक के मैनेजर ने राजू की ओर देखा और कहा, “बेटा, तुमने हमें गलतफहमी में डाल दिया। हम तुम्हें माफ करते हैं। तुम्हारे पैसे सुरक्षित रहेंगे।”
राजू की आंखों में आंसू थे, लेकिन उसने मुस्कुराते हुए कहा, “धन्यवाद, मैडम। यह पैसे मेरी बहन के लिए हैं।”
प्रिया ने राजू को गले लगाया और कहा, “तुम्हारी मेहनत और ईमानदारी ने हमें सिखाया है कि हमें किसी को उसके कपड़ों से नहीं, बल्कि उसके दिल से जज करना चाहिए।”
राजू ने अपनी पोटली को सीने से लगा लिया और कहा, “मैं हमेशा ईमानदारी से काम करूंगा। यह मेरे माता-पिता की मेहनत का फल है।”
उस दिन के बाद, राजू की जिंदगी बदल गई। उसने बैंक में पैसे जमा करने के बाद अपने माता-पिता को बताया कि उन्होंने सही किया।
प्रिया ने राजू को अपने दफ्तर बुलाया और कहा, “तुम्हारे जैसे बच्चों की कहानी हमें प्रेरित करती है। मैं चाहती हूं कि तुम अपनी पढ़ाई जारी रखो।”
राजू ने कहा, “मैं पढ़ाई करूँगा और अपने माता-पिता का नाम रोशन करूंगा।”
प्रिया ने राजू की मदद करने का निर्णय लिया। उन्होंने उसे एक छात्रवृत्ति दिलवाई और उसे एक अच्छे स्कूल में दाखिला दिलवाया।
राजू ने अपनी मेहनत से पढ़ाई की और धीरे-धीरे वह एक सफल छात्र बन गया। उसने इंजीनियरिंग में दाखिला लिया और अपनी मेहनत से आगे बढ़ा।
वहीं, प्रिया ने अपने काम में ईमानदारी और सच्चाई को आगे बढ़ाया। उन्होंने कई कार्यक्रमों में भाग लिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई।
राजू की कहानी पूरे शहर में फैल गई। लोग उसे एक उदाहरण मानने लगे और उसके नाम से कई एनजीओ बने जो गरीब बच्चों की मदद करते थे।
एक दिन, राजू ने प्रिया को एक पत्र लिखा। उसमें लिखा था, “आपने मुझे एक नया जीवन दिया है। मैं हमेशा आपके आभारी रहूंगा।”
प्रिया ने उस पत्र को पढ़कर अपनी आंखों में आंसू भर लिए। उन्होंने सोचा कि राजू की कहानी ने न केवल उसे बदला, बल्कि पूरे समाज को बदलने का काम किया।
समय के साथ, राजू ने एक सफल इंजीनियर बनकर अपनी पहचान बनाई। उसने अपने माता-पिता को गर्व महसूस कराया और उनकी मेहनत को सार्थक किया।
प्रिया और राजू की कहानी ने यह साबित कर दिया कि सच्चाई और मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। यह एक नई शुरुआत थी, जहां हर किसी को अपनी आवाज उठाने का हक था।
राजू ने अपनी सफलता का जश्न मनाते हुए कहा, “मैंने कभी सपने नहीं देखे थे, लेकिन अब मैं जानता हूं कि मेहनत और ईमानदारी से सब कुछ संभव है।”
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुमने हमें सिखाया है कि असली ताकत हमारे भीतर होती है। हमें बस उसे पहचानना होता है।”
इस तरह, लखनऊ की सच्चाई की यह कहानी एक प्रेरणा बन गई, जो हर किसी को यह बताती है कि गरीबी कपड़ों में होती है, इंसान में नहीं।
राजू और प्रिया की यात्रा ने यह साबित कर दिया कि सच्चाई और मेहनत से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। यह कहानी न केवल उनके लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
इसलिए, अगर आपको यह कहानी प्रेरणादायक लगी हो, तो इसे साझा करें और हमें बताएं कि आपको राजू और प्रिया की कहानी में कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा पसंद आया।
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