जब एक करोड़पति होटल मालिक को घमंडी मैनेजर लड़की ने वेटर समझकर होटल से निकाला, फिर जो हुआ…
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जब एक करोड़पति होटल मालिक को घमंडी मैनेजर लड़की ने वेटर समझकर होटल से निकाला, फिर जो हुआ…
दिल्ली की चमचमाती दुनिया में रॉयल पैलेस ग्रुप का हेड ऑफिस था। यह भारत की सबसे बड़ी होटल चेन थी, जिसके होटल दुनिया भर में फैले हुए थे। पांच सितारा लग्जरी, राजसी ठाट-बाट और बेमिसाल सर्विस के लिए मशहूर। कंपनी के मालिक का नाम था वीर प्रताप सिंह—32 साल का युवा बिजनेसमैन, जिसे लोग होटल इंडस्ट्री का राजकुमार कहते थे। लेकिन पिछले 6 महीने से वीर ने अपना चेहरा किसी को नहीं दिखाया था। बोर्ड मीटिंग्स में वह सिर्फ वॉइस से जुड़ता, चेहरा कभी नहीं। वजह थी—वह खुद अपनी कंपनी की सच्चाई जानना चाहता था।
वीर का बैकग्राउंड राजसी था। वह राजस्थान के एक पुराने राजघराने से था। लेकिन परिवार की संपत्ति कम हो गई थी। वीर ने अपनी बुद्धि और मेहनत से होटल बिजनेस शुरू किया और 10 साल में साम्राज्य खड़ा कर दिया। अब उसके पास निजी जेट, महल जैसे बंगले और अरबों की संपत्ति थी। लेकिन उसे डर था कि कहीं उसके कर्मचारी घमंड में ना डूब जाएं। इसलिए उसने एक अनोखा प्रयोग किया। वह खुद को एक साधारण वेटर बनाकर अपने ही दिल्ली वाले फ्लैगशिप होटल रॉयल पैलेस दिल्ली में काम करने लगा। उसने अपना नाम बदलकर विक्की रखा। सादे कपड़े पहने और दिन-रात गेस्ट्स को सर्विस देता। कोई नहीं जानता था कि ट्रे उठाने वाला यह नौजवान असल में कंपनी का मालिक है।
होटल की जनरल मैनेजर थी अवनी राय—29 साल की खूबसूरत, आत्मविश्वासी और बेहद सख्त महिला। अवनी ने आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई की थी, फिर विदेश से हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट का कोर्स किया। वह होटल की हर छोटी-बड़ी चीज पर नजर रखती थी। गेस्ट्स की शिकायतें बर्दाश्त नहीं करती थी। कर्मचारियों में उनका खौफ था। अवनी को लगता था कि होटल की सारी सफलता उनकी सख्ती और परफेक्शन की वजह से है। वह हमेशा डिजाइनर सूट में रहती, हाई हील्स पहनती और कभी मुस्कुराती नहीं। उनके बारे में अफवाह थी कि वह किसी अमीर घराने की बेटी हैं। लेकिन सच यह था कि वह एक छोटे शहर की मध्यमवर्गीय लड़की थी जिसने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया था। वह इस सच को छिपाने के लिए हमेशा परफेक्ट दिखने की कोशिश करती थी।
एक व्यस्त शुक्रवार की शाम थी। होटल का रेस्टोरेंट पूरी तरह पैक था। विदेशी गेस्ट्स, बिजनेस टायकून, बॉलीवुड सेलिब्रिटीज। वीर, विक्की बनकर एक टेबल पर सर्विस कर रहा था। वह ट्रे में सूप और स्टार्टर लेकर जा रहा था कि अचानक एक गेस्ट ने उसे टोका। लेकिन असली घटना अवनी के साथ हुई। अवनी रेस्टोरेंट का राउंड ले रही थी। उन्होंने देखा कि एक टेबल के पास फर्श पर थोड़ा पानी गिरा हुआ था। शायद किसी गेस्ट के ग्लास से। अवनी का पारा चढ़ गया। उन्होंने पास खड़े वेटर विक्की वीर को आवाज दी, “ए, तुम इधर आओ।”
वीर ट्रे रखकर उनके पास आया। “जी मैम।”
“यह क्या गंदगी है? फर्श पर पानी गिरा हुआ है और तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा। क्या तुम्हें होटल की इज्जत का कोई ख्याल नहीं? पांच सितारा होटल है यह। कोई ढाबा नहीं। तुम जैसे लापरवाह लोग यहां नहीं चलेंगे।”
वीर ने शांत स्वर में कहा, “सॉरी मैम, मैं अभी साफ कर देता हूं।”
लेकिन अवनी का गुस्सा शांत नहीं हुआ। वह और तेज हो गई। “सॉरी बस सॉरी बोलकर काम चल जाएगा? तुम्हें ट्रेनिंग दी गई है या नहीं? पता नहीं HR वालों ने तुम्हें कैसे रख लिया। तुम्हारी वजह से गेस्ट कंप्लेन कर सकते हैं। जाओ, अभी अपना सामान लो और होटल से बाहर निकलो। तुम टर्मिनेटेड हो।”
आसपास के दूसरे वेटर्स और स्टाफ चुपके से देख रहे थे। लेकिन कोई बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा था। वीर ने कुछ नहीं कहा। बस सिर झुकाकर हल्की मुस्कान के साथ चुपचाप किचन की ओर चला गया। अवनी ने फिर राउंड जारी रखा जैसे कुछ हुआ ही ना हो। लेकिन वीर के अंदर तूफान उठ रहा था। वह स्टाफ रूम में गया, अपना एप्रन उतारा और बाहर निकल गया। बाहर होटल के पीछे उसकी लग्जरी कार खड़ी थी, लेकिन वह पैदल ही निकल गया। घर पहुंचकर, जो असल में दिल्ली के सबसे पौश इलाके में एक आलीशान बंगला था, वह सोफे पर बैठ गया।
उसने अपने विश्वास पात्र CEO को फोन किया, “करण, कल से मैं नया प्लान शुरू कर रहा हूं। होटल में एक रहस्यमई इन्वेस्टर आने वाला है। उसका नाम होगा आदित्य राजपूत।”
करण हंसा, “सर, फिर नया ड्रामा?”
वीर बोला, “इस बार ड्रामा नहीं, सबक सिखाऊंगा।”
उधर होटल में अवनी अपनी असिस्टेंट मिशका से बात कर रही थी। “आज उस वेटर को निकाल कर अच्छा किया। ऐसे लोग होटल की रेपुटेशन खराब करते हैं।”
मिशका ने धीरे से कहा, “मैम, शायद वो नया था। थोड़ी ट्रेनिंग दे देते।”
अवनी ने तीखी नजर से देखा, “यहां परफेक्शन चाहिए मिशका, कोई बहाना नहीं।”
रात को अवनी अपने फ्लैट में थी। उन्हें एक अनजान नंबर से मैसेज आया, “तुमने गलत व्यक्ति को निकाला। बहुत जल्द सच सामने आएगा।”
अवनी ने मैसेज पढ़ा और हंस दी। “कोई मजाक कर रहा है।”
लेकिन अंदर से थोड़ा बेचैन हो गई।
होटल में स्टाफ रूम में अफवाहें शुरू हो गई। एक वेटर बोला, “यार, वो विक्की बड़ा अजीब था। कभी गुस्सा नहीं करता था।”
दूसरा बोला, “शायद वह कोई अमीर का बेटा था जो एक्सपीरियंस ले रहा था।”
सब हंस पड़े, लेकिन वीर जानता था अब खेल का दूसरा राउंड शुरू होने वाला है और जब सच खुलेगा तो अवनी सहित सबके होश उड़ जाएंगे।
अगला दिन, नया खेल
अगली सुबह रॉयल पैलेस दिल्ली में हलचल मची हुई थी। होटल के लॉबी में स्टाफ मीटिंग चल रही थी। अवनी राय सभी डिपार्टमेंट हेड्स के सामने खड़ी थी। उनकी आवाज में वही सख्ती थी जो हमेशा रहती थी।
“कल रात की सर्विस रिपोर्ट देखी है मैंने। दो गेस्ट्स ने कंप्लेंट की है कि उनका ऑर्डर लेट आया। यह बर्दाश्त नहीं होगा। हमारा होटल दुनिया के बेस्ट फाइव स्टार होटलों में शुमार है। अगर ऐसे कंप्लेंट्स आएंगे तो हमारी रेटिंग गिर जाएगी। मैं चाहती हूं कि आज से हर शिफ्ट में परफेक्शन हो। कोई गलती नहीं।”
मीटिंग खत्म होने के बाद अवनी अपनी असिस्टेंट मिशका के साथ अपने केबिन की ओर जा रही थी। तभी होटल के फ्रंट डेस्क मैनेजर ने उन्हें रोका, “मैम, एक बहुत महत्वपूर्ण गेस्ट आज चेक इन करने वाले हैं। नाम है आदित्य राजपूत। उन्होंने पूरा प्रेसिडेंशियल सूट बुक किया है एक महीने के लिए और खास निर्देश है कि कोई भी स्टाफ उनके बारे में बाहर बात ना करें। वे बहुत प्राइवेसी चाहते हैं।”
अवनी की भौं सिकुड़ी, “आदित्य राजपूत… मैंने यह नाम सुना है। राजस्थान के बड़े बिजनेसमैन हैं ना? होटल चैन में निवेश करने की बात चल रही है क्या?”
मैनेजर बोला, “जी मैम, यही अफवाह है। कहा जा रहा है कि वे हमारी चैन में बड़ा निवेश करने वाले हैं। CEO साहब ने खास ताकीद की है कि इनका पूरा ख्याल रखा जाए।”
अवनी मुस्कुराई। पहली बार थोड़ी सी मुस्कान उनके चेहरे पर आई, “ठीक है। मैं खुद इनका वेलकम करूंगी।”
आदित्य राजपूत का आगमन
दोपहर के ठीक 2:00 बजे एक चमचमाती काली रोल्स रॉयस होटल के पोर्टिको पर रुकी। दरवाजा खुला और उसमें से उतरा एक हैंडसम युवक—लंबा कद, चौड़े कंधे, गहरी आंखें, काले सूट में बेहद आकर्षक। उसके पीछे दो बॉडीगार्ड्स थे, लेकिन वे दूर खड़े रहे। यह था वीर प्रताप सिंह नए अवतार में—आदित्य राजपूत।
अवनी खुद लॉबी में खड़ी थी वेलकम करने के लिए। जैसे ही आदित्य अंदर आए, अवनी आगे बढ़ी, “वेलकम टू रॉयल पैलेस मिस्टर राजपूत। मैं अवनी राय, जनरल मैनेजर। उम्मीद है आपका सफर अच्छा रहा।”
आदित्य वीर ने उन्हें गौर से देखा। अवनी की खूबसूरती और आत्मविश्वास देखकर मन ही मन मुस्कुराया लेकिन चेहरा गंभीर रखा। उसने हाथ मिलाया, “थैंक यू मिस राय। मैंने सुना है कि यह होटल आपकी मैनेजमेंट में बेस्ट चल रहा है।”
अवनी को अच्छा लगा, “जी हम कोशिश करते हैं। चलिए, मैं आपको आपके सूट तक छोड़ती हूं।”
लिफ्ट में दोनों अकेले थे। आदित्य ने बात शुरू की, “मैंने आपकी होटल की काफी तारीफ सुनी है। लेकिन कुछ बातें खुद देखने आया हूं। निवेश करने से पहले मुझे यकीन चाहिए कि यहां की सर्विस और मैनेजमेंट टॉप क्लास है।”
अवनी बोली, “आप निश्चिंत रहें मिस्टर राजपूत, हमारी टीम बेस्ट है। कोई कमी नहीं मिलेगी आपको।”
सूट का दरवाजा खुला। प्रेसिडेंशियल सूट, पूरा फ्लोर, बालकनी से दिल्ली का स्काईलाइन दिखता था। प्राइवेट पूल, जकूजी—सब कुछ लग्जरी। आदित्य ने चारों तरफ देखा और बोला, “बहुत अच्छा है, लेकिन असली टेस्ट तो सर्विस का होता है।”
अवनी ने मुस्कुराकर कहा, “आप कोई भी ऑर्डर दें, तुरंत मिलेगा।”
टेस्टिंग टाइम
शाम को आदित्य ने रूम सर्विस ऑर्डर किया—एक स्पेशल राजस्थानी थाली। लेकिन जानबूझकर उसने एक मुश्किल डिमांड जोड़ी—थाली में लाल मांस होना चाहिए और वो भी खास तरीके से बना। होटल में नॉनवेज था, लेकिन इतनी स्पेसिफिक डिमांड कम आती थी। किचन में हड़कंप मच गया। शेफ ने अवनी को फोन किया, “मैम, गेस्ट ने लाल मांस मांगा है। लेकिन हमारे पास उस खास स्टाइल का मसाला नहीं है।”
अवनी गुस्से में आई। उन्होंने खुद किचन जाकर शेफ को डांटा और बाहर से स्पेशल मसाले मंगवाए। आखिरकार थाली तैयार हुई और सर्व की गई। आदित्य ने खाकर सिर्फ इतना कहा, “अच्छा है, लेकिन परफेक्ट नहीं।”
अवनी को बुरा लगा। रात को उन्हें फिर वही अनजान नंबर से मैसेज आया, “पहला टेस्ट पास नहीं हुआ। अभी और आने बाकी हैं।”
अवनी बेचैन हो गई। उन्होंने मिशका को फोन किया, “यह मैसेज किसके हैं? कोई मुझे धमका रहा है क्या?”
मिशका बोली, “मैम, शायद कोई प्रैंक है या फिर कल आपने जिस वेटर को निकाला था—विक्की को।”
अवनी हंसी, “वो बेचारा विक्की, वो तो गरीब लड़का था। उसके पास फोन भी शायद नहीं होगा। छोड़ो।”
लेकिन अगले दिन से असली खेल शुरू हुआ। आदित्य ने होटल में छोटी-छोटी कंप्लेंट्स करनी शुरू की। कभी बेड की चादर में हल्का सा दाग, कभी पूल का पानी ठंडा, कभी सर्विस थोड़ी लेट। हर कंप्लेंट पर अवनी खुद दौड़ी-दौड़ती आती और माफी मांगती। लेकिन आदित्य हर बार शांत भाव से कहता, “मैं निवेश करने आया हूं मिस राय, अगर छोटी-छोटी बातों में कमी है, तो बड़ा निवेश कैसे करूं?”
अवनी तनाव में आ गई। उन्हें लगा कि यह निवेश उनके करियर का टर्निंग पॉइंट हो सकता है। अगर आदित्य निवेश कर गए तो उनकी पोजीशन और मजबूत हो जाएगी। वे दिन-रात होटल में रहने लगीं।
रिश्ता बदलने लगा
एक शाम आदित्य ने अवनी को डिनर पर इनवाइट किया। होटल के रूफटॉप रेस्टोरेंट में। सिर्फ दोनों के लिए रिजर्व। अवनी थोड़ा हिचकिचाई लेकिन गई। वहां दिल्ली की लाइट्स नीचे चमक रही थीं। आदित्य ने वाइन ऑर्डर की और बोला, “आप बहुत मेहनती हैं अवनी। लेकिन इतनी सख्त क्यों रहती हैं अपने स्टाफ के साथ?”
अवनी ने कहा, “सख्ती के बिना परफेक्शन नहीं आता मिस्टर राजपूत।”
आदित्य मुस्कुराया, “कभी-कभी सख्ती इंसानियत को मार देती है। जैसे कल आपने एक वेटर को बिना वजह निकाल दिया।”
अवनी चौकी, “आपको कैसे पता?”
आदित्य ने टाल दिया, “होटल में बातें फैलती हैं।”
डिनर के बाद अवनी अपने केबिन में थी। उन्हें अचानक याद आया कि आदित्य की आंखें कुछ जानी पहचानी सी लगती हैं—जैसे विक्की की। लेकिन उन्होंने झटक दिया। पागलपन है। रात को फिर मैसेज आया, “अब दूसरा टेस्ट शुरू, एक बड़ा क्राइसिस आने वाला है। देखते हैं आप कैसे हैंडल करती हैं।”
प्रीवेडिंग पार्टी—असली संकट
अवनी की नींद उड़ गई। उन्हें नहीं पता था कि होटल में अगले दिन एक बहुत बड़ा इंटरनेशनल इवेंट होने वाला था। एक बॉलीवुड स्टार की प्रीवेडिंग पार्टी, जिसमें 200 VIP गेस्ट्स आने वाले थे। और आदित्य ने जानबूझकर कुछ ऐसा प्लान किया था कि उस इवेंट में एक बड़ा संकट आए।
वीर आदित्य अपने सूट में बैठा मुस्कुरा रहा था, “अब देखते हैं अवनी राय, तुम परफेक्शन की बात करती हो, लेकिन जब असली आग लगेगी तब क्या करोगी?”
होटल का माहौल तनावपूर्ण हो गया था। स्टाफ में अफवाहें थी कि यह आदित्य राजपूत असल में कुछ और ही हैं। लेकिन कोई यकीन नहीं कर रहा था। अगला दिन रॉयल पैलेस दिल्ली के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन था। होटल में बॉलीवुड की सुपरस्टार एक्टर रिया कपूर की प्रीवेडिंग पार्टी होनी थी। 200 से ज्यादा VIP गेस्ट्स, फिल्मी सितारे, बड़े बिजनेसमैन, पॉलिटिशियन और विदेशी मेहमान—पूरा होटल बुक था।
बैकयार्ड गार्डन को राजसी तरीके से सजाया गया था। झूमर, फूलों की मालाएं, लाइट्स की बारिश और एक बड़ा स्टेज जहाँ लाइव परफॉर्मेंस होने वाली थी। अवनी राय सुबह 4:00 बजे से होटल में थी। वह हर डिटेल खुद चेक कर रही थी। फूल ताजे हैं या नहीं? खाने का मेन्यू परफेक्ट है या नहीं? सिक्योरिटी टाइट है या नहीं? उन्हें याद था आदित्य राजपूत का मैसेज—एक बड़ा क्राइसिस आने वाला है। उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया। आज अगर सब कुछ परफेक्ट रहा तो आदित्य का निवेश पक्का हो जाएगा।
संकट की घड़ी
दोपहर तक सब कुछ ठीक चल रहा था। गेस्ट्स आना शुरू हो गए। रिया कपूर खुद हेलीकॉप्टर से उतरी और अवनी ने उनका भव्य स्वागत किया। आदित्य राजपूत भी पार्टी में शामिल थे। ब्लैक शेरवानी में बेहद आकर्षक लग रहे थे। अवनी ने उन्हें देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “मिस्टर राजपूत, आज आप खुद देखेंगे कि हमारी सर्विस कितनी परफेक्ट है।”
आदित्य ने गहरी नजरों से देखा और बोला, “उम्मीद है मिस राय, लेकिन रात अभी लंबी है।”
शाम 7:00 बजे पार्टी शुरू हुई। म्यूजिक बज रहा था, डांस फ्लोर पर लोग झूम रहे थे। डिनर सर्व हो रहा था—50 से ज्यादा डिशेस, लाइव काउंटर, विदेशी शेफ। लेकिन ठीक 8:30 पर अचानक बिजली गुल हो गई। पूरा होटल अंधेरे में डूब गया। जनरेटर ऑटोमेटिक स्टार्ट होना चाहिए था, लेकिन नहीं हुआ। होटल में अफरातफरी मच गई। गेस्ट्स चिल्लाने लगे। कोई बोला, “यह क्या हो रहा है?” रिया कपूर गुस्से में अवनी के पास आई, “मिस राय, यह पांच सितारा होटल है या कोई लोकल बैंक्वेट हॉल? बिजली क्यों गई?”
अवनी पसीने-पसीने हो गई। उन्होंने तुरंत इलेक्ट्रिशियन को बुलाया, लेकिन समस्या बड़ी थी। मेन जनरेटर में कोई तकनीकी फॉल्ट आ गया था और बैकअप जनरेटर को किसी ने गलती से मैनुअल मोड पर डाल दिया था। अवनी दौड़ी-दौड़ती कंट्रोल रूम गई। स्टाफ घबरा रहा था। तभी आदित्य उनके पास आए, शांत स्वर में बोले, “शांत रहिए मिस राय, मैं मदद कर सकता हूं। मुझे इलेक्ट्रिकल सिस्टम की थोड़ी समझ है।”
अवनी हैरान हुई, लेकिन कोई चारा नहीं था। दोनों कंट्रोल रूम में गए। आदित्य ने 15 मिनट में समस्या पता कर ली। एक वायरिंग में शॉर्ट सर्किट था जिसे ठीक करना था। लेकिन उसके लिए मेन स्विच बंद करना पड़ा, जिससे और 10 मिनट अंधेरा रहा। आखिरकार बिजली आई। गेस्ट्स ने राहत की सांस ली।
लेकिन संकट यहीं खत्म नहीं हुआ। बिजली आने के बाद किचन में पता चला कि फ्रीजर का तापमान गड़बड़ हो गया था। कुछ नॉनवेज डिशेस खराब हो गई थीं। मेन कोर्स में शामिल रॉयल राजस्थानी लाल मांस की डिश अब सर्व नहीं की जा सकती थी। शेफ घबरा गया। अवनी किचन में पहुंची तो उनका चेहरा लाल हो गया। “यह कैसे हो गया? मैंने सुबह खुद चेक किया था।”
शेफ बोला, “मैम, बिजली गई थी ना? फ्रीजर ऑटो नहीं चला।”
अब 200 गेस्ट्स को डिनर सर्व करना था और एक मुख्य डिश गायब। अवनी का दिल धड़क रहा था। रिया कपूर फिर आ गई, “अब क्या, खाना भी नहीं है?”
तभी आदित्य फिर प्रकट हुए, “मिस राय, मैंने बाहर से एक स्पेशल राजस्थानी शेफ को बुलवा लिया है। वो मेरे साथ आए हैं। 30 मिनट में नई डिश तैयार हो जाएगी।”
अवनी ने अविश्वास से देखा, “आपने कैसे?”
आदित्य मुस्कुराए, “मैं राजस्थानी हूं ना, मेरे पास कांटेक्ट्स हैं।”
आधे घंटे में नई डिश तैयार हुई और सर्व की गई। गेस्ट्स खुश हो गए। रिया कपूर ने खुद अवनी को गले लगाया, “थैंक गॉड, सब संभल गया।”
सच का खुलासा
पार्टी खत्म होने के बाद रात के 2:00 बजे अवनी अपने केबिन में बैठी थक कर रो रही थी। आज का दिन उनके लिए सबसे बुरा था। तभी दरवाजा खटखटाया। आदित्य अंदर आए, दो कॉफी कप लेकर, “कॉफी पिएंगी?”
अवनी ने आंसू पोंछे, “थैंक यू मिस्टर राजपूत। आज आप ना होते तो सब बर्बाद हो जाता।”
आदित्य बैठ गए, “आप बहुत मेहनती हैं अवनी। लेकिन आज जो हुआ वो दुर्घटना नहीं थी।”
अवनी चौकी, “मतलब?”
आदित्य बोले, “किसी ने जानबूझकर जनरेटर को मैनुअल मोड पर डाला और फ्रीजर का प्लग भी ढीला किया गया था। यह सब साजिश थी।”
अवनी के होश उड़ गए, “कौन कर सकता है यह?”
आदित्य ने गहरी सांस ली, “शायद कोई अंदर का आदमी या कोई बाहर का, जो नहीं चाहता कि मैं यहां निवेश करूं।”
अवनी डर गई, “पुलिस को बताएं?”
आदित्य बोले, “अभी नहीं, पहले खुद पता करूंगा। आप बस शांत रहें।”
उस रात दोनों देर तक बात करते रहे। अवनी ने पहली बार अपना दिल खोला, “मैं छोटे शहर से हूं मिस्टर राजपूत। मेहनत करके यहां तक पहुंची। मुझे डर लगता है कि कहीं सब छिन ना जाए।”
आदित्य ने उनकी आंखों में देखा, “आप मजबूत हैं अवनी और आज मैंने देखा कि आप अकेले नहीं हैं।”
दोनों की नजरें मिलीं। कुछ पल के लिए समय रुक सा गया। अवनी को लगा कि आदित्य की आंखों में कुछ जानी पहचानी सी गर्माहट है। लेकिन वह समझ नहीं पाई।
अंतिम परीक्षा—सच का दिन
अगली सुबह अवनी ने सीसीटीवी फुटेज चेक की। उन्हें कुछ संदिग्ध दिखा। रात में कोई छिपा हुआ शख्स कंट्रोल रूम के पास था। लेकिन चेहरा साफ नहीं था। उन्होंने आदित्य को बताया। आदित्य ने कहा, “मैं जांच करवाता हूं।”
असलियत यह थी कि सबोटाज खुद आदित्य वीर ने करवाया था अपने एक विश्वास पात्र स्टाफ से। वो अवनी को टेस्ट करना चाहते थे कि संकट में वह कैसे हैंडल करती हैं, और अवनी पास हो गई।
अब वीर को लगा कि अवनी में कुछ खास है। वह सख्त हैं लेकिन दिल की अच्छी हैं। उधर स्टाफ में अफवाहें तेज हो गईं। एक पुराना वेटर बोला, “यार, वह आदित्य राजपूत कोई आम आदमी नहीं लगता। कल उसने जनरेटर खुद ठीक किया।”
दूसरा बोला, “और मैम को देखा, दोनों देर रात तक केबिन में थे।”
अवनी को फिर अनजान मैसेज आया, “तीसरा टेस्ट पास। अब आखिरी आने वाला दिन—सच बहुत करीब है।”
अवनी अब डर और उत्सुकता दोनों महसूस कर रही थी। उन्हें लग रहा था कि आदित्य कुछ छिपा रहे हैं। और वह सही थी। वीर अपने सूट में बैठा सोच रहा था, “अब समय आ गया है कि मैं अपना असली चेहरा दिखाऊं।”
बोर्ड मीटिंग—सच सामने
अगली सुबह कंपनी के हेड ऑफिस से सूचना आई कि बोर्ड मीटिंग बुलाई गई है। कारण—रॉयल पैलेस ग्रुप में बड़ा निवेश आने वाला है और मालिक खुद मौजूद रहेंगे। अवनी को यह सुनकर हैरानी हुई। पिछले 5 सालों में मालिक वीर प्रताप सिंह कभी फिजिकली मीटिंग में नहीं आए थे। हमेशा वीडियो कॉल पर चेहरा छिपाकर।
अवनी को बोर्ड रूम में उपस्थित रहने का निर्देश मिला। मीटिंग दोपहर 3:00 बजे थी। बोर्ड रूम में सभी डायरेक्टर्स, CEO करण मेहता और सीनियर मैनेजमेंट बैठा था। अवनी भी कोने में कुर्सी पर बैठी थी। रूम में तनाव था। सब आपस में फुसफुसा रहे थे, “आज मालिक पहली बार आ रहे हैं। पता नहीं क्या होने वाला है।”
ठीक 3:00 बजे दरवाजा खुला। अंदर आए आदित्य राजपूत—वही ब्लैक सूट, वही आत्मविश्वास, लेकिन उनके साथ कोई नहीं था। सब हैरान। CEO करण खड़े हो गए और मुस्कुरा कर बोले, “लेडीज एंड जेंटलमैन, हमारे मालिक मिस्टर वीर प्रताप सिंह।”
एक पल के लिए रूम में सन्नाटा छा गया। अवनी का चेहरा सफेद पड़ गया। वह कुर्सी से उठने की कोशिश कर रही थी लेकिन पैर कांप रहे थे। आदित्य—नहीं, वीर—सीधे मुख्य कुर्सी पर बैठ गए। उनकी नजरें अवनी पर टिक गईं। वीर ने शांत लेकिन गंभीर आवाज में बोलना शुरू किया—
“सबसे पहले आप सभी को धन्यवाद। इस कंपनी को यहां तक पहुंचाने में आप सबका योगदान है। लेकिन पिछले 6 महीने से मैं खुद अपनी कंपनी को अंदर से देख रहा था। मैं जानना चाहता था कि हमारी संस्कृति अभी भी वही है या नहीं, जो मैंने सपने में देखी थी। मैं नहीं चाहता था कि सफलता के बाद हम घमंड और अहंकार में डूब जाएं।”
सब चुप थे। वीर ने आगे कहा, “इसलिए मैंने खुद को एक साधारण वेटर बनाया। नाम रखा विक्की। मैंने ट्रे उठाई, फर्श साफ किया, गेस्ट्स को सर्विस दी और मुझे जो अनुभव हुआ वह चौंकाने वाला था।”
अब उनकी नजरें सिर्फ अवनी पर थी। “मिस अवनी राय, आप इस होटल के जनरल मैनेजर हैं। आप बेहद मेहनती हैं, परफेक्शनिस्ट हैं। लेकिन एक दिन आपने मुझे एक साधारण वेटर को फर्श पर पानी गिरा देखकर बिना कुछ पूछे अपमानित किया और नौकरी से निकाल दिया। आपने मुझे इंसान नहीं, सिर्फ अपनी परफेक्शन की राह का कांटा समझा।”
अवनी का सिर झुक गया। आंखों में आंसू थे। बोर्ड रूम में कोई बोल नहीं रहा था। वीर ने आगे कहा, “लेकिन उसके बाद मैं आदित्य राजपूत बनकर आया। मैंने आपको टेस्ट किया। छोटी-छोटी कंप्लेंट्स की, फिर बड़ा संकट पैदा किया और आप हर बार पास हुईं। आपने दिखाया कि संकट में भी आप शांत रहती हैं, टीम को संभालती हैं, मेहनत करती हैं। आपने साबित किया कि आप सिर्फ सख्त नहीं, दिल की भी अच्छी हैं।”
अवनी अब रो रही थी। वह खड़ी हुई और कांपती आवाज में बोली, “सर, मैं… मैं माफी मांगती हूं। मुझे नहीं पता था, मैंने बहुत बड़ी गलती की। मैं घमंड में थी। मैं सोचती थी कि परफेक्शन ही सब कुछ है, लेकिन मैंने इंसानियत भुला दी। अगर आप चाहे तो मैं इस्तीफा दे देती हूं।”
वीर खड़े हो गए। वह अवनी के पास आए और धीरे से बोले, “इस्तीफा नहीं, अवनी। मैंने आपको टेस्ट इसलिए किया क्योंकि मुझे आप पर विश्वास था। आप में वह आग है जो इस कंपनी को और ऊंचा ले जा सकती है। लेकिन अब से याद रखिए—परफेक्शन के साथ-साथ इंसानियत भी जरूरी है। हर कर्मचारी चाहे वह वेटर हो या मैनेजर, हमारी फैमिली का हिस्सा है।”
फिर वीर ने सबकी ओर मुड़कर कहा, “आज से कंपनी में नई पॉलिसी शुरू होती है। हर मैनेजर को कम से कम एक महीना ग्राउंड लेवल पर काम करना होगा ताकि वे समझ सकें कि असली मेहनत क्या होती है, और जो लोग घमंड करेंगे उन्हें सबक सिखाया जाएगा।”
बोर्ड रूम में तालियां गूंजी। सब राहत महसूस कर रहे थे। अवनी अब भी रो रही थी लेकिन इस बार खुशी के आंसू थे।
नई शुरुआत—प्यार और बदलाव
मीटिंग खत्म होने के बाद वीर ने अवनी को रुकने का इशारा किया। रूम खाली हो गया, सिर्फ दोनों बचे। वीर बोले, “अवनी, मैंने तुम्हें टेस्ट किया लेकिन खुद भी टेस्ट हो गया। तुम्हारी मेहनत, तुम्हारा जुनून, तुम्हारी ईमानदारी—सब कुछ देखा और कहीं ना कहीं मैं तुमसे प्रभावित हो गया।”
अवनी ने आश्चर्य से उनकी ओर देखा, “सर, मतलब?”
वीर मुस्कुराए, पहली बार पूरी मुस्कान, “मतलब यह है कि मैं सिर्फ मालिक नहीं, एक इंसान भी हूं। और मुझे लगा कि शायद तुम्हारे साथ जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू किया जा सकता है। अगर तुम चाहो तो…”
अवनी की आंखें चौड़ी हो गईं। वह कुछ बोल नहीं पाई। वीर ने उनका हाथ थामा, “मैं जानता हूं यह अचानक है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में जो समय हमने साथ बिताया, वो रात जब हमने संकट संभाला, वो कॉफी, वह बातें—वह सब झूठे नहीं थे। मेरे दिल में जो भावना जागी, वो सच्ची है।”
अवनी ने हाथ नहीं छुड़ाया। वह धीरे से बोली, “मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा हो सकता है। लेकिन आपने मुझे बदल दिया है सर। आपने मुझे सिखाया कि परफेक्शन से ऊपर भी कुछ होता है—इंसानियत और प्यार। मैं तैयार हूं।”
दोनों एक दूसरे की आंखों में देखते रहे। बाहर शाम हो रही थी। दिल्ली की लाइट्स जल रही थी। वीर ने अवनी को गले लगा लिया।
कुछ महीनों बाद
रॉयल पैलेस ग्रुप पहले से कहीं ज्यादा सफल था। नई पॉलिसी की वजह से कर्मचारी खुश थे। सर्विस और बेहतर हो गई थी। और सबसे बड़ी खबर—वीर प्रताप सिंह और अवनी राय की सगाई की घोषणा हुई। पूरी कंपनी में एक जश्न था। अवनी अब भी उतनी ही मेहनती थी, लेकिन अब उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी। वह हर नए कर्मचारी से खुद मिलती और कहती, “यहां परफेक्शन मायने रखता है, लेकिन उससे ज्यादा मायने रखता है आपका सम्मान।”
वीर और अवनी साथ में होटल के ग्राउंड पर घूमते। कभी वेटर्स के साथ चाय पीते, कभी गेस्ट से खुद बात करते। कंपनी अब सिर्फ बिजनेस नहीं, एक परिवार बन गई थी। और उस दिन की याद जब अवनी ने विक्की को निकाला था, अब दोनों के लिए एक हंसी की बात बन गई थी। वीर कभी मजाक में कहते, “अगर तुमने मुझे उस दिन नहीं निकाला होता तो शायद मैं तुमसे कभी मिलता ही नहीं।”
अवनी हंसते हुए जवाब देती, “और अगर आपने मुझे टेस्ट ना किया होता तो मैं कभी नहीं बदलती।”
उनकी प्रेम कहानी होटल की दीवारों में गूंजती रही। एक गुप्त राजकुमार और एक सख्त मैनेजर की कहानी—जो अंत में एक दूसरे के लिए बने थे।
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