धर्मेंद्र की आखिरी वसीयत का राज || सालों पहले लिखी वसीयत ने मचाया कोहराम || Dharmender Property bank
धर्मेंद्र देओल की वसीयत: परिवार का दर्द, सच और नई शुरुआत
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र देओल का निधन न केवल भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति थी, बल्कि उनके परिवार के लिए भी यह एक ऐसा हादसा था जिसने पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया। उनके जाने के बाद, देओल परिवार में छुपे हुए राज और रिश्तों की उलझनों ने एक बार फिर सबको झकझोर कर रख दिया।
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वसीयत की रात: एक भावुक माहौल
मुंबई के जूहू बंगले में आधी रात को पूरा देओल परिवार इकट्ठा हुआ। घर के हॉल में सफेद फूलों के बीच धर्मेंद्र की तस्वीर रखी थी। हर चेहरा उदासी और तनाव से भरा हुआ था। प्रकाश कौर और हेमा मालिनी, दोनों पत्नियां, अपने-अपने तरीके से यह दुख सह रही थीं। वहीं, सनी देओल और बॉबी देओल के बीच तनाव का माहौल था।
गुप्त चिट्ठी और वसीयत का खुलासा
धर्मेंद्र जी के वकील अविनाश मेहरा वसीयत लेकर आए। लेकिन उन्होंने बताया कि वसीयत का अंतिम फैसला एक गुप्त चिट्ठी पर निर्भर करता है, जो धर्मेंद्र जी ने अपने कमरे की अलमारी में छुपा रखी थी। यह सुनते ही परिवार में तनाव और बढ़ गया।
जब चिट्ठी लाने की बात हुई, तो सनी और ईशा के बीच बहस छिड़ गई। सनी ने गुस्से में कहा कि यह घर उनका है और किसी और का इस पर हक नहीं है। ईशा ने जवाब दिया कि खून अलग होने से हक खत्म नहीं होता।
चिट्ठी की चोरी और साजिश
जब चिट्ठी लाने की कोशिश की गई, तो पता चला कि वह गायब हो चुकी है। इससे पूरे परिवार में हलचल मच गई। शक की सुई घर के हर सदस्य पर घूमने लगी। इसी बीच, पुलिस इंस्पेक्टर कबीर मल्होत्रा जांच के लिए पहुंचे। उन्होंने खुलासा किया कि चिट्ठी चोरी हुई है और धर्मेंद्र की मौत संदिग्ध हो सकती है।

गुप्त चिट्ठी का सच
आखिरकार, चिट्ठी परिवार के अकाउंटेंट रघुवीर के पास मिली, लेकिन उसने इसे चुराने की वजह नहीं बताई। चिट्ठी में धर्मेंद्र ने अपने जीवन के सबसे बड़े सच और परिवार के प्रति अपनी ख्वाहिशें लिखी थीं। उन्होंने लिखा:
“मेरी संपत्ति किसी एक के नाम नहीं होगी। यह घर, दौलत, सब कुछ परिवार का है। मेरी आखिरी इच्छा है कि यह संपत्ति सात हिस्सों में बांटी जाए—प्रकाश, हेमा, सनी, बॉबी, ईशा, अहाना और कविता।”
परिवार का मेल
चिट्ठी पढ़ने के बाद, परिवार ने अपनी गलतफहमियों को भुलाकर एक नई शुरुआत की। सनी ने बॉबी को गले लगाया, ईशा और अहाना ने दोनों मांओं से लिपटकर माफी मांगी। धर्मेंद्र की आखिरी ख्वाहिश आखिरकार पूरी हुई।
धर्मेंद्र की विरासत
धर्मेंद्र देओल का जीवन न केवल उनके अभिनय के लिए याद किया जाएगा, बल्कि उनके परिवार को जोड़ने की उनकी कोशिशों के लिए भी। उनकी यह वसीयत और आखिरी ख्वाहिश हमें सिखाती है कि परिवार का महत्व दौलत से कहीं ज्यादा है।
क्या आपको लगता है कि धर्मेंद्र जी ने जो कदम उठाए, वह सही थे? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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