पति ने उठाया बहुत बड़ा कदम जिसकी देख पुलिस के होश उड़ गए/डॉक्टर भी हैरान रह गए/

.

पति ने उठाया बहुत बड़ा कदम जिसकी देख पुलिस के होश उड़ गए / डॉक्टर भी हैरान रह गए

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के चंपत नगर गाँव में हर सिंह नाम का एक व्यक्ति रहता था। पेशे से वह ट्रक ड्राइवर था। ट्रक चलाकर वह अपने परिवार का गुजारा अच्छे से करता था। उसके परिवार में सिर्फ उसकी पत्नी अंजलि थी। अंजलि घर के कामकाज में व्यस्त रहती थी, लेकिन उसका मन अकेलापन महसूस करता था क्योंकि हर सिंह महीने में सिर्फ तीन-चार बार ही घर आता था।

एक दिन अंजलि ने अपने पति से कहा, “हर सिंह, मैं 12वीं पास हूं और चाहती हूं कि गाँव में किराने की दुकान खोलूं।” हर सिंह खुश हो गया, लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि दुकान खुलवा सके। अंजलि ने बताया कि दुकान खोलने के लिए तीन लाख रुपये चाहिए। हर सिंह ने अपने दोस्त रामभज जमींदार से कर्ज लिया और पत्नी के लिए दुकान खुलवा दी।

अब अंजलि दुकान पर काम करने लगी। उसकी दुकान पर ग्राहक आने लगे, कुछ उसकी खूबसूरती से आकर्षित होते थे। दुकान अच्छी चली, आमदनी बढ़ी, लेकिन अंजलि का अकेलापन दूर नहीं हुआ। पति कम आता था, इसलिए वह किसी और पुरुष के बारे में सोचने लगी। दिन बीतते गए, इच्छाएँ बढ़ती गईं, लेकिन कोई उसे नहीं मिला।

फिर एक दिन, अंजलि दुकान बंद कर कर्ज की किस्त देने रामभज जमींदार के घर गई। रामभज ने पैसे लेने से मना कर दिया और कहा, “अगर तुम मेरे साथ वक्त बिताओगी तो कर्ज माफ कर दूंगा।” अंजलि ने भी सौदा स्वीकार कर लिया। दोनों के बीच गलत संबंध बनने लगे। अंजलि को पैसे मिलते गए, उसकी इच्छाएँ पूरी होती गईं।

कुछ दिन बाद गाँव में आशु नामक युवक ने अपनी दुकान खोली। वह महिलाओं को पसंद करता था। आशु ने अंजलि पर नजर रखी और एक दिन मोटरसाइकिल पर उसे गाँव छोड़ने लगा। रास्ते में उसने अंजलि से उसके और रामभज के संबंधों की बात की। अंजलि ने उसे चुप रहने के बदले संबंध बनाने की इजाजत दी। आशु खुश हो गया।

धीरे-धीरे, अंजलि के संबंध गाँव के तीन पुरुषों से बन गए – रामभज जमींदार, आशु दुकानदार और उसका देवर प्रवीण। एक रात, अंजलि ने रामभज और आशु को अपने घर बुलाया। थोड़ी देर बाद प्रवीण भी आ गया। प्रवीण ने देखा कि उसकी भाभी दो पुरुषों के साथ थी। वह डर गया और बाहर चला गया।

कुछ दिन बाद, प्रवीण ने अपने भाई हर सिंह को सब सच बता दिया। हर सिंह गुस्से में गाँव लौट आया। उसने पहले पत्नी से प्यार से बात की, फिर अगले दिन रात को घर का दरवाजा बंद कर दिया। उसने अंजलि के हाथ-पैर बांध दिए, मुंह में कपड़ा ठूंस दिया, और गुस्से में लोहे की पाइप उठाकर उसकी संवेदनशील जगहों पर वार कर दिया। अंजलि दर्द से तड़पती रही और आखिरकार उसकी मौत हो गई।

हर सिंह ने पुलिस स्टेशन जाकर खुद को सरेंडर कर दिया। पुलिस ने शव बरामद किया, पोस्टमार्टम कराया, और हर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। डॉक्टर भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखकर हैरान रह गए। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। गाँव में सनसनी फैल गई। लोग चर्चा करने लगे कि क्या हर सिंह ने सही किया या गलत।

अदालत में केस चला। जज ने सबूतों और परिस्थितियों को देखा। हर सिंह ने अपनी पत्नी के विश्वासघात और मानसिक पीड़ा की दलील दी। लेकिन कानून में हत्या का कोई औचित्य नहीं था। जज ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई।

यह कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि रिश्तों में विश्वास कितना जरूरी है। अकेलापन, इच्छाएँ, और लालच इंसान को गलत रास्ते पर ले जा सकते हैं। अपराध का कोई औचित्य नहीं हो सकता, चाहे कारण कुछ भी हो। अगर अंजलि अपने पति से खुलकर बात करती, तो शायद ऐसी घटना न होती।

गाँव में लोग आज भी इस घटना को याद करते हैं। कुछ लोग हर सिंह की पीड़ा को समझते हैं, तो कुछ उसकी सजा को सही मानते हैं। अंजलि की मौत ने गाँव की महिलाओं को सतर्क कर दिया कि रिश्तों में ईमानदारी और संवाद जरूरी है।

क्या आपको लगता है कि हर सिंह ने सही किया या गलत? अपनी राय जरूर दें।