पुनर्जन्म | 4 साल के बच्चे ने बताई अपने पिछले जन्म की कहानी

पुनर्जन्म – एक बच्चे की उड़ान और अधूरी कहानी

मुंबई की वो रात आम रातों जैसी नहीं थी।
आसमान बिजली से गूंज रहा था, बारिश इतनी तेज थी कि लगता था पूरा शहर बह जाएगा।
एयरपोर्ट के रनवे के पीछे, कूड़े के ढेर के पास एक छोटी सी झोपड़ी थी।
वहीं रहता था आठ साल का शिवा – अनाथ, अकेला, और दिन-रात प्लास्टिक की बोतलें बिनने वाला।

शिवा की एक अजीब सी आदत थी।
हर रात वह एयरपोर्ट की जालीदार दीवार के पास बैठता और उड़ते जहाजों को देखता।
लेकिन उसके साथ कुछ अजीब होता था –
जब भी कोई बड़ा बोइंग विमान उसके सिर के ऊपर से गुजरता, उसके सिर में असहनीय दर्द उठता।
उसे धुंधली तस्वीरें दिखतीं – लाल बत्तियां, सायरन, जलता कॉकपिट।

आज की रात वह दर्द चरम पर था।
शिवा बारिश में भीगता हुआ रनवे के पास खड़ा था।
उसकी नजरें फ्लाइट 88 पर थीं –
एक विशाल जंबो जेट जिसमें 300 से ज्यादा यात्री सवार थे, जो लंदन जाने वाला था।

जैसे ही फ्लाइट 808 के इंजन स्टार्ट हुए, शिवा के दिमाग में एक जोरदार धमाका हुआ।
इस बार सब कुछ साफ दिख रहा था –
एक ढीला वाल्व, हाइड्रोलिक सिस्टम में रिसाव, टेक ऑफ के 40 सेकंड बाद विस्फोट।
शिवा चौंक गया – “यह नहीं हो सकता!”
उसकी आवाज एक बच्चे की थी, लेकिन उसकी आंखों में अनुभव का डर था।

शिवा जानता था उसे क्या करना है।
सुरक्षा बहुत सख्त थी – ऊँची दीवारें, कंटीले तार, हथियारबंद गार्ड्स।
लेकिन शिवा को एक सुराख पता था, जो उसने कचरा बिनते वक्त खोजा था।
वह कीचड़ में लेट गया, सांप की तरह रेंगते हुए पाइप से अंदर घुस गया।
उसका शरीर छिल गया, खून बहने लगा, लेकिन उसे दर्द का एहसास नहीं था।
उसके दिमाग में सिर्फ एक बात थी – “फ्यूल लाइन लीक है, सब मर जाएंगे!”

टारमक पर पहुंचते ही उसे ठंडी हवा का एहसास हुआ।
सामने जहाज धीरे-धीरे टैक्सी कर रहा था, बारिश और अंधेरे में विजिबिलिटी कम थी।
शिवा ने दौड़ लगा दी –
एक मैला-कुचैला बच्चा दुनिया के सबसे सुरक्षित जगह पर मौत के सामने दौड़ रहा था।

एक सिक्योरिटी गार्ड चिल्लाया – “कौन है वहां?”
सायरन बज उठे।
शिवा रुका नहीं।
वह सीधे जहाज के अगले पहिए की तरफ भागा।
जहाज अभी रुका था, पायलट एटीसी से क्लीयरेंस ले रहा था।

शिवा पागलों की तरह लैंडिंग गियर के पास पहुंच गया।
अपने हाथों में पकड़े लोहे के सरिए से पहिए पर मारने लगा –
“रुको, इसे मत उड़ाओ! इंजन नंबर दो फट जाएगा!”
उसकी आवाज इंजन के शोर में दब गई।

तभी सीआईएसएफ की जीप आ गई।
कमांडो ने बंदूकें तान दीं – “हिलना मत, हाथ ऊपर करो!”
शिवा ने हाथ ऊपर नहीं किए।
उसने जमीन पर पड़े पत्थर को उठाकर नोज गियर के सेंसर पर मारा।
सेंसर टूटते ही कॉकपिट में अलार्म बजने लगा।

पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाए।
जहाज झटके के साथ रुक गया।
कमांडो ने शिवा को दबोच लिया।
बारिश के पानी में उसका चेहरा दब गया।

एक अफसर ने थप्पड़ मारते हुए पूछा – “तू कौन है? आतंकवादी है?”
शिवा ने सिर उठाया।
उसकी आंखों में आंसू नहीं थे, बल्कि एक अजीब सख्ती थी।
उसने अफसर की आंखों में आंखें डालकर अंग्रेजी में कहा –
“Check the fuel manifold pressure valve on the starboard engine. It’s compromised. Unless you want 300 charred bodies on the runway, check it now!”

अफसर सन्न रह गया।
एक झुग्गी का बच्चा इतनी फ्लुएंट टेक्निकल इंग्लिश कैसे बोल सकता है?
पायलट नीचे उतर आया, इंजीनियर बुलाए गए।
शिवा को हथकड़ी लगाकर वहीं खड़ा रखा गया।

15 मिनट बाद चीफ इंजीनियर दौड़ता हुआ आया।
“बच्चा सही कह रहा है। वाल्व की सील टूटी है। जैसे ही थ्रस्ट बढ़ाते, इंजन में आग लग जाती और फ्यूल टैंक फट जाता। कोई नहीं बचता।”
सन्नाटा छा गया।
300 यात्रियों की जान बच चुकी थी।

सभी की नजरें शिवा पर थीं।
पुलिस कमिश्नर ने पूछा – “तुम्हें कैसे पता चला? तुम कौन हो?”
शिवा की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा।
पिछले जन्म की यादें और इस जन्म की कमजोरी उस पर हावी हो रही थी।
बेहोश होने से पहले उसने बुदबुदाया – “मैं कैप्टन कबीर मल्होत्रा हूं…”
और वह गिर पड़ा।

48 घंटे की सनसनी

अगले 48 घंटे देश की मीडिया में तूफान था –
“कूड़ा बिनने वाले बच्चे ने बचाई 300 जानें। यह पुनर्जन्म है या साजिश?”

शिवा को मिलिट्री अस्पताल में रखा गया।
आईबी के ऑफिसर राठौर को जांच सौंपी गई।
राठौर को पुनर्जन्म पर विश्वास नहीं था।
उसे लगता था कोई आतंकी संगठन बच्चे का इस्तेमाल कर रहा है।

पूछताछ कक्ष में राठौर ने फाइल मेज पर पटकी –
“तो कैप्टन कबीर? तुम्हारी उम्र 8 साल है और कबीर मल्होत्रा की मौत 9 साल पहले प्लेन क्रैश में हुई थी। गणित नहीं बैठ रहा!”

शिवा ने राठौर की तरफ देखा।
उसकी बॉडी लैंग्वेज बदल गई थी।
वह अब सिकुड़ा बच्चा नहीं, बल्कि सीनियर ऑफिसर जैसा बैठा था।

शिवा ने गंभीर आवाज में कहा –
“गणित तो उस दिन भी नहीं बैठा था राठौर, जब मेरी फ्लाइट 401 अरब सागर के ऊपर गायब हुई थी। रडार से सिग्नल 2 मिनट के लिए गायब हुआ था। ब्लैक बॉक्स कभी नहीं मिला। रिपोर्ट में लिखा गया पायलट एरर। लेकिन वो टरबाइन ब्लेड फेलियर था।”

राठौर चौंक गया।
यह बात सिर्फ जांच कमेटी और मरे पायलट को पता थी।
“तुम्हारे पीछे कौन है? किसने रिपोर्ट दिखाई?”
शिवा बोला – “मेरे पीछे कोई नहीं, और मेरे आगे सिर्फ मेरा अधूरा अतीत है।”

“अगर यकीन नहीं आता तो मुझे फ्लाइट सिमुलेटर पर ले चलो या मेरी पत्नी से मिलवा दो।”

“तुम्हारी पत्नी?”
“अवंतिका मल्होत्रा, शहर की जानीमानी आर्किटेक्ट। उससे पूछना – कबीर अपनी कलाई घड़ी उल्टी क्यों पहनता था? हमारी पहली सालगिरह पर मैंने क्या वादा किया था एफिल टावर के नीचे?”

राठौर ने मनोवैज्ञानिकों और एविएशन एक्सपर्ट्स की टीम बुलाई।
शिवा को बोइंग 777 के सिमुलेटर पर बिठाया गया।
8 साल के शिवा के हाथ मुश्किल से कंट्रोल तक पहुंच रहे थे।
उसने कुर्सी ऊंची की और स्विच दबाने लगा।
ओवरहेड पैनल सेट किए।
एटीसी की भाषा में बात की।
टॉवर इज अल्फा ब्रावो चार्ली रिक्वेस्ट फॉर टैक्सी।
जहाज उड़ाया, तूफानी मौसम में सुरक्षित लैंडिंग कराई।

पुराने पायलट खामोश हो गए –
यह मसल मेमोरी थी, वर्षों का अनुभव उस नन्हे शरीर में कैद था।

सच का सामना – अवंतिका मल्होत्रा

खबर बाहर लीक हो गई।
अवंतिका मल्होत्रा तक बात पहुंची।
उसने पुलिस कमिश्नर को फोन किया –
“मेरे मरे पति का मजाक बंद करो। मैं इस बच्चे से मिलना चाहती हूं।”

राठौर ने शिवा से कहा – “अगर एक भी जवाब गलत हुआ, तो तुम जिंदगी भर जेल में सड़ोगे।”
शिवा बोला – “मैं तैयार हूं, लेकिन क्या वो तैयार है?”

अवंतिका पुलिस स्टेशन के प्राइवेट रूम में बैठी थी।
9 साल हो गए थे कबीर को गए हुए।
उसने दोबारा शादी नहीं की थी।
आज पुलिस कह रही थी कि एक कचरा बिनने वाला बच्चा उसका पति है।

दरवाजा खुला।
राठौर शिवा को लेकर आया।
शिवा ने अवंतिका को देखा, ठिठक गया।
8 साल का बच्चा 35 साल की महिला को ऐसे देख रहा था जैसे कोई प्रेमी वर्षों बाद अपनी प्रेमिका को देखता है।

अवंतिका गुस्से से खड़ी हो गई –
“तुम हो वो? शर्म नहीं आती? किसकी दी हुई स्क्रिप्ट पढ़ रहे हो?”

शिवा चुप रहा।
धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
पुलिस वाले रोकने आए, लेकिन राठौर ने इशारा किया।

शिवा अवंतिका के सामने खड़ा हो गया।
उसकी गर्दन अवंतिका की कमर तक भी नहीं पहुंच रही थी।

शिवा ने धीरे से कहा – “अव…”
अवंतिका को करंट सा लगा।
कबीर उसे अकेले में ऐसे ही बुलाता था।

“यह नाम पब्लिक डोमेन में नहीं है। मुझे ठोस सबूत चाहिए।”

शिवा ने गहरी सांस ली –
“याद है मेरी आखिरी फ्लाइट से पहले हम लड़ पड़े थे। तुम चाहती थी मैं उड़ान ना भरूं, क्योंकि हमारी बेटी रूही का स्कूल में पहला दिन था। मैंने कहा था मैं वापस आकर उसे आइसक्रीम खिलाऊंगा। मैं वापस नहीं आया। अभी मुझे माफ कर दो।”

अवंतिका का चेहरा सफेद पड़ गया।
यह बात किसी को नहीं पता थी।

“कुछ और बताओ।”

शिवा ने कहा –
“वार्डरोब के पीछे एक छोटा सा सेफ है। उसका कोड तुम्हारा जन्मदिन नहीं, ना मेरी डेथ डेट। उसका कोड है 049 – जिस दिन हम पहली बार उस कॉफी शॉप में मिले थे। सेफ के अंदर सबसे नीचे एक नीला लिफाफा है, जिसमें मैंने तुम्हारे लिए लिखा था कि मेरे बाद अपनी लाइफ कैसे जीनी है।”

अवंतिका के घुटने जवाब दे गए।
वह कुर्सी पर गिर पड़ी।
उसने वह सेफ कभी नहीं खोला था।
राठौर ने टीम को अवंतिका के घर भेजा।
वीडियो कॉल पर सेफ खोला गया।
शिवा ने जो कोड बताया वही डाला गया।
बीप की आवाज के साथ सेफ खुल गया।
नीला लिफाफा वहीं था।

पूरा कमरा खामोश था।
अवंतिका दौड़कर शिवा के पास गई, उसे गले लगा लिया –
“कबीर, तुम वापस आ गए!”

शिवा ने नन्हे हाथों से उसके आंसू पोंछे।
“मैं वापस नहीं आया हूं। बस तुम्हें अलविदा कहने आया हूं, जो उस दिन नहीं कह पाया था।”

“मत जाओ! मैं तुम्हें अडॉप्ट कर लूंगी।”

शिवा ने हाथ छुड़ाया –
“क्या तुम मुझे बेटा मान पाओगी?”

“तो क्या करोगे?”

“मुझे मेरा अधूरा सपना पूरा करना है। पिछली बार मेरी उड़ान अधूरी रह गई थी। इस बार मैं फिर से पायलट बनूंगा, लेकिन अपनी मेहनत से।”

अंत और नई शुरुआत

सरकार ने शिवा की पढ़ाई और परवरिश का जिम्मा उठाया।
उसे बोर्डिंग स्कूल भेजा गया।
जाते वक्त अवंतिका उसे छोड़ने एयरपोर्ट आई।

शिवा ने मुड़कर देखा।
अवंतिका अब रो नहीं रही थी।
उसके चेहरे पर शांति थी, जो उसे 9 साल से नहीं मिली थी।

शिवा ने गेट की तरफ कदम बढ़ाया।
पीछे से एक प्लेन टेक ऑफ कर रहा था।
शिवा रुका।
आसमान की तरफ देखा और सैल्यूट किया –
अपने पिछले जीवन को, अपनी यादों को।

उसे पता था –
यादें धीरे-धीरे धुंधली हो जाएंगी, जैसे-जैसे वह बड़ा होगा।
कबीर मल्होत्रा अब सच में मर चुका था
और शिवा का जन्म हो चुका था।

कहानी का अंत उम्मीद के साथ हुआ –
लेकिन पाठकों के मन में एक सवाल हमेशा के लिए छोड़ गया –
क्या हम सच में मरते हैं, या बस शरीर बदलते हैं?