पत्नी से परेशान होकर पति ने कर दिया कारनामा/पत्नी के साथ हुआ हादसा/
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1. सेमरा गाँव का सपना
लखनऊ के पास सेमरा नाम का एक गाँव है, जहाँ पृथ्वी सिंह अपनी माँ लीला देवी के साथ रहता है। पृथ्वी पढ़ा-लिखा, समझदार लेकिन बेरोजगार युवक था। उसकी शादी छह महीने पहले रेशमा से हुई थी। रेशमा खूबसूरत थी, पर उतनी पढ़ी-लिखी नहीं। शादी के बाद ही दोनों के विचारों में टकराव शुरू हो गया था। पृथ्वी भविष्य की चिंता करता, रेशमा सजने-संवरने और अपने सपनों में खोई रहती।
रेशमा की सबसे बड़ी ख्वाहिश थी – गाँव में अपनी चूड़ियों की दुकान खोलना। वह रोज पृथ्वी से जिद करती, “मुझे दुकान खोलनी है!” पृथ्वी हमेशा कहता, “अभी पैसे नहीं हैं।” लेकिन रेशमा मानने को तैयार नहीं थी।

2. माँ का बलिदान
एक दिन जब झगड़ा बढ़ गया, पृथ्वी की माँ लीला देवी ने बीच-बचाव किया। उसने अपने सोने के कंगन गिरवी रखने का सुझाव दिया, ताकि रेशमा की दुकान खुल सके। पृथ्वी ने माँ की बात मान ली। कंगन गिरवी रखे, पैसे मिले और सड़क किनारे एक छोटी दुकान खुल गई। दुकान चल निकली। रेशमा खुश थी, दुकान में ग्राहकों की भीड़ लगने लगी।
पृथ्वी अब भी परेशान था, नौकरी की तलाश में लगा रहता। उसका सपना था कि एक अच्छी नौकरी मिल जाए, जिससे परिवार अच्छे से चल सके।
3. दिल्ली बुलाती है
15 अक्टूबर 2025 को पृथ्वी को दिल्ली की एक कंपनी में नौकरी मिल गई। माँ लीला देवी खुश थी, लेकिन रेशमा उदास हो गई। पृथ्वी ने कहा, “मैं पहले दिल्ली जाकर सेटल हो जाऊँगा, फिर तुम्हें और माँ को ले आऊँगा।” रेशमा ने अनमने मन से मंजूरी दी।
20 अक्टूबर को पृथ्वी दिल्ली चला गया। वहाँ नौकरी शुरू की, काम में व्यस्त हो गया। उधर गाँव में रेशमा अकेली थी, दुकान संभालती, घर के काम करती, लेकिन रात होते ही उसे पति की कमी सताती।
4. अकेलापन और लालच
पृथ्वी रोज फोन करता, लेकिन रेशमा का अकेलापन बढ़ता गया। उसके मन में गैर मर्द का ख्याल आने लगा, लेकिन कोई मिला नहीं। 30 अक्टूबर की रात, रेशमा दुकान में बैठी थी, तभी एक ट्रक सामने आकर रुका। ट्रक ड्राइवर अजमेर सिंह, हैंडसम युवक, टायर पंचर हो गया था। अजमेर दुकान में आया, रेशमा से मदद मांगी।
रेशमा ने बताया कि गाँव में कहीं भी पंचर की दुकान नहीं। अजमेर ने कहा, “रात यहीं गुजारना चाहता हूँ।” रेशमा ने माँ लीला देवी को बुलाया। लीला देवी ने बाहर बने कमरे में अजमेर को रुकने की इजाजत दी।
5. पहली गलती
रेशमा ने अजमेर के लिए खाना बनाया, कमरे में जाकर दिया। बातचीत में रेशमा ने अपना अकेलापन बताया। अजमेर ने रेशमा का हाथ पकड़ लिया, रेशमा ने विरोध नहीं किया। दोनों ने रजामंदी से गलत रिश्ता कायम कर लिया। कोई सावधानी नहीं बरती गई।
अजमेर ने रेशमा को कुछ पैसे दिए, रेशमा खुश हो गई। अजमेर ने आगे और ट्रक ड्राइवरों के लिए खाना बनाने का ऑफर दिया, जिससे रेशमा को और पैसे मिलने लगे। लीला देवी को भी लालच आ गया, रेशमा ने खाना बनाना शुरू कर दिया।
6. दूसरा कांड
एक महीने तक अजमेर रोज सुबह खाना लेने आता, पैसे देता। 28 नवंबर को अजमेर अपने दोस्त कालूराम के साथ शराब पी रहा था। कालूराम ने रेशमा के बारे में पूछा, अजमेर ने बताया कि वह उसके साथ वक्त बिताता है। कालूराम भी पैसे देकर रेशमा के साथ वक्त बिताना चाहता था। अजमेर ने रेशमा को कॉल किया, ₹5000 देने की बात कही। रेशमा ने लालच में हाँ कर दी।
रेशमा ने अपनी सास को नींद की दवा मिलाकर खाना खिला दिया, ताकि वह रातभर गहरी नींद में रहे। रात को अजमेर और कालूराम आए, रेशमा ने दोनों के साथ गलत संबंध बनाए, पैसे लिए। अब यह सिलसिला चलता रहा। रेशमा ने दुकान बंद कर दी, अब उसकी आमदनी इसी काम से होने लगी।
7. रेशमा की तबीयत बिगड़ती है
20 दिसंबर की सुबह रेशमा को दुकान में उल्टियाँ होने लगीं। लीला देवी ने अस्पताल ले जाकर डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने बताया कि रेशमा गर्भवती है। लीला देवी को शक हुआ कि बहू ने किसी गैर मर्द के साथ संबंध बनाए हैं।
शाम को लीला देवी ने बेटे पृथ्वी को फोन किया, सब बताया। पृथ्वी अगले ही दिन घर लौट आया।
8. पति का फैसला
21 दिसंबर की रात पृथ्वी घर लौटा। माँ लीला देवी और पत्नी रेशमा से मिला। रात को पृथ्वी ने रेशमा से पूछा, “किसके साथ गलत काम किया?” रेशमा चुप रही। पृथ्वी को गुस्सा आ गया। उसने दुपट्टे से रेशमा का गला दबा दिया, जब तक उसकी मौत नहीं हो गई।
पृथ्वी पूरी रात लाश के पास बैठा रहा। सुबह तक दरवाजा नहीं खोला। लीला देवी ने पड़ोसियों को बुलाया, दरवाजा तोड़ा गया। रेशमा मृत मिली, पृथ्वी लाश के पास बैठा था।
9. पुलिस और समाज
पड़ोसी सुरेश कुमार मिश्रा ने पुलिस को फोन किया। पुलिस आई, रेशमा का शव कब्जे में लिया, पृथ्वी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पृथ्वी ने बताया, “पत्नी ने मेरी पीठ पीछे गलत काम किया, जिसके कारण वह गर्भवती हुई।”
पुलिस ने पृथ्वी के खिलाफ चार्जशीट दायर की। अब यह भविष्य के गर्व में छिपा है कि पृथ्वी को क्या सजा मिलेगी।
10. सवाल और सीख
क्या पृथ्वी सिंह का कदम सही था? क्या रेशमा की गलती थी? क्या लीला देवी का लालच सही था? क्या समाज में अकेलापन, लालच और रिश्तों की टूटन ऐसी घटनाओं को जन्म देती है?
यह कहानी सिर्फ एक हादसा नहीं, समाज के कई सवालों को उजागर करती है। रिश्तों में संवाद, भरोसा, और सम्मान कितना जरूरी है, यह सिखाती है। लालच और अकेलापन, दोनों ही विनाश का कारण बन सकते हैं।
सीख:
रिश्ते विश्वास और संवाद से चलते हैं। अकेलापन और लालच किसी को भी अंधेरे में धकेल सकते हैं। पति-पत्नी का रिश्ता सबसे मजबूत होता है, लेकिन उसमें संवाद और समझदारी जरूरी है। सास का लालच, बहू का अकेलापन, पति की बेरोजगारी—तीनों ने मिलकर एक परिवार को बर्बाद कर दिया।
आपकी राय क्या है? क्या पृथ्वी का कदम सही था? क्या रेशमा की गलती थी? कमेंट में जरूर लिखें।
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