✦ एक साधारण लेकिन संस्कारी परिवार
दिल्ली के द्वारका में मिश्रा परिवार का छोटा सा घर था। बड़ा नहीं था, लेकिन प्यार से भरा हुआ था। घर के मुखिया राजेंद्र मिश्रा — रिटायर्ड बैंक ऑफिसर। ईमानदार, शांत और अपनी बेटियों पर गर्व करने वाले पिता।
उनकी पत्नी सुमित्रा देवी — स्नेह से भरी मां, जिन्होंने अपनी बेटियों को सिर्फ घर संभालना नहीं बल्कि खुद के पैरों पर खड़ा होना सिखाया।
तीन बेटियां थीं —
नेहा (सबसे बड़ी, एमबीए, कॉर्पोरेट जॉब)
रिया (खुशमिजाज, साइकोलॉजी स्टूडेंट)
काव्या (संवेदनशील, आर्ट और कविता पसंद करने वाली)
तीनों बहनों का रिश्ता दोस्ती से भी बढ़कर था।

✦ रिश्ता जो परफेक्ट लगा
नेहा की शादी की उम्र हो चुकी थी। काफी तलाश के बाद अर्जुन सक्सेना का रिश्ता आया — अमीर परिवार, बड़ा बिजनेस, पढ़ा-लिखा लड़का।
पहली मुलाकात अच्छी रही। अर्जुन सभ्य लगा, आधुनिक सोच वाला लगा। परिवार को भी रिश्ता ठीक लगा।
शादी तय हो गई।
मिश्रा परिवार ने अपनी हैसियत से बढ़कर तैयारियां कीं। शॉपिंग, मेहंदी, हल्दी, संगीत — घर खुशियों से भर गया।
नेहा भी सपने देखने लगी — नए घर, नई जिंदगी, नए रिश्ते।
उसे क्या पता था कि उसकी असली परीक्षा अभी बाकी है।
✦ बारात का आगमन
15 दिसंबर की शाम। बैंड-बाजे के साथ बारात आई। महंगी गाड़ियां, शोर-शराबा, दिखावा।
अर्जुन के दोस्त — रोहन और करण — शुरू से ही बदतमीज हरकतें कर रहे थे। घर पर ताने मारना, लड़कियों पर कमेंट करना।
लोगों ने सोचा — शादी का माहौल है, मजाक होगा।
लेकिन मजाक धीरे-धीरे सीमा पार करने लगा।
✦ जयमाला की बेइज्जती
जब नेहा जयमाला पहनाने गई, अर्जुन के दोस्तों ने उसे बार-बार कंधों पर उठा लिया ताकि नेहा पहुंच ना सके।
सब हंस रहे थे।
नेहा शर्म से परेशान थी।
सबसे दुखद — अर्जुन भी हंस रहा था।
उसने एक बार भी दोस्तों को नहीं रोका।
✦ जूता छुपाई में बदतमीजी
जूता छुपाई की रस्म में रिया और काव्या ने जूते छुपाए। शगुन मांगने पर अर्जुन के दोस्तों ने पैसों का घमंड दिखाया।
फिर बोले — “डांस करो हमारे साथ, तभी पैसे मिलेंगे।”
रिया मजबूरी में डांस करने लगी।
दोस्त जानबूझकर उसे छू रहे थे।
उसका दुपट्टा खींचा गया।
रिया रोते हुए भाग गई।
अर्जुन बोला —
“अरे छोटा सा डांस ही तो है।”
✦ हद तब पार हुई
डिनर के समय करण ने काव्या का हाथ पकड़ लिया। उसे डराया। वह कांपती हुई भागी।
रिया और काव्या ने मां को बताया।
मां-बाप टूट गए, पर शादी का माहौल बिगड़ने के डर से चुप रहे।
लेकिन नेहा सब देख रही थी।
उसके दिल में शक गहरा रहा था।
✦ वह अंधेरा गलियारा
फेरों से पहले नेहा, रिया और काव्या मंडप की ओर जा रही थीं।
एक सुनसान गलियारे में अर्जुन के दोस्त शराब पीकर खड़े थे। उन्होंने रास्ता रोका। गंदे कमेंट किए।
रिया का हाथ पकड़ लिया।
नेहा ने विरोध किया।
तभी अर्जुन वहां आया।
तीनों बहनों ने राहत की सांस ली — अब वह रोकेगा।
लेकिन अर्जुन हंसते हुए बोला:
“साली आधी घरवाली होती है… छोड़ दो बेचारियों को।”
और चला गया।
उस एक वाक्य ने नेहा की आंखें खोल दीं।
✦ फैसला
रिया और काव्या रोते हुए बोलीं —
“दीदी प्लीज इस घर में शादी मत करना।”
नेहा चुप रही।
उसके भीतर कुछ टूट चुका था — और कुछ नया जन्म ले चुका था।
✦ मंडप में ऐलान
फेरों का समय आया। 300 मेहमान मौजूद थे।
नेहा मंडप में खड़ी हुई और साफ आवाज में बोली:
“पंडित जी, ये शादी नहीं होगी।”
पूरा हॉल सन्न।
फिर उसने सबके सामने सच बता दिया — हर बदतमीजी, हर छेड़छाड़, अर्जुन की चुप्पी, उसका मजाक।
फिर कहा:
“जो आदमी मेरी बहनों की इज्जत नहीं कर सकता, वो मेरी इज्जत क्या करेगा?”
और अपनी वरमाला उतार दी।
✦ पिता का साथ
राजेंद्र मिश्रा जी ने बेटी का हाथ पकड़ा और कहा:
“मुझे तुम पर गर्व है।”
बारात वापस लौटी — बिना शादी के।
✦ आगे की जिंदगी
नेहा ने खुद को संभाला। करियर पर ध्यान दिया। प्रमोशन मिला।
रिया ने सेल्फ-डिफेंस सीखी।
काव्या का आत्मविश्वास बढ़ा।
एक साल बाद नेहा की मुलाकात आदित्य से हुई — समझदार, सम्मान देने वाला इंसान।
उसने नेहा की कहानी सुनकर कहा:
“तुमने जो किया, वही असली ताकत है।”
दोनों ने सादगी से शादी की — जहां दिखावा नहीं, सम्मान था।
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सड़क पर अतिक्रमण करते हो ये कहकर पुलिसवाले ने उसके फ्रूट्स बिखेर दिए और ठेला पलट दिया फिर उसके साथ
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अपने बराबर वालों में रिश्ता देखो , ये घर तुम्हारी औकात से बाहर है , ये कहकर घर से भगाया था , कुछ साल
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