बहन के साथ खेत में हुआ बहुत बड़ा हादसा/ भाई ने दोनों को सबक सिखाया/पुलिस और लोगों के होश उड़ गए/
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बहन का बदला: प्रदीप कुमार की संघर्षपूर्ण कहानी
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रामपुर गाँव में प्रदीप कुमार नामक एक युवक रहता था। उसकी उम्र लगभग 25 साल थी, और वह अपने माता-पिता की मौत के बाद पिछले सात सालों से अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाए हुए था। प्रदीप के माता-पिता की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद घर की सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई थी। परिवार में दो छोटी बहनें थीं – सपना, जो बीए फर्स्ट ईयर में कॉलेज जाती थी, और पूनम, जो गाँव के सरकारी स्कूल में बारहवीं कक्षा की छात्रा थी। प्रदीप मजदूरी करता था, लेकिन उसका सपना था कि वह अपनी बहनों की शादी अच्छे घरों में कराए, उसके बाद ही खुद शादी करे।
प्रदीप मेहनती था, और कुछ बड़ा करने की चाहत में बैंक से एक लाख रुपये का लोन लेकर गाँव में कपड़े की दुकान खोल ली। उसकी दुकान खूब चलने लगी, गाँव की महिलाएँ और लोग अक्सर वहीं से कपड़े खरीदते थे। प्रदीप की मिठास और कम दाम ने उसे लोकप्रिय बना दिया। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था, मगर किस्मत ने एक भयानक मोड़ लिया।
गाँव के बस अड्डे पर करम सिंह नाम का एक युवक मोबाइल की दुकान चलाता था। उसका पिता वेदपाल पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल था, जिससे करम सिंह में घमंड भी आ गया था। वह अक्सर गाँव के लोगों को नीचा दिखाने की कोशिश करता था। करम सिंह की नजर प्रदीप की बहनों पर भी थी, और उसने मन ही मन बुरी नीयत पाल ली थी।
पहला हादसा – पूनम के साथ
8 अक्टूबर 2025 की शाम थी। पूनम अपने घर के काम में लगी थी, तभी उसके मोबाइल की सिम खराब हो गई। वह अपने भाई प्रदीप की दुकान पर गई और नई सिम खरीदने की बात कही। प्रदीप ने पैसे और आधार कार्ड देकर उसे नई सिम खरीदने के लिए भेज दिया। पूनम बस अड्डे पर करम सिंह की दुकान पर गई। दुकान खाली थी। करम सिंह ने पूनम की सुंदरता देखकर बुरी नीयत बना ली। सिम देने के बहाने वह पूनम को छूने लगा। पूनम ने इसे गलती समझकर नजरअंदाज किया, मगर करम सिंह बार-बार ऐसा करने लगा। आखिरकार पूनम ने गुस्से में उसके गाल पर तमाचा मार दिया। करम सिंह ने उसे धमकी दी कि उसका पिता पुलिस में है, और वह इसका बदला जरूर लेगा। पूनम डर के बावजूद दुकान से बिना सिम लिए घर लौट आई।

दूसरा हादसा – खेत में अपहरण
15 अक्टूबर 2025 को सपना सुबह परिवार के लिए खाना बनाती है, प्रदीप दुकान चला जाता है। पूनम स्कूल के लिए निकलती है। बस अड्डे पर करम सिंह की दुकान है, वह पूनम को देखकर अपने दोस्त अजय को फोन करता है। दोनों मिलकर योजना बनाते हैं कि पूनम को बहला-फुसलाकर खेत में ले जाना है। अजय मोटरसाइकिल से पूनम को स्कूल छोड़ने के बहाने खेत की ओर ले जाता है। सुनसान जगह पर वह पूनम की गर्दन पर पेचकस रखकर धमकी देता है। फिर करम सिंह भी वहाँ पहुँचता है। दोनों मिलकर पूनम के हाथ-पैर बांधकर उसके साथ घिनौना कृत्य करते हैं। बाद में धमकी देकर उसे छोड़ देते हैं – अगर उसने किसी को बताया तो उसकी बहन सपना के साथ भी यही करेंगे।
पूनम डरी-सहमी घर आती है, कपड़े बदलकर कमरे में लेट जाती है। भाई प्रदीप पूछता है, तो वह सिर दर्द का बहाना करती है। प्रदीप उसकी बातों पर विश्वास कर दुकान चला जाता है। सपना कॉलेज से लौटती है, और बात आई-गई हो जाती है। पूनम नहीं जानती थी कि ये लड़के उसके साथ बार-बार ऐसा करने वाले हैं।
तीसरा हादसा – सपना के साथ
22 अक्टूबर 2025 को सपना कॉलेज जाने के लिए बस अड्डे जाती है। बस लेट हो जाती है। अजय वहीं खड़ा था, वह सपना को कॉलेज छोड़ने का बहाना करके मोटरसाइकिल पर बैठा लेता है। सुनसान जगह पर मोटरसाइकिल रोकता है, चाकू दिखाकर धमकी देता है। फिर करम सिंह को बुलाता है। दोनों मिलकर सपना के साथ भी वही घिनौना कृत्य करते हैं, धमकी देकर छोड़ देते हैं। सपना घर आकर कमरे में लेट जाती है, रोती है। पूनम पूछती है, मगर सपना भी बहाना बनाकर सच्चाई छुपा लेती है।
घटनाएँ बढ़ती जाती हैं
इन दोनों बहनों के साथ बार-बार खेत में जाकर यही अपराध होता है। दोनों डर और शर्म के मारे किसी को कुछ नहीं बतातीं। 29 अक्टूबर को फिर पूनम के साथ वही घटना होती है। लड़के बार-बार धमकी देते हैं कि अगर किसी को बताया तो पूरे परिवार को मार देंगे। कई दिनों तक दोनों बहनें चुप रहती हैं, किसी को कुछ नहीं बतातीं।
सच का खुलासा
15 दिसंबर 2025 को पूनम की तबीयत खराब होने लगती है, उल्टियाँ आती हैं। सपना पूछती है, तो पूनम रोते-रोते सारा सच बता देती है। सपना भी बताती है कि उसके साथ भी वही हुआ है। दोनों बहनें मिलकर प्रदीप को सच्चाई बता देती हैं। प्रदीप सुनकर गुस्से से पागल हो जाता है। बहनों को सांत्वना देता है, बदला लेने की ठान लेता है।
भाई का फैसला
सपना कहती है कि पुलिस में जाने से कुछ नहीं होगा, क्योंकि करम सिंह का पिता पुलिस में है। मगर प्रदीप हथौड़ा लेकर घर से निकल पड़ता है। बहनों को कमरे में बंद कर देता है। गाँव में पूछताछ करता है, पता चलता है कि दोनों लड़के खेत में शराब पी रहे हैं। प्रदीप खेत में पहुँचता है, बिना कुछ बोले करम सिंह के सिर में हथौड़ा मारता है। फिर अजय भागने की कोशिश करता है, मगर प्रदीप उसे भी पकड़कर मार डालता है। दोनों की मौके पर ही मौत हो जाती है।
पुलिस और गाँव में हड़कंप
कुछ किसान घटना स्थल पर पहुँचे, पुलिस को खबर दी। पुलिस आई, प्रदीप को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने पूरी कहानी सुनी – बहनों के साथ हुए अपराध, धमकियाँ, प्रदीप का गुस्सा। पुलिस को मजबूरी में प्रदीप के खिलाफ केस दर्ज करना पड़ा। गाँव के लोग हैरान थे – कोई सोच भी नहीं सकता था कि प्रदीप इतना बड़ा कदम उठा लेगा।
अदालत की दहलीज
प्रदीप को जेल भेज दिया गया। बहनों का बयान लिया गया। गाँव में चर्चा थी – क्या प्रदीप ने सही किया या गलत? गाँव के कई लोग प्रदीप के पक्ष में थे, क्योंकि उसने अपनी बहनों की इज्जत बचाने के लिए अपराधियों को सजा दी थी। मगर कानून के सामने हत्या का अपराध था।
समाज का सवाल
गाँव की महिलाएँ प्रदीप की बहनों के साथ खड़ी हो गईं। लोगों ने पुलिस से माँग की कि प्रदीप को रिहा किया जाए, क्योंकि उसने न्याय किया है। मगर कानून अपना काम कर रहा था। अदालत में केस चला। प्रदीप के वकील ने दलील दी कि पुलिस विभाग में अपराधियों का संरक्षण था, इसलिए प्रदीप ने मजबूरी में खुद न्याय किया।
परिवार का संघर्ष
सपना और पूनम ने साहस दिखाया, अदालत में अपने साथ हुए अत्याचार का बयान दिया। गाँव के लोग प्रदीप के समर्थन में अदालत के बाहर जमा हुए। मीडिया ने खबर फैलाई – “भाई ने बहनों के लिए न्याय लिया।” देशभर में चर्चा हुई कि क्या ऐसे मामलों में कानून को बदलना चाहिए?
अंतिम फैसला
अदालत ने सबूतों और गवाहों के आधार पर, प्रदीप को कुछ साल की सजा दी, मगर बहनों के बयान और समाज के दबाव के चलते उसकी सजा कम कर दी गई। प्रदीप ने अपनी बहनों की इज्जत के लिए जो किया, वह कानून के दायरे में अपराध था, मगर समाज ने उसे हीरो मान लिया।
कहानी का संदेश
यह कहानी सिर्फ प्रदीप की नहीं, हर उस भाई की है जो अपनी बहनों के लिए जान तक देने को तैयार है। समाज को चाहिए कि ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त कानून बने, ताकि किसी बहन को चुप रहना न पड़े, और किसी भाई को कानून हाथ में लेने की मजबूरी न हो। प्रदीप कुमार की कहानी हमें सिखाती है कि न्याय के लिए लड़ना जरूरी है, मगर सही रास्ता चुनना और कानून का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है।
समाप्ति:
प्रदीप कुमार की बहादुरी, उसकी बहनों का साहस, और गाँव के लोगों का समर्थन – यह कहानी समाज के लिए एक आईना है। क्या आप प्रदीप के फैसले से सहमत हैं? अपने विचार जरूर साझा करें।
जय हिंद!
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