पुलिस दरोगा की पत्नी नौकर को होटल ले कर गई और कर दिया बड़ा करनामा/

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जोधपुर में सनसनीखेज हत्या: दरोगा ने पत्नी की बेवफाई के शक में की निर्मम हत्या

जोधपुर, राजस्थान। जोधपुर जिले के बलसेर गांव में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। एक पुलिस हेड कांस्टेबल द्वारा अपनी ही पत्नी की कथित बेवफाई के चलते गला काटकर हत्या कर देने का मामला सामने आया है। घटना ने न केवल एक परिवार को तबाह कर दिया, बल्कि समाज, नैतिकता, विश्वास और कानून पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।


ईमानदार पुलिसकर्मी की छवि

मृतका प्रियंका देवी के पति सतबीर सिंह स्थानीय पुलिस स्टेशन में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। गांव के लोगों के बीच उनकी छवि एक ईमानदार और मददगार पुलिसकर्मी की थी। ग्रामीणों का कहना है कि सतबीर ने अपने पूरे सेवा काल में कभी रिश्वत नहीं ली और गरीबों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहे।

परिवार की आर्थिक स्थिति भी स्थिर मानी जाती थी। खेती की जमीन से अतिरिक्त आय हो जाती थी और घर का गुजारा आराम से चल रहा था। लेकिन घरेलू जीवन में सब कुछ सामान्य नहीं था।


वैवाहिक तनाव और बढ़ती दूरियां

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पति-पत्नी के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। प्रियंका देवी का स्वभाव खर्चीला बताया जा रहा है। उन्हें नए कपड़े, गहने और आधुनिक जीवनशैली पसंद थी। बताया जाता है कि वह अपने पति पर अतिरिक्त आय के लिए दबाव डालती थीं।

हालांकि सतबीर सिंह ने कभी गलत कमाई का रास्ता नहीं अपनाया। लेकिन इस मुद्दे को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होते थे। समय के साथ यह विवाद मानसिक दूरी में बदल गया।


कपड़ों की दुकान से शुरू हुआ नया अध्याय

कुछ समय पहले प्रियंका देवी ने गांव में कपड़ों की दुकान खोलने का प्रस्ताव रखा। सतबीर ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया और घर के सामने खाली पड़ी दुकान किराए पर लेकर पत्नी के नाम से दुकान शुरू कर दी।

शुरुआत में दुकान अच्छी चलने लगी। गांव के लोग सतबीर की ईमानदारी से प्रभावित थे, इसलिए उनकी पत्नी की दुकान से खरीदारी करना पसंद करते थे। लेकिन इसी दौरान घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया।


नौकर से बढ़ती नजदीकियां

दुकान पर काम के लिए शेखर नामक एक युवक को रखा गया। वह गांव का ही रहने वाला था और बेरोजगार था। धीरे-धीरे दुकान के कामकाज के दौरान शेखर और प्रियंका के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं।

जांच में सामने आया कि दोनों के बीच कथित रूप से अवैध संबंध स्थापित हो गए थे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह संबंध कई सप्ताह तक गुप्त रूप से चलता रहा। सतबीर को इस बात की भनक तक नहीं थी।


पुराने प्रेमी की एंट्री

मामले में एक और नाम सामने आया—प्रकाश। बताया जाता है कि वह प्रियंका का पुराना परिचित था। पुलिस के अनुसार, प्रकाश और प्रियंका के बीच पहले से संपर्क था, जो बाद में फिर से सक्रिय हो गया।

जांच अधिकारियों का कहना है कि प्रियंका, शेखर और प्रकाश के बीच संबंधों का जाल काफी उलझा हुआ था। कई बार मुलाकातें घर से बाहर भी हुईं।


होटल में मुलाकात और खुलासा

घटना का निर्णायक मोड़ तब आया जब प्रियंका कथित रूप से शेखर और प्रकाश के साथ शहर के एक होटल में देखी गईं। होटल के मालिक ने उन्हें पहचान लिया और सतबीर सिंह को इसकी सूचना दे दी।

सूचना मिलते ही सतबीर घर पहुंचे। पत्नी से पूछताछ की गई, लेकिन प्रारंभ में प्रियंका ने इनकार किया। बाद में कथित तौर पर विवाद बढ़ गया।


हत्या की भयावह रात

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, विवाद इतना बढ़ गया कि सतबीर ने आपा खो दिया। आरोप है कि उन्होंने पहले पत्नी की पिटाई की और फिर धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी।

घटना की सूचना पड़ोसियों ने पुलिस को दी। मौके पर पहुंची टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।


गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई

सतबीर सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उन्होंने अपराध स्वीकार कर लिया है। उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर चार्जशीट तैयार की जा रही है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चाहे उकसावे की स्थिति रही हो, लेकिन कानून अपने हाथ में लेना अपराध है। भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है।


गांव में चर्चा और सामाजिक प्रतिक्रिया

बलसेर गांव में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश और दुख है। कुछ लोग इसे “गुस्से में उठाया गया कदम” मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि हिंसा किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यदि समय रहते संवाद होता या सामाजिक मध्यस्थता होती, तो शायद यह त्रासदी टाली जा सकती थी।


सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू

यह घटना कई गंभीर सवाल उठाती है:

क्या वैवाहिक विवादों का समाधान संवाद से नहीं निकाला जा सकता?

क्या सामाजिक दबाव और अहंकार हिंसा को जन्म देते हैं?

क्या मानसिक परामर्श की कमी ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देती है?

विशेषज्ञों के अनुसार, दांपत्य जीवन में विश्वास सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। जब विश्वास टूटता है, तो भावनात्मक विस्फोट की स्थिति बन सकती है। लेकिन कानून हिंसा को कभी उचित नहीं मानता।


कानून का नजरिया

हत्या जैसे अपराध में “अचानक उकसावा” (grave and sudden provocation) का तर्क अदालत में रखा जा सकता है, लेकिन यह अदालत के विवेक पर निर्भर करता है कि इसे कितनी मान्यता दी जाए।

यदि अदालत को लगे कि आरोपी ने पूर्व नियोजित तरीके से हत्या की है, तो सजा और कठोर हो सकती है।


एक परिवार का अंत

इस घटना ने एक परिवार को पूरी तरह बिखेर दिया। एक पत्नी की मौत हो गई, पति जेल में है और दोनों के परिजन सामाजिक शर्मिंदगी और मानसिक आघात से गुजर रहे हैं।

गांव में अब भी लोग इस घटना को लेकर चर्चा कर रहे हैं। कोई इसे “इज्जत का मामला” कह रहा है तो कोई इसे “अनियंत्रित क्रोध का परिणाम” बता रहा है।


निष्कर्ष

जोधपुर के बलसेर गांव की यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि रिश्तों में विश्वास, संवाद और संयम कितना महत्वपूर्ण है। संदेह, गुस्सा और अहंकार जब मिल जाते हैं, तो परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।

कानून का रास्ता ही न्याय का एकमात्र वैध माध्यम है। निजी प्रतिशोध समाज को केवल अराजकता की ओर ले जाता है।

अब सबकी निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। यह देखना बाकी है कि न्यायालय इस मामले में क्या निर्णय सुनाता है, लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने पूरे इलाके को गहरा घाव दिया है—एक ऐसा घाव जो लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकेगा।