जब भाभी शादी में मेहंदी लगाने चली गई / ये देहरादून की कहानी हैं

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एक गलती, जिसने बदल दी तीन ज़िंदगियाँ

भारत के एक छोटे से ग्रामीण इलाके में बसे एक शांत और साधारण से गांव में कई परिवार रहते थे। यह गांव अपने सादे जीवन, परंपराओं और आपसी रिश्तों के लिए जाना जाता था। इसी गांव में एक परिवार था जिसमें तीन लोग साथ रहते थे—विवेक, उसकी पत्नी रीना और उनकी चचेरी बहन सरिता।

सरिता बहुत ही सुंदर, भोली-भाली और सीधी लड़की थी। उसकी उम्र लगभग बीस वर्ष के आसपास थी। वह पढ़ाई भी कर रही थी और घर के कामों में अपनी भाभी रीना की मदद भी किया करती थी। उसके माता-पिता बहुत गरीब थे और परिवार में पांच बेटियां थीं। सरिता सबसे बड़ी थी। आर्थिक तंगी के कारण उसके माता-पिता उसकी पढ़ाई और शादी का खर्च उठाने में असमर्थ थे। इसलिए उन्होंने सरिता को अपने रिश्तेदार विवेक के घर भेज दिया था ताकि वह वहां रहकर पढ़ाई कर सके और घर के कामों में मदद कर सके।

विवेक गांव में पेंटिंग का काम करता था। वह घरों की दीवारों पर पेंट करता था और कई बार बड़े-बड़े ठेके भी ले लेता था। उसके साथ कुछ मजदूर भी काम करते थे। मेहनत करने वाला आदमी था और अच्छी कमाई भी कर लेता था। लेकिन उसकी एक बहुत बुरी आदत थी—शराब पीने की।

हर शाम जब वह काम से लौटता था तो रास्ते में शराब की दुकान पर रुक जाता था। वहां अपने कुछ साथियों के साथ बैठकर शराब पीता और देर रात घर लौटता। कई बार वह इतना नशे में होता कि घर आकर सीधे अपने कमरे में जाकर सो जाता, खाना भी नहीं खाता।

विवेक की पत्नी रीना एक मेहनती और समझदार महिला थी। वह घर का सारा काम संभालती थी। खाना बनाना, सफाई करना, कपड़े धोना—सब कुछ वही करती थी। इसके अलावा उसे मेहंदी लगाने का बहुत अच्छा हुनर था।

गांव और आस-पास के इलाकों में जब भी शादी-विवाह होते, लोग रीना को मेहंदी लगाने के लिए बुलाते थे। उसकी मेहंदी बहुत सुंदर होती थी। दुल्हनें खास तौर पर उसे ही बुलाती थीं। इसके बदले उसे कुछ पैसे भी मिल जाते थे जिससे घर के खर्च में थोड़ी मदद हो जाती थी।

लेकिन विवेक को यह बात पसंद नहीं थी कि उसकी पत्नी दूसरे घरों में जाकर काम करे। उसे अक्सर शक होता था कि कहीं लोग उसकी पत्नी को गलत नजर से न देखें। इसलिए वह कई बार रीना को मना करता था कि वह मेहंदी लगाने के लिए बाहर न जाए।

इस बात को लेकर दोनों के बीच कई बार झगड़े भी हो जाते थे।

रीना समझाने की कोशिश करती कि वह सिर्फ महिलाओं को मेहंदी लगाती है और इससे घर की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। लेकिन विवेक अक्सर नशे में होने के कारण उसकी बात समझ नहीं पाता था।

इन सब के बीच सरिता घर में शांति बनाए रखने की कोशिश करती रहती थी। वह दोनों को समझाती और घर का माहौल शांत रखने की कोशिश करती।

समय इसी तरह बीत रहा था।

एक दिन पास के गांव से कुछ लोग रीना को बुलाने आए। वहां एक लड़की की शादी थी और दुल्हन को मेहंदी लगवानी थी। गांव में रीना की मेहंदी बहुत प्रसिद्ध थी, इसलिए वे लोग खास तौर पर उसे बुलाने आए थे।

पहले तो रीना ने मना कर दिया। उसने कहा कि अगर विवेक को पता चला तो वह नाराज हो जाएगा। लेकिन गांव के लोगों ने बहुत आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “बहन, तुम्हारी मेहंदी के बिना शादी अधूरी लगेगी। दुल्हन बहुत उम्मीद लगाए बैठी है।”

आखिरकार रीना मान गई। उसने सोचा कि जल्दी जाकर जल्दी लौट आएगी और शायद विवेक को पता भी नहीं चलेगा।

शाम को वह मेहंदी लगाने के लिए पड़ोसी गांव चली गई।

इधर घर पर सरिता अकेली रह गई।

रात होने लगी। सरिता ने सोचा कि पहले नहा लिया जाए। वह नहाने चली गई। जब वह वापस आई तो उसे याद आया कि उसके सारे कपड़े धुलकर छत पर सूख रहे हैं और अभी तक उसने उन्हें नीचे नहीं लाया है।

रात काफी हो चुकी थी और वह थक भी गई थी।

तभी उसे अपनी भाभी का कमरा याद आया। उसने सोचा कि भाभी की एक साड़ी पहन लेती हूं।

वह कमरे में गई और अलमारी से एक साड़ी निकालकर पहन ली। फिर थकान के कारण उसी बिस्तर पर लेट गई।

कुछ ही देर में उसे गहरी नींद आ गई।

उधर देर रात विवेक काम से लौटा। हमेशा की तरह वह रास्ते में शराब पीकर आया था। घर में अंधेरा था। उसने सोचा कि उसकी पत्नी कमरे में सो रही होगी।

वह सीधे अपने कमरे में गया।

कमरे में उसने देखा कि बिस्तर पर कोई लेटा हुआ है। अंधेरे में उसे लगा कि वह उसकी पत्नी ही है।

नशे की हालत में उसे कुछ समझ नहीं आया।

थोड़ी देर बाद सरिता की नींद खुली और उसे एहसास हुआ कि कुछ गड़बड़ है। उसने तुरंत विरोध किया और कहा, “भैया, आप क्या कर रहे हैं?”

लेकिन विवेक पूरी तरह नशे में था और उसे समझ नहीं आ रहा था कि सामने उसकी पत्नी नहीं बल्कि सरिता है।

कुछ देर तक सरिता ने विरोध किया, लेकिन स्थिति ऐसी बन गई कि दोनों एक बहुत बड़ी गलती कर बैठे।

रात बीत गई।

सुबह जब रीना मेहंदी लगाकर घर लौटी तो उसने कमरे का दरवाजा खोला।

अंदर का दृश्य देखकर वह कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गई।

उसने तुरंत दोनों को जगा दिया।

जब सरिता की आंख खुली तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। वह शर्म से सिर झुका कर बैठ गई। विवेक भी होश में आ चुका था और उसे भी समझ आ गया था कि रात में उससे बहुत बड़ी गलती हो गई है।

रीना ने दोनों से पूछा कि आखिर हुआ क्या था।

विवेक ने शर्मिंदा होकर कहा कि वह नशे में था और उसे लगा कि बिस्तर पर उसकी पत्नी ही सो रही है।

सरिता ने भी रोते हुए कहा कि उसने बहुत विरोध किया था, लेकिन हालात ऐसे बन गए कि वह खुद को बचा नहीं पाई।

रीना कुछ देर तक चुप रही।

फिर उसने गहरी सांस लेकर कहा, “जो हो गया उसे अब बदला नहीं जा सकता। लेकिन अगर यह बात बाहर गई तो हमारी बहुत बदनामी होगी।”

उसने फैसला किया कि इस बात को यहीं खत्म कर देना चाहिए।

कुछ दिनों बाद सरिता को उसके माता-पिता के पास वापस भेज दिया गया।

रीना ने उसके साथ कुछ पैसे भी दिए और कहा कि जल्द से जल्द उसकी शादी कर दी जाए।

सरिता के माता-पिता ने जल्द ही उसके लिए एक अच्छा लड़का ढूंढ लिया और उसकी शादी कर दी गई।

शादी के बाद सरिता अपने नए घर चली गई और अपनी नई जिंदगी शुरू की।

उधर इस घटना ने विवेक को पूरी तरह बदल दिया।

उसे अपनी गलती का बहुत पछतावा हुआ।

उसने शराब पीना पूरी तरह छोड़ दिया। अब वह सीधे काम पर जाता और काम खत्म होने के बाद सीधे घर लौट आता।

धीरे-धीरे उसके और रीना के रिश्ते भी सुधरने लगे।

रीना ने भी इस घटना को पीछे छोड़ने की कोशिश की और अपने घर को फिर से संभालने लगी।

समय बीतता गया।

इस घटना ने तीनों की जिंदगी को एक गहरा सबक दिया—कि नशा इंसान से बहुत बड़ी गलतियां करवा सकता है और कभी-कभी एक छोटी सी लापरवाही भी जिंदगी भर का पछतावा बन सकती है।

गांव में आज भी लोग कहते हैं कि इंसान को अपनी आदतों पर काबू रखना चाहिए, क्योंकि एक गलती सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित कर सकती है।

और यही इस कहानी का सबसे बड़ा संदेश है।