10 साल के लड़के ने पुलिस दरोगा के साथ कर दिया कारनामा/वजह जानकर S.P साहब के होश उड़ गए/

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भरतपुर में सनसनीखेज वारदात: 11 वर्षीय बच्चे ने दरोगा को मारी गोली, सरपंच की भी हत्या

माँ-बेटी से दुष्कर्म के आरोपों के बाद खौफनाक मोड़, पूरे जिले में हड़कंप

भरतपुर (राजस्थान)।
राजस्थान के भरतपुर जिले के एक छोटे से गांव बहनेरा में दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में घटी एक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक 11 वर्षीय बालक द्वारा कथित रूप से पुलिस दरोगा को गोली मारने और उसके चाचा द्वारा गांव के सरपंच की हत्या करने की घटना ने कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और ग्रामीण सत्ता तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रारंभिक जांच के अनुसार यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि कथित यौन उत्पीड़न, सत्ता के दुरुपयोग और प्रतिशोध की जटिल परतों से जुड़ी हुई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, वहीं जिला पुलिस अधीक्षक (एस.पी.) स्वयं पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं।


परिवार की पृष्ठभूमि: संघर्षों से भरा जीवन

गांव बहनेरा में रहने वाली विद्या देवी एक विधवा महिला हैं। कई वर्ष पूर्व लंबी बीमारी के कारण उनके पति का निधन हो गया था। पति की मौत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। जीविका के लिए वे भेड़-बकरियां पालती थीं और रोज सुबह उन्हें चराने खेतों की ओर ले जाती थीं। यही आय का मुख्य साधन था।

परिवार में उनका देवर अंगद (22 वर्ष) भी रहता था, जो पास के एक कारखाने में मजदूरी करता था। अंगद अपनी कमाई घर पर दे देता था। विद्या देवी के दो बच्चे हैं—बड़ी बेटी सोनिया (कक्षा 12 की छात्रा) और छोटा बेटा किशोर (कक्षा 5, उम्र लगभग 11 वर्ष)।

गांव में सरपंच बलदेव का खासा प्रभाव था। वहीं एक पुलिस दरोगा बिल्लू सिंह भी गांव में रहता था, जिसकी सरपंच से घनिष्ठता बताई जाती है।


पहला आरोप: खेत में कथित दुष्कर्म

परिजनों के बयान के अनुसार 5 दिसंबर 2025 को विद्या देवी अपनी बकरियां चराने सरपंच बलदेव के खेत के पास पहुंची थीं। आरोप है कि बकरियों के खेत में घुस जाने को लेकर विवाद हुआ और इसी दौरान सरपंच ने महिला के साथ जबरदस्ती की। आरोप यह भी है कि महिला को धमकाया गया कि यदि उसने किसी को बताया तो पूरे परिवार को नुकसान पहुंचाया जाएगा।

विद्या देवी ने यह बात उस समय किसी को नहीं बताई। परिजनों का कहना है कि वह डर और सामाजिक बदनामी के भय से चुप रहीं।


दूसरा आरोप: बेटी के साथ भी घटना

करीब दो सप्ताह बाद, 19 दिसंबर को, जब विद्या देवी अस्वस्थ थीं, तो उनकी बेटी सोनिया बकरियां चराने खेतों की ओर गई। आरोप है कि उसी दौरान सरपंच और दरोगा बिल्लू ने मिलकर उसके साथ भी दुष्कर्म किया। लड़की को भी कथित रूप से जान से मारने की धमकी दी गई।

यह घटना भी परिवार के अन्य सदस्यों से छुपी रही। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोनिया ने शुरू में भय के कारण किसी को कुछ नहीं बताया।


धमकी और सच का खुलासा

26 दिसंबर को कथित रूप से सरपंच और दरोगा विद्या देवी के घर पहुंचे और बेटी के साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए दोबारा दबाव बनाने की कोशिश की। इसके बाद विद्या देवी ने अपने देवर अंगद को फोन कर घर बुलाया।

घर पहुंचने पर अंगद को पूरी घटना की जानकारी दी गई। बाद में बेटी सोनिया ने भी रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। यह सुनकर अंगद आक्रोशित हो उठा।

परिजनों के अनुसार अंगद ने उसी समय बदला लेने की ठान ली। घर में कोई हथियार न मिलने पर उसने एक पुरानी गंडासी (धारदार हथियार) उठाई और सरपंच के खेत की ओर चल पड़ा। उसके पीछे सोनिया और 11 वर्षीय किशोर भी चले गए।


खेत में टकराव और दो हत्याएं

पुलिस के मुताबिक सरपंच और दरोगा उस समय खेत में मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों शराब के नशे में थे। बताया जाता है कि सरपंच के पास लाइसेंसी रिवॉल्वर भी थी।

अंगद और दोनों आरोपियों के बीच कहासुनी हुई। इसी दौरान कथित रूप से सरपंच ने रिवॉल्वर निकाली, लेकिन अंगद ने गंडासी से वार कर उसके हाथ पर चोट पहुंचाई, जिससे हथियार नीचे गिर गया।

यहीं से घटनाक्रम ने खौफनाक मोड़ ले लिया। पुलिस के अनुसार 11 वर्षीय किशोर ने जमीन से रिवॉल्वर उठाई और दरोगा बिल्लू पर दो-तीन गोलियां चला दीं। दरोगा की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं अंगद ने गंडासी से सरपंच पर कई वार किए, जिससे उसकी भी घटनास्थल पर मृत्यु हो गई।


गांव में हड़कंप, पुलिस पहुंची मौके पर

घटना की खबर गांव में आग की तरह फैल गई। किसी ग्रामीण ने पुलिस स्टेशन को सूचना दी। करीब एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लिया।

घटना के तुरंत बाद अंगद, किशोर और परिवार के अन्य सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।


एस.पी. के होश उड़े

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक (एस.पी.) स्वयं गांव पहुंचे। प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया कि एक 11 वर्षीय बच्चे द्वारा सरकारी सेवा में तैनात दरोगा को गोली मारना अभूतपूर्व है। साथ ही, आरोपों में दुष्कर्म और सत्ता के दुरुपयोग की बातें सामने आने से प्रशासन सकते में है।

एस.पी. ने कहा कि “पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। यदि मृतकों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो संबंधित तथ्यों को भी जांच में शामिल किया जाएगा।”


कानूनी पेचीदगियां

यह मामला कई कानूनी प्रश्न खड़े करता है:

    क्या यह आत्मरक्षा का मामला है?
    यदि आरोप सिद्ध होते हैं कि पीड़ित परिवार पर लगातार अत्याचार और धमकी दी जा रही थी, तो अदालत में आत्मरक्षा की दलील दी जा सकती है।

    नाबालिग की भूमिका:
    11 वर्षीय किशोर पर गोली चलाने का आरोप है। भारतीय किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के तहत उसकी उम्र, मानसिक स्थिति और घटना की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा।

    दुष्कर्म के आरोपों की जांच:
    मृतकों पर लगे आरोपों की भी स्वतंत्र जांच होगी। यदि सबूत मिलते हैं, तो यह मामला केवल हत्या नहीं, बल्कि उत्पीड़न और प्रशासनिक भ्रष्टाचार का भी बन सकता है।


गांव में बंटी राय

गांव में इस घटना को लेकर मतभेद हैं। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि “जो हुआ गलत हुआ, कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए था।” वहीं कुछ लोग परिवार के प्रति सहानुभूति जता रहे हैं और कहते हैं कि “अगर आरोप सही हैं, तो परिवार लंबे समय से डर और दबाव में जी रहा था।”

महिला संगठनों ने निष्पक्ष जांच और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की है।


आगे क्या?

फिलहाल अंगद पुलिस हिरासत में है। किशोर को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाएगा। सोनिया और विद्या देवी के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मेडिकल और फोरेंसिक जांच भी चल रही है।

यह मामला आने वाले दिनों में अदालत में महत्वपूर्ण कानूनी बहस का विषय बन सकता है—क्या यह पूर्व नियोजित हत्या थी, या फिर लंबे समय से चले आ रहे उत्पीड़न के खिलाफ उभरा उग्र प्रतिरोध?


निष्कर्ष

भरतपुर की यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि ग्रामीण सत्ता संरचना, महिला सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और न्याय प्रणाली की जटिलताओं को सामने लाती है। एक 11 वर्षीय बच्चे के हाथों चली गोली ने पूरे प्रशासन को झकझोर दिया है।

अब सबकी नजर अदालत पर है—जहां तय होगा कि यह प्रतिशोध था, आत्मरक्षा थी, या कानून के खिलाफ उठाया गया एक अस्वीकार्य कदम।