योगी जी से तो भगवान भी डरें… सुनते ही पुलिस भी हंसते-हंसते लोट-पोट हो गई

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योगी जी, भगवान और आम आदमी — एक गांव की कहानी

1. प्रस्तावना

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव “रामपुर” में हर शाम चौपाल लगती थी। यहाँ के लोग अपनी-अपनी समस्याएँ, खुशियाँ और राजनीति की चर्चा करते थे। गांव के प्रधान, पंडित रामलाल, अपनी हाजिरजवाबी और ठहाकों के लिए मशहूर थे। उनके साथ बैठते थे — पुलिस के हवलदार सुरेश, किसान बबलू, दुकानदार चंदू, और गाँव की सबसे बुजुर्ग महिला, दादी कमला।

2014 का साल था। देश ने नया प्रधानमंत्री चुना था। गाँव में भी उत्साह था, उम्मीदें थीं, लेकिन साथ ही व्यंग्य और हंसी की भी कोई कमी नहीं थी।

2. राजनीति और ठहाके

एक दिन प्रधान जी ने चौपाल में कहा, “अब देखो, भाई! देश बदल गया है। अब तो भगवान भी डरेंगे योगी जी से।”

हवलदार सुरेश तुरंत बोले, “प्रधान जी, भगवान तो वैसे भी पुलिस से डरते हैं। कहीं उनकी पूजा में कोई गड़बड़ हो गई तो एफआईआर हो जाएगी।”

सब हँस पड़े। बबलू ने कहा, “प्रधान जी, इस बार चुनाव में वोट दिया था, लेकिन पेट्रोल के दाम देखकर लगता है कि वोट को भी टैक्स लग जाएगा।”

चंदू ने दुकान से ₹500 का इनाम देने की बात उठाई, “प्रधान जी, आप तो 500 का इनाम दे रहे थे, पर अब तो 500 रुपए में बस दो किलो प्याज ही आएगा।”

दादी कमला ने टोकते हुए कहा, “बेटा, भगवान कृष्ण ने तो 56 करोड़ का मामला नानी भाई को कर दिया था, यहाँ तो 500 भी कम पड़ रहे हैं।”

योगी जी से तो भगवान भी डरें... सुनते ही पुलिस भी हंसते-हंसते लोट-पोट हो गई  | Ashok Nagar |

3. समाज में बदलाव

रामपुर में एक बार दंगे की अफवाह फैल गई। लोग घबरा गए। प्रधान जी ने माइक पकड़कर घोषणा की, “डरो मत! 2014 में देश ने ऐसा प्रधानमंत्री चुना है कि अब ना तो पैसे की गुंडागर्दी चलेगी, ना पत्थर चलेंगे।”

हवलदार सुरेश ने चार पंक्तियां सुनाई:

वो दंगों का आगजनी का
खेल नहीं चलने देगा।
लूट मार और ब्लैक मनी का
खेल नहीं चलने देगा।

गांव के सब लोग तालियाँ बजाने लगे।

4. भ्रम और हकीकत

चंदू ने कहा, “प्रधान जी, कई लोग सोचते हैं कि भारत फिर से बाँट लिया जाएगा।”

प्रधान जी बोले, “उनकी नस्लें तक ढूंढ ली जाएंगी।”

दादी कमला ने कश्मीर की बात उठाई, “प्रधान जी, कश्मीर मांगने वालों की जीभ काट ली जाएगी।”

सब जोर से भारत माता की जय बोलने लगे। प्रधान जी ने फिर व्यंग्य से कहा, “जो नहीं बोलेगा, उसके यहाँ छोरी हो जाएगी।”

5. परिवार और प्रेम

एक दिन चौपाल में चर्चा हो रही थी — “घर में प्रेम बचा नहीं है।”

बबलू ने कहा, “मैं 16 दिन से बाहर हूँ, घर जाऊँगा तो मिसेज पूछेगी — रोटी खाओगे क्या?”

चंदू बोला, “मथुरा में भंडारा था, तीन बाटी उठा लाया। एक मैं खाऊँ, एक तू खा, एक छोरी खाएगी।”

दादी कमला ने हँसते हुए कहा, “पानी कोई पीने की चीज है क्या? गला चेक करूंगी कैसे लीकेज दिख रहा है!”

हवलदार सुरेश ने कहा, “चाय बना दे तो बात बन जाए।”

प्रधान जी बोले, “2014 के बाद से चाय वाले को छेड़ना बंद कर दिया। अब सत्ता चाय वाले के हाथ में है।”

6. राजनीति की हंसी

चंदू ने कहा, “कहीं 2029 में गाय वाला काबिज हो गया तो बुलडोजर प्लेन से उतरेंगे।”

प्रधान जी बोले, “हमारे यहाँ तो चुनाव में ममारी सबसे ज्यादा होती है। कांग्रेस-भाजपा के अलावा बुआ-भतीजे भी झेलो।”

हवलदार सुरेश ने कहा, “योगी जी आए तो भगवान भी भीतर चले जाते हैं।”

सब हँसते-हँसते लोट-पोट हो गए।

7. समाज की समस्याएँ

गाँव में एक दिन खबर आई — किसी महिला को उसके पति ने मारा। प्रधान जी ने कहा, “किसकी मजाल थी कि हाथ भी लगाता तुझे, लक्ष्मण रेखा के पार नहीं जाती तू।”

दादी कमला ने कहा, “मम्मी-पापा की पसंद का वर ढूंढा होता, तो यूं मार नहीं खाती तू।”

चौपाल में सबने ताली बजाई।

8. बुजुर्गों का महत्व

प्रधान जी बोले, “दादा-दादी का होना कितना जरूरी है। खून और पसीने की सिंचाई नहीं मिलती तो हम ऊँचाइयों तक नहीं पहुँचते।”

बबलू ने कहा, “अगर बूढ़े पेड़ ना होते, तो छोटे पौधों को छाँव नहीं मिलती।”

9. हास्य और व्यंग्य

एक दिन प्रधान जी ने कहा, “हम दो हमारे दो की नीतियों पर चलते तो दो के 10-20 या 25 नहीं मिलते।”

हवलदार सुरेश ने जोड़ा, “मट्ठा डाल देते जड़ों में जिहाद की तो आफताब इदरीस नहीं मिलते।”

चंदू बोला, “देश के दो टुकड़े ठीक से किए होते तो श्रद्धा के भी टुकड़े 35 नहीं मिलते।”

सब जोर-जोर से हँसने लगे।

10. पुलिस और जेल की कहानी

गांव में चर्चा चली — मुख्तार अंसारी और आजम खान एक ही जेल में हैं। प्रधान जी बोले, “एक महीने तक एक ही बैरक में बंद कर दो, रात भर चिल्लाएँगे।”

हवलदार सुरेश बोला, “रात भर उछले कूदे, सुबह रिजल्ट आया, अखिलेश हार गया। दोनों ने अपनी-अपनी चटाई उठाई और बुढ़ापा वहीं काटने लगे।”

सबने ताली बजाई।

11. बाबाओं की कृपा

गांव में एक बाबा आए। पंजाब की एक महिला बोली, “मेरा पति रात दिन चीखता था, अब शांत हो गया।”

बाबा ने पूछा, “अब क्या हुआ?” महिला बोली, “कल उनका तेरहवाँ है।”

एक और महिला बोली, “मेरे पति को नौकरी से निकाल दिया।”

मुंबई से एक युवक बोला, “बाबा, मेरी गर्लफ्रेंड दिल्ली में है, मैं मुंबई में। अब मुझे यहीं पर गर्लफ्रेंड मिल गई।”

सबने जोरदार तालियाँ बजाई।

12. अंत और संदेश

प्रधान जी ने चौपाल में कहा, “देश जोड़ने की बात करो, बुरा मत करो।”

बबलू ने कहा, “पाकिस्तान में बाढ़ आई, वहाँ आटा गीला हो गया, अब लीटर से आटा बिक रहा है।”

हवलदार सुरेश ने कहा, “मुख्तार अंसारी और आजम खान एक ही जेल में, रात भर चिल्लाए, सुबह हार गए।”

दादी कमला ने कहा, “बेटा, जीवन में प्रेम, हँसी और एकता जरूरी है।”

सबने भारत माता की जय बोली, ताली बजाई, और चौपाल खत्म हुई।

कहानी का संदेश:
राजनीति, समाज, परिवार, पुलिस, धर्म — सबकी अपनी समस्याएँ हैं, लेकिन हँसी, व्यंग्य, प्रेम और एकता से जीवन आसान हो जाता है। योगी जी या प्रधानमंत्री आएं, भगवान भी डरें या मुस्कुराएँ, आम आदमी को अपने जीवन में सच्चाई, प्रेम और हिम्मत बनाए रखना चाहिए।