पुनर्जन्म | दो 6 साल के बच्चे निकले पति पत्नी दोनों बच्चों ने बताई अपने पिछले जन्म की कहानी..?

पुनर्जन्म की कहानी – जब आत्माएं लौट आईं, सच और न्याय का अद्भुत सफर

शुरुआत – दो गांव, दो जन्म

साल 2005, उत्तर प्रदेश के दो गांव – सूरजपुर और रामपुर। सूरजपुर में चौधरी हरनाम सिंह के घर बेटे सोनू का जन्म हुआ। उसी वक्त 50 किलोमीटर दूर रामपुर में स्कूल मास्टर दीनाना शर्मा के घर बेटी पायल ने जन्म लिया। दोनों बच्चों के जन्म में कुछ खास नहीं था, सिवाय इसके कि दोनों ने रोने की बजाय एक गहरी शांत सांस ली थी। जैसे किसी लंबे सफर से लौटे हों।

जैसे-जैसे सोनू और पायल बड़े हुए, उनकी असामान्यताएं सामने आने लगीं। वे मिट्टी में नहीं खेलते थे, ना ही शरारतें करते थे। उनकी आंखों में गहराई थी, जैसे 6 साल के बच्चे नहीं बल्कि कई जन्मों की आत्मा हो।

सोनू अक्सर अपनी मां से पूछता, “मां, हमारे खेत कहां हैं? वो झूला कहां है जिस पर राधा झूलती थी?”
पायल अपनी मां से पूछती, “मां, क्या हमारा एक बेटा भी था? मुझे उसकी बहुत याद आती है।”

दोनों बच्चों को बार-बार एक ही सपना आता – एक खूबसूरत घर, आम का पेड़, लकड़ी का झूला, खेत, कुआं, और एक यंग जोड़ा, जो एक छोटे बच्चे को स्कूल भेजता है। फिर अचानक सब कुछ आग और धुएं में बदल जाता है। दोनों बच्चे चीखते हुए नींद से जाग जाते।

रहस्य गहराता है

परिवार परेशान थे। डॉक्टर, पंडित, झाड़-फूंक – सब करवा लिया, कोई फायदा नहीं। दोनों बच्चों की बातें दिन-ब-दिन अजीब होती जा रही थीं। वे ऐसे लोगों के नाम लेते थे, जिनका गांव में कोई नहीं जानता था। ऐसी जगहों का जिक्र करते थे, जो आसपास कहीं नहीं थीं।

समय बीता। मास्टर दीनाना का तबादला सूरजपुर के पास के कस्बे के स्कूल में हो गया। यह वही स्कूल था, जिसमें सोनू पढ़ता था। परिवार ने रामपुर छोड़ दिया, एक नई जिंदगी की उम्मीद के साथ।

स्कूल के पहले दिन, पायल अपने पिता के साथ स्कूल पहुंची। क्लास में सब बच्चों ने अपना परिचय दिया। जब पायल की बारी आई, वह बोली, “मेरा नाम पायल है।”
तभी क्लास के आखिरी बेंच पर बैठे सोनू अचानक खड़ा हो गया। उसकी आंखें फटी रह गईं। मुंह से निकला – “राधा!”

पूरी क्लास में सन्नाटा छा गया। टीचर ने सोनू को डांटकर बिठाना चाहा, लेकिन वह बस पायल को देखता रहा। पायल भी सोनू को देखकर जैसे यादों के सैलाब में बह गई। वह सपना, झूला, खेत, घर – सब उसकी आंखों के सामने घूमने लगा। कांपती आवाज में बोली – “राम…”

दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामा और आंसू बहने लगे। टीचर, बच्चे, सब हैरान – पहली मुलाकात में ऐसा भावुक मिलन? स्कूल में हंगामा मच गया। माता-पिता को बुलाया गया। दोनों बच्चों ने कहा – “हम सोनू और पायल नहीं हैं। मैं राम हूं और यह मेरी पत्नी राधा है। हम 20 साल पहले मर गए थे, अब फिर से जन्म लिया है।”

पिछला जन्म – अधूरी कहानी

दोनों बच्चों ने अपने पिछले जन्म की कहानी सुनाई –
केशवगढ़ गांव, राम (सोनू) मेहनती किसान, राधा (पायल) उसकी पत्नी। 10 बीघा जमीन, आम का पेड़, झूला, प्यारा सा घर। गांव के सरपंच, हकीम, पंडित – सबके नाम तक याद थे। शादी की बातें, हलवा में नमक डालना, बारिश में जलेबी लाना – सबकुछ।

मास्टर दीनाना ने केशवगढ़ गांव के बारे में पता लगाया। पुराने रिकॉर्ड में पाया – सच में वहां राम और राधा नाम का दंपति रहता था, जिनकी एक रहस्यमयी आग दुर्घटना में मौत हो गई थी। खबर जंगल की आग की तरह फैल गई। छ साल के बच्चों को याद है पिछला जन्म!

मीडिया और पुलिस – सच की तलाश

तेजतर्रार रिपोर्टर आकाश वर्मा ने बच्चों का इंटरव्यू लिया। उन्होंने आत्मविश्वास से सब बताया – घर, खेत, गाय गौरी, बेटा रोहित। लेकिन मौत का कारण याद नहीं था, बस आग और धुआं।

आकाश ने रिपोर्ट में लिखा – “क्या ये सच में पुनर्जन्म है या साजिश?”
रिपोर्ट नेशनल टीवी पर चली, पूरे देश में चर्चा। केस पुलिस अफसर एसपी अनन्य सिंह को सौंपा गया। वे तर्क और सबूत में विश्वास रखती थीं। शुरू में उन्हें लगा – “बकवास है।” लेकिन बच्चों की आंखों में सच्चाई और दर्द देखकर उनका शक यकीन में बदल गया।

जांच – यादों का सफर

एसपी अनन्य ने दोनों बच्चों से अलग-अलग पूछताछ की। हर सवाल का जवाब एक जैसा, हर इमोशन, हर छोटी-बड़ी बात एकदम सटीक। मौत का कारण नहीं पता – बस आग, धुआं, अंधेरा।

अनन्य ने फैसला किया – “बच्चों को केशवगढ़ लेकर जाऊंगी। अगर यादें सच्ची हैं, तो वहां कुछ और याद आएगा।”

पुलिस का काफिला केशवगढ़ पहुंचा। सोनू और पायल रास्ते, पेड़, गली पहचानने लगे। पुराने घर के खंडहर में पहुंचे – आम के पेड़ की मोटी डाल, झूले की रस्सी, काली जमीन, सब पहचान लिया।

सच सामने आया – हत्या का राज

घर के खंडहर में सोनू और पायल को सब याद आने लगा। सोनू चिल्लाया – “भैया श्याम!”
पायल – “सिलेंडर, गैस सिलेंडर!”
यादें जुड़ गईं –
रोहित स्कूल गया था, श्याम भैया घर आए, जमीन के लिए झगड़ा, धक्कामुक्की, रसोई से गैस सिलेंडर लाकर नोब खोलना, दरवाजा बंद करना, माचिस की तीली जलाकर खिड़की से अंदर फेंकना… दोनों को जिंदा जला दिया गया।

अनन्य ने जांच की – 20 साल पुरानी फाइल में हादसा लिखा था, असल में हत्या थी। श्याम अब शहर में बड़ा बिजनेसमैन था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।

बेटे की तलाश – सबसे मुश्किल परीक्षा

सोनू और पायल अपने बेटे रोहित के लिए लौटे थे। पुलिस ने रोहित को ढूंढा – वह 26 साल का, प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। अपने चाचा श्याम को सबकुछ मानता था, असलियत नहीं जानता था।

मुलाकात हुई, रोहित ने सबको फ्रॉड कहा, नाटक कहा। “सबूत क्या है?”
पायल ने कहा – “तुम्हारी दाएं कलाई पर जन्म का निशान, जिसे सिर्फ तुम्हारे मां-बाप जानते थे।”
और – “घर के आंगन वाले कमरे में दीवार की ढीली ईंट के पीछे चांदी की पायल छुपी थी।”

रोहित घर भागा, दीवार की ईंट निकाली, कपड़े में लिपटी पायल मिली। उसका सब्र टूट गया, फूट-फूट कर रोने लगा। सोनू, पायल और रोहित – तीनों लिपट कर रो पड़े। 20 साल का दर्द बह निकला।

नई शुरुआत – रिश्तों का नया रूप

धीरे-धीरे सोनू और पायल की पिछले जन्म की यादें धुंधली पड़ने लगीं। वे बच्चों की तरह खेलने लगे। रोहित ने अपनी प्रेमिका प्रिया को सब सच बताया। प्रिया ने रोहित का हाथ थाम लिया। शादी हुई। अब परिवार पूरा था – पति-पत्नी अपने ही माता-पिता के बाल रूप की परवरिश कर रहे थे।

सोनू और पायल अब सिर्फ बच्चे थे। रोहित और प्रिया उन्हें दुनिया की हर खुशी देना चाहते थे। पुराने घर के आंगन में आम के पेड़ की डाल पर नया झूला डाल दिया गया। सोनू और पायल उस पर झूलते, रोहित और प्रिया उन्हें खिलखिलाते।

यह परिवार हर नियम से परे था, लेकिन प्यार के सबसे सच्चे नियम पर आधारित था।

सीख और सवाल

यह कहानी बताती है –

प्यार, आत्मा और रिश्ते उम्र या शरीर के मोहताज नहीं होते
लालच, धोखा और अन्याय का अंत हमेशा होता है
सच और न्याय कभी हारते नहीं
परिवार, ममता और माफी – यही असली जीत है

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