पालतू बिल्ली की वजह से पूरे परिवार के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/
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एक बेजुबान का प्रेम और काल का ग्रास: अमानपुर की वह रूह कंपा देने वाली दास्तां
अध्याय 1: वाराणसी का वह शांत गाँव और राजकुमार का परिवार
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले का अमानपुर गाँव अपनी हरियाली और शांति के लिए जाना जाता था। यहाँ राजकुमार नाम का एक समृद्ध किसान रहता था। राजकुमार के पास लगभग 16 एकड़ उपजाऊ जमीन थी, और उसकी मेहनत का फल उसके लहलहाते खेतों में साफ दिखाई देता था। राजकुमार का जीवन उसकी इकलौती बेटी रेनू के इर्द-गिर्द घूमता था।
रेनू शहर के एक कॉलेज में बीए फाइनल ईयर की छात्रा थी। वह पढ़ाई में जितनी होनहार थी, उसका दिल उतना ही कोमल था। उसे बचपन से ही बेजुबान जानवरों से गहरा लगाव था। घर में कोई भी घायल पक्षी या कुत्ता दिखता, तो वह उसे उठाकर ले आती और उसकी सेवा में जुट जाती।
राजकुमार अक्सर उसे टोकता था, “बेटी, जानवरों से प्यार करना बुरा नहीं है, पर याद रखना, वे अपनी प्रकृति नहीं बदल सकते। कभी-कभी उनका अनजाना व्यवहार भी हमारे लिए जानलेवा हो सकता है।” लेकिन रेनू इन बातों को मुस्कुराहट में टाल दिया करती थी।

अध्याय 2: वह पहली दुर्घटना और अपराधबोध का बोझ
एक सुबह जब रेनू अपनी स्कूटी से कॉलेज जा रही थी, अचानक एक छोटा सा पिल्ला सड़क पार करते हुए उसकी स्कूटी के सामने आ गया। रेनू ने ब्रेक लगाए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। स्कूटी पिल्ले के ऊपर से गुजर गई। रेनू उस घायल जीव को घर ले आई, रात-दिन उसकी सेवा की, लेकिन चार दिनों के बाद उस पिल्ले ने दम तोड़ दिया।
इस घटना ने रेनू को अंदर तक तोड़ दिया। उसे लगा जैसे उसने किसी की जान ली है। वह हफ्तों तक उदास रही। उसे सामान्य करने के लिए राजकुमार ने उसे बहुत समझाया, और धीरे-धीरे रेनू फिर से अपनी सामान्य दिनचर्या में लौटने लगी।
अध्याय 3: 16 जुलाई 2025: बिल्ली का आगमन
जुलाई की वह सुबह उमस भरी थी। रेनू अपने बगीचे में पौधों को पानी दे रही थी, तभी उसकी नजर एक झाड़ी के पीछे पड़ी। वहाँ एक सफेद और भूरे रंग की बिल्ली घायल अवस्था में पड़ी थी। उसके शरीर पर गहरे घाव थे। रेनू का पुराना डर और ममता फिर से जाग उठी। उसने उस बिल्ली को उठाया, घर के अंदर लाई और उसे प्राथमिक उपचार दिया।
धीरे-धीरे वह बिल्ली ठीक होने लगी। रेनू उसे समय पर दूध और खाना देती थी। वह बिल्ली अब रेनू की सबसे अच्छी दोस्त बन चुकी थी। राजकुमार भी अब उस बिल्ली के साथ खेलने लगा था। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह ममता एक दिन मौत का वारंट बन जाएगी।
अध्याय 4: पवन का प्रवेश और खुशियों की शहनाई
इसी दौरान रेनू की मुलाकात कॉलेज में पवन नाम के एक लड़के से हुई। पवन एक सुलझा हुआ और मेहनती युवक था। दोनों के बीच प्यार पनपा और बात शादी तक पहुँच गई। राजकुमार ने जब पवन के परिवार से मुलाकात की, तो उसे रिश्ता पसंद आ गया। पवन के पिता, ईशम सिंह, थोड़े सख्त स्वभाव के थे और जानवरों से दूरी बनाए रखते थे, लेकिन अपने बेटे की खुशी के लिए वे इस शादी के लिए मान गए।
24 अगस्त 2025 को धूमधाम से दोनों की शादी हुई। रेनू जब विदा होकर पवन के घर गई, तो वह अपनी प्यारी बिल्ली को भी साथ ले गई। ईशम सिंह को यह बात शुरू में पसंद नहीं आई, लेकिन बहू के प्रेम को देखते हुए उन्होंने कुछ नहीं कहा।
अध्याय 5: काल का प्रहार: वह घातक कुत्ता
शादी के कुछ दिनों बाद, वह बिल्ली एक दिन घर से बाहर निकल गई। गली में एक आवारा कुत्ता घूम रहा था, जो पागल सा लग रहा था। उस कुत्ते ने बिल्ली की गर्दन पर बुरी तरह काट लिया। बिल्ली जैसे-तैसे बचकर घर वापस आ गई। रेनू ने देखा कि बिल्ली घायल है, उसने फिर से उसका इलाज किया। लेकिन वह यह नहीं जानती थी कि उस कुत्ते के काटने से बिल्ली के शरीर में रैबीज (Rabies) का वायरस प्रवेश कर चुका था।
अध्याय 6: पहली घटना: ससुर ईशम सिंह पर हमला
कुछ दिनों बाद, ईशम सिंह दोपहर को खेत से लौटकर आए और खाना माँगने लगे। बिल्ली पास में ही बैठी थी। ईशम सिंह ने प्यार से अपने खाने का एक टुकड़ा बिल्ली की तरफ बढ़ाया। लेकिन बिल्ली, जो अब रैबीज के असर में थी, अचानक हिंसक हो गई। उसने खाना खाने के बजाय ईशम सिंह के हाथ पर बुरी तरह झपट्टा मारा और काट लिया।
ईशम सिंह ने इसे सामान्य चोट समझकर साबुन से हाथ धो लिया और बात टाल दी। उन्होंने डॉक्टर के पास जाकर इंजेक्शन लगवाना जरूरी नहीं समझा।
अध्याय 7: दूसरी घटना: पति पवन पर हमला
दो-तीन दिन बाद, पवन भी खाना खा रहा था जब बिल्ली ने उसके कंधे पर काट लिया। पवन ने गुस्से में बिल्ली की पिटाई कर दी, लेकिन रेनू ने फिर से बिल्ली का बचाव किया। उसने कहा, “आप लोग उसे प्यार नहीं करते, इसलिए वह चिढ़ रही है।” यहाँ तक कि पवन ने भी अपने पिता की तरह डॉक्टर के पास जाना जरूरी नहीं समझा।
अध्याय 8: 4 सितंबर 2025: मौत का तांडव शुरू
शादी की खुशियाँ अभी कम भी नहीं हुई थीं कि ईशम सिंह की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। एक शादी समारोह के दौरान उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई और उनकी धड़कनें तेज हो गईं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों ने जब उनका चेकअप किया, तो वे हैरान रह गए। ईशम सिंह को पानी देखने से डर लग रहा था (Hydrophobia), जो रैबीज का अंतिम चरण है। जब डॉक्टरों ने पवन से पूछा, तो उसने बिल्ली के काटने की बात बताई। डॉक्टरों ने जवाब दिया, “अब बहुत देर हो चुकी है। रैबीज का असर दिमाग तक पहुँच गया है।” कुछ ही घंटों में ईशम सिंह ने दम तोड़ दिया।
अध्याय 9: पवन की तड़प और परिवार का अंत
अभी पिता की चिता की राख भी ठंडी नहीं हुई थी कि पवन के अंदर भी वही लक्षण दिखने लगे। वह पागलों की तरह व्यवहार करने लगा, उसे रोशनी और पानी से डर लगने लगा। रेनू बदहवास होकर उसे दिल्ली के बड़े अस्पतालों में ले गई। डॉक्टरों ने बहुत कोशिश की, लेकिन रैबीज का कोई इलाज नहीं था जब तक कि लक्षण दिखने शुरू न हो जाएं।
28 सितंबर 2025 की सुबह, पवन ने भी रेनू की बाहों में दम तोड़ दिया। एक महीने के भीतर, रेनू का पूरा संसार उजड़ गया। वह बिल्ली, जिसे उसने जान देकर बचाया था, उसी ने उसके सुहाग और ससुर को छीन लिया था।
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