Dharmendra & Hema Malini Love Story | Unknown Facts & Biography (Hindi)
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी: एक प्रेम कहानी जो विवादों में घिरी
प्रारंभ
बॉलीवुड में प्रेम कहानियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन जब बात रियल लाइफ की केमिस्ट्री की आती है, तो कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं जो समाज, परिवार और व्यक्तिगत संघर्षों से भरी होती हैं। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की प्रेम कहानी भी ऐसी ही एक कहानी है, जिसने 70 के दशक में पूरे हिंदुस्तान को चौंका दिया था। यह कहानी केवल प्यार की नहीं, बल्कि एक शादीशुदा मर्द और एक सुपरस्टार हीरोइन के बीच के जटिल रिश्तों की है।
प्रेम कहानी की शुरुआत
धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के फरीदकोट में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1960 के दशक में की और जल्द ही बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में से एक बन गए। दूसरी ओर, हेमा मालिनी का जन्म 16 अक्टूबर 1948 को तमिलनाडु में हुआ था। वह एक प्रसिद्ध नृत्यांगना और अभिनेत्री थीं, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1960 के दशक में की।
धर्मेंद्र की शादी 1954 में प्रकाश कौर से हुई थी, और उनके चार बच्चे भी थे। जब धर्मेंद्र मुंबई आए और स्टार बने, तब तक वह एक शादीशुदा व्यक्ति थे। दूसरी ओर, हेमा मालिनी की दुनिया पूरी तरह से अलग थी।
पहली मुलाकात
साल था 1970, जब धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की पहली मुलाकात फिल्म “तुम हसीन मैं जवान” के सेट पर हुई। यह वही फिल्म थी, जिसने दोनों के बीच की केमिस्ट्री को जन्म दिया। धर्मेंद्र को हेमा की खूबसूरती और उनके संकोची स्वभाव ने पहली ही नजर में दीवाना बना दिया। कहा जाता है कि शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र कैमरामैन को चुपके से पैसे दिया करते थे ताकि रोमांटिक सीन के रीटेक बार-बार हो सकें, जिससे उन्हें हेमा के साथ अधिक समय बिताने का मौका मिले।

प्यार की जटिलताएँ
धीरे-धीरे, हेमा भी धर्मेंद्र के प्रति आकर्षित होने लगीं। लेकिन यह प्यार आसान नहीं था। सबसे बड़ी दीवार थी हेमा के पिता, जो उनके रिश्ते के खिलाफ थे। वे सख्त थे कि उनकी बेटी एक शादीशुदा आदमी से न मिले। अक्सर शूटिंग पर हेमा के परिवार का कोई सदस्य मौजूद रहता था, ताकि धर्मेंद्र उनके करीब न आ सकें।
संजीव कुमार और जितेंद्र का एंट्री
इस कहानी में ट्विस्ट तब आया जब दो और सुपरस्टार्स, संजीव कुमार और जितेंद्र, की एंट्री हुई। संजीव कुमार, जो हेमा को बेहद पसंद करते थे, ने उन्हें प्रपोज किया, लेकिन हेमा ने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया। इसके बाद, हेमा के परिवार ने तय किया कि उनकी शादी जितेंद्र से कर दी जाए। 1974 में हेमा और जितेंद्र की शादी तय हो गई, और परिवार उन्हें लेकर चेन्नई (तब मद्रास) चले गए।
धर्मेंद्र का कदम
जब यह खबर धर्मेंद्र को मिली, तो वह आगबुला हो गए। उन्होंने सीधे जितेंद्र की गर्लफ्रेंड शोभा कपूर को लेकर मद्रास की फ्लाइट में बैठ गए। वहां पहुंचकर धर्मेंद्र ने हेमा के सामने हाथ-पैर जोड़कर मिन्नतें कीं कि वह यह शादी न करें। आखिरकार, हेमा का प्यार जीत गया और जितेंद्र के साथ उनकी शादी टूट गई।
कानूनी अड़चनें
हेमा तो मान गईं, लेकिन अब सवाल था धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर का। हिंदू मैरिज एक्ट के तहत पहली पत्नी को तलाक दिए बिना धर्मेंद्र दूसरी शादी नहीं कर सकते थे। प्रकाश कौर ने तलाक देने से साफ इंकार कर दिया था। लेकिन धर्मेंद्र ने हेमा को अपना बनाने के लिए एक विवादित रास्ता अपनाया।
धर्म परिवर्तन
वकीलों ने धर्मेंद्र को एक ऐसा रास्ता दिखाया जो बेहद विवादित था: धर्म परिवर्तन। इस्लाम धर्म में एक पुरुष को एक से ज्यादा शादियों की इजाजत है। रिपोर्ट्स के अनुसार, धर्मेंद्र और हेमा ने इस्लाम कबूल किया। इसी वजह से उनके नाम बदले गए। धर्मेंद्र बने दिलावर खान और हेमा बनीं आयशा।
21 अगस्त 1979 को गुपचुप तरीके से उनका निकाह हुआ। इसमें ₹11,000 की मेहर तय की गई थी। यह सब इसलिए किया गया ताकि उनकी शादी को कानूनी मान्यता मिल सके और धर्मेंद्र पर कोई पुलिस केस न हो। हालांकि, इस निकाह को उन्होंने दुनिया से छिपा कर रखा।
समाज का सामना
धर्मेंद्र और हेमा की शादी तो हो गई, लेकिन असली इम्तिहान अब शुरू हुआ। हेमा, जो देश की ड्रीम गर्ल थीं, को अचानक दूसरी औरत और घर तोड़ने वाली के रूप में ताने सुनने पड़े। समाज ने उन पर उंगलियां उठाईं, लेकिन इस नाजुक वक्त में हेमा ने गजब की समझदारी दिखाई। उन्होंने तय किया कि वह धर्मेंद्र को उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर और बच्चों से कभी अलग नहीं करेंगी।
पारिवारिक जिम्मेदारियाँ
धर्मेंद्र ने भी रियल लाइफ में एक मुश्किल डबल रोल निभाया। वह दिन में अपने पहले परिवार और बच्चों, सनी और बॉबी के साथ वक्त बिताते और शाम को हेमा के पास आते। उन्होंने दोनों परिवारों की जिम्मेदारियां बखूबी उठाई।
प्रकाश कौर का त्याग
इस कहानी में सबसे बड़ा त्याग प्रकाश कौर का था। उन्होंने अपने पति के बदलने का दर्द सहा लेकिन अपने बच्चों की खातिर खामोश रहीं। एक दुर्लभ इंटरव्यू में प्रकाश कौर ने कहा था, “धर्मेंद्र भले ही एक वफादार पति साबित न हुए हों, लेकिन वह दुनिया के सबसे अच्छे पिता जरूर हैं।” यह एक लाइन उस महिला के बड़े दिल और गहरे दर्द दोनों को बयान करती है।
समय का पहिया
आज 40 साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है। धर्मेंद्र और हेमा की जोड़ी तमाम तूफानों के बावजूद आज भी चट्टान की तरह मजबूत है। उनकी दो बेटियां, ईशा और अहाना, ने दोनों के रिश्ते को और गहरा कर दिया है। सनी और बॉबी देओल भी आज अपने पिता के इस फैसले के साथ शांति से जी रहे हैं। भले ही दोनों परिवार सार्वजनिक रूप से कम मिलते हों, लेकिन उनके बीच का बंधन आज भी मजबूत है।
निष्कर्ष
धर्मेंद्र और हेमा की कहानी साबित करती है कि प्यार अंधा होता है। वह ना कानून देखता है, ना समाज और ना ही कोई दीवार। उन्होंने जो किया, वह सही था या गलत, इसका फैसला दुनिया करती रहेगी, लेकिन उन्होंने एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ा। यह थी बॉलीवुड की सबसे विवादित मगर सबसे असली लव स्टोरी।
दोस्तों, आपको क्या लगता है? क्या प्यार पाने के लिए धर्मेंद्र का तरीका सही था या प्रकाश कौर के साथ नाइंसाफी हुई? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें। अगर आपको यह लेख पसंद आया, तो इसे शेयर करें और ऐसे ही अनसुने किस्सों के लिए हमें फॉलो करें।
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