हाई कोर्ट की जज निकली IIT BABA की पत्नी? सबके उड़े होशHigh Court Judge Turns Out to Be IIT Baba Wife

आईआईटी बाबा और जज पत्नी: सन्यास से गृहस्थी तक का महासफर

प्रस्तावना: एक आधुनिक रहस्य का उदय

भारत की पावन भूमि पर अध्यात्म और विज्ञान का संगम हमेशा से ही कौतूहल का विषय रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में ‘आईआईटी बाबा’ (IIT Baba) के नाम से विख्यात हुए अभय सिंह की कहानी ने न केवल सोशल मीडिया पर आग लगा दी है, बल्कि परंपरा और आधुनिकता के बीच की लकीरों को भी धुंधला कर दिया है। इस कहानी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब एक सन्यासी, जिसने श्मशान की राख को अपना गहना माना था, एक ऐसी महिला के साथ विवाह के बंधन में बंध गया जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि वह हाईकोर्ट की जज हैं।

क्या एक जज पत्नी अपने सन्यासी पति को समाज के तानों से न्याय दिला पाएगी? क्या यह विवाह केवल दो दिलों का मिलन है या इसके पीछे कोई बहुत बड़ा विजन छिपा है?

अध्याय १: झज्जर से आईआईटी बॉम्बे तक का सफर

इस महागाथा की शुरुआत हरियाणा के झज्जर जिले के एक साधारण से परिवार में होती है। अभय सिंह का जन्म एक ऐसी पृष्ठभूमि में हुआ था जहाँ शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार माना जाता था। उनके पिता, कर्ण सिंह, पेशे से एक सम्मानित वकील हैं। बचपन से ही अभय की बुद्धि बहुत प्रखर थी। उनके तर्कों के सामने बड़े-बड़े निरुत्तर हो जाते थे।

साल २००८ में जब अभय ने आईआईटी-जेईई (IIT-JEE) की कठिन परीक्षा में पूरे भारत में ७३१वीं रैंक हासिल की, तो पूरे झज्जर में मिठाइयां बांटी गईं। उनका चयन देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान ‘आईआईटी बॉम्बे’ (IIT Bombay) में हुआ। यहाँ से उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। वह एक ऐसे छात्र थे जो विमानों के इंजन और अंतरिक्ष की गहराइयों के गणित में डूबे रहते थे।

अध्याय २: कनाडा का ऐश्वर्य और वैराग्य की पुकार

आईआईटी से स्नातक होने के बाद, अभय सिंह के लिए दुनिया के दरवाजे खुल गए थे। उन्हें विमान बनाने वाली दुनिया की सबसे दिग्गज कंपनियों में से एक ‘बॉम्बार्डियर’ (Bombardier) में एक शानदार नौकरी मिली। उनका ठिकाना अब कनाडा था। लाखों का पैकेज, आलीशान घर, महंगी गाड़ियां और वह सब कुछ जो एक युवा का सपना होता है, अभय के पास था।

लेकिन कहते हैं कि नियति को कुछ और ही मंजूर था। कनाडा की चकाचौंध के बीच भी अभय का मन अशांत रहने लगा। वह अक्सर सोचते थे कि क्या जीवन का अर्थ केवल बेहतर मशीनें बनाना और डॉलर कमाना ही है? इसी उधेड़बुन के बीच उन्होंने भारतीय दर्शन और सनातन धर्म की गहराई को खंगालना शुरू किया।

एक दिन अचानक, उन्होंने अपनी करोड़ों की नौकरी को लात मार दी, अपना सारा सामान दान किया और वापस भारत लौट आए। जब वह झज्जर पहुंचे, तो उनके परिवार को लगा कि वह कुछ दिनों की छुट्टी पर आए हैं, लेकिन अभय तो संसार को ही छुट्टी देने का मन बना चुके थे।

अध्याय ३: महाकुंभ, जूना अखाड़ा और विवादों का साया

भारत लौटने के बाद अभय सिंह ने सन्यास की कठिन राह चुनी। उन्होंने प्रयागराज के महाकुंभ में ‘जूना अखाड़े’ से दीक्षा ली। एक एयरोस्पेस इंजीनियर अब ‘नागा साधु’ बन चुका था। शरीर पर भस्म, गले में रुद्राक्ष की माला और माथे पर तिलक। इंटरनेट पर उनकी तस्वीरें वायरल होने लगीं और उन्हें नाम मिला— ‘आईआईटी बाबा’।

अखाड़े में रहते हुए अभय सिंह ने अपने तार्किक ज्ञान और सनातन धर्म का ऐसा मेल प्रस्तुत किया कि बड़े-बड़े विद्वान हैरान रह गए। हालाँकि, उनका क्रांतिकारी स्वभाव और अखाड़े के कुछ पुराने नियमों पर उनके तार्किक सवाल अखाड़े के वरिष्ठों को रास नहीं आए। एक समय ऐसा आया जब उन्हें जूना अखाड़े से बाहर कर दिया गया।

यह अभय सिंह के जीवन का एक कठिन दौर था। एक तरफ समाज उन्हें ‘पाखंडी’ कह रहा था, तो दूसरी तरफ धर्म के रक्षक उन्हें अपनाने को तैयार नहीं थे। इसी बीच उनकी जिंदगी में प्रतीिका का आगमन हुआ।

अध्याय ४: प्रतीिका: वह रहस्यमयी चेहरा

जब फरवरी २०२६ में अभय सिंह की शादी की तस्वीरें सामने आईं, तो दुनिया स्तब्ध रह गई। जिस व्यक्ति ने वैराग्य की कसम खाई थी, वह एक अत्यंत शालीन और सुंदर महिला के साथ अग्नि के फेरे ले रहा था। यह महिला थीं प्रतीिका।

प्रतीिका के बारे में जैसे ही खबरें फैलनी शुरू हुईं, दावों का बाजार गर्म हो गया। इंटरनेट पर तीन बड़े दावे सामने आए: १. पहला दावा: वह कर्नाटक की एक बेहद सफल सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट हैं। २. दूसरा दावा: वह भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए मिसाइल टेक्नोलॉजी और डिफेंस सिस्टम पर काम करने वाली एक सीनियर इंजीनियर हैं। ३. तीसरा और सबसे बड़ा खुलासा: वह हाईकोर्ट की जज हैं या न्यायिक सेवाओं के एक बहुत बड़े पद पर तैनात हैं।

हालाँकि, आधिकारिक रूप से इन दावों की पुष्टि अभी तक नहीं की गई है, लेकिन प्रतीिका की प्रोफेशनल डिग्निटी और उनका शांत स्वभाव इस बात की गवाही देता है कि वह कोई साधारण महिला नहीं हैं। एक तरफ वो इंसान जिसने मोह-माया त्याग दी थी और दूसरी तरफ वो महिला जो कानून और न्याय की रक्षक है—इन दोनों का मिलन किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगता।

अध्याय ५: पहली मुलाकात और तर्कों का मिलन

अक्सर लोग पूछते हैं कि एक सन्यासी और एक हाई-प्रोफाइल प्रोफेशनल महिला के बीच प्यार कैसे हो सकता है? एक इंटरव्यू में प्रतीिका ने इशारा दिया था कि उनकी मुलाकात कर्नाटक में एक आध्यात्मिक चर्चा के दौरान हुई थी।

प्रतीिका खुद एक उच्च शिक्षित इंजीनियर हैं। उन्हें अभय सिंह का ‘आईआईटी वाला लॉजिक’ भा गया। अभय धर्म को अंधविश्वास की तरह नहीं, बल्कि विज्ञान की तरह समझाते थे। उन्होंने प्रतीिका को बताया कि सन्यास का अर्थ संसार से भागना नहीं, बल्कि संसार में रहकर उसके बंधनों से मुक्त होना है।

प्रतीिका के लिए अभय केवल एक बाबा नहीं थे, बल्कि एक ऐसे विजनरी (Visionary) पुरुष थे जो देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहते थे। अभय सिंह ने प्रतीिका के सामने अपना सबसे बड़ा सपना रखा— ‘सनातन यूनिवर्सिटी’ का निर्माण।

अध्याय ६: सनातन यूनिवर्सिटी: एक साझा विजन

अभय सिंह अक्सर कहते हैं, “मैं एक ऐसी यूनिवर्सिटी बनाना चाहता हूं जहाँ एक हाथ में आधुनिक विज्ञान (जैसे क्वांटम फिजिक्स और एयरोस्पेस) हो और दूसरे हाथ में प्राचीन उपनिषद और वेद हों।”

इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए उन्हें एक ऐसे साथी की जरूरत थी जो न केवल उनके विचारों को समझे, बल्कि उसे प्रशासनिक और तकनीकी रूप से क्रियान्वित भी कर सके। प्रतीिका का पद और उनकी पावर इस बड़े प्रोजेक्ट में एक ढाल का काम कर सकती है।

यही वह बिंदु है जहाँ लोग प्रतीिका को जज मानने लगे। उनके पिता कर्ण सिंह खुद वकील हैं, और जब अभय पहली बार अपनी पत्नी के साथ अपने पिता के चैंबर पहुंचे, तो वहां का माहौल देखने लायक था। वकीलों के बीच घिरी प्रतीिका की गरिमा ने सबको यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वह वाकई कानून की दुनिया का एक चमकता सितारा हैं?

अध्याय ७: समाज के सवाल और सन्यास बनाम गृहस्थी

शादी की खबर के बाद अभय सिंह को भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। लोगों ने कहा, “यह सब पब्लिसिटी स्टंट था।” कुछ ने कहा, “बाबा ने सन्यास का अपमान किया है।”

लेकिन अभय सिंह ने बहुत ही तार्किक तरीके से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य से लेकर भगवान राम तक, हमारे धर्म में गृहस्थ रहकर भी अध्यात्म की पराकाष्ठा को प्राप्त करने के उदाहरण मौजूद हैं। उन्होंने कोर्ट मैरिज करके यह संदेश दिया कि वह देश के कानून का उतना ही सम्मान करते हैं जितना अपने धर्म का।

प्रतीिका ने भी इस पूरे विवाद के दौरान अपनी गरिमा बनाए रखी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कोई सफाई नहीं दी, बल्कि अपने काम और अपनी सादगी से सबका मुंह बंद कर दिया। उनकी सादगी ऐसी है कि करोड़ों की संपत्ति और पावर होने के बावजूद वह हिमालय की वादियों में एक साधारण साड़ी में अभय के साथ महादेव की पूजा करती नजर आती हैं।

अध्याय ८: क्या प्रतीिका वाकई जज हैं?

इस सवाल का जवाब अभी भी सस्पेंस (Suspense) बना हुआ है। कुछ सूत्रों का कहना है कि उनकी शैक्षणिक योग्यता उन्हें किसी भी संवैधानिक पद के लिए योग्य बनाती है। यह भी संभव है कि वह डिफेंस रिसर्च में किसी ऐसे गुप्त प्रोजेक्ट का हिस्सा हों जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, और लोगों ने उनकी पावर को देखकर उन्हें जज समझ लिया हो।

लेकिन एक बात स्पष्ट है—प्रतीिका की पहुंच कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में बहुत गहरी है। अभय सिंह के पिता के साथ उनके कानूनी विमर्श की तस्वीरें इस बात की पुष्टि करती हैं कि कानून की दुनिया से उनका नाता बहुत पुराना और मजबूत है।

अध्याय ९: सन्यास का नया चेहरा: एक आधुनिक क्रांति

अभय सिंह और प्रतीिका की जोड़ी मॉडर्न इंडिया (Modern India) की एक नई तस्वीर पेश कर रही है। यह उस भारत की कहानी है जहाँ एक आईआईटी की डिग्री रखने वाला व्यक्ति माथे पर तिलक लगाकर वेदों की बात करता है और एक हाई-प्रोफाइल महिला अपने करियर के शिखर पर होने के बावजूद एक सन्यासी का हाथ थामती है।

उन्होंने यह साबित किया है कि ज्ञान का मतलब केवल गुफाओं में बैठना नहीं है। असली ज्ञान वह है जो समाज की मुख्यधारा में रहकर लोगों के जीवन में बदलाव लाए। उनकी सनातन यूनिवर्सिटी अगर हकीकत बनती है, तो यह भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक मील का पत्थर साबित होगी।

अध्याय १०: निष्कर्ष: एक लंबा सफर अभी बाकी है

आईआईटी बाबा और उनकी रहस्यमयी पत्नी की यह दास्तां अभी खत्म नहीं हुई है। यह तो बस एक शुरुआत है। आने वाले समय में जब सनातन यूनिवर्सिटी की नींव रखी जाएगी और प्रतीिका का असली पद दुनिया के सामने आएगा, तो शायद कई और बड़े खुलासे होंगे।

अभय सिंह ने दिखाया है कि वह अपनी शर्तों पर जीना जानते हैं—चाहे वह करोड़ों का पैकेज छोड़ना हो, अखाड़े के नियमों को चुनौती देना हो या फिर सन्यास के बाद दुनिया की परवाह किए बिना अपनी पसंद की महिला से शादी करना हो।

यह कहानी हमें सिखाती है कि:

शिक्षा आपको काबिल बनाती है, लेकिन आपके फैसले आपको महान बनाते हैं।
धर्म और विज्ञान एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
प्रेम और विजन मिल जाएं, तो सन्यास और गृहस्थी के बीच की लकीर मिट जाती है।

इतिहास में ऐसी घटनाएं कम ही दर्ज होती हैं जहाँ एक इंजीनियर सन्यासी बनता है और फिर एक पावरफुल महिला से शादी करके समाज को नई दिशा देने निकल पड़ता है। अभय सिंह और प्रतीिका की यह जोड़ी आज हर घर और हर मोबाइल स्क्रीन पर चर्चा का विषय है।

भविष्य में क्या होगा? क्या वे अपने सपनों की यूनिवर्सिटी बना पाएंगे? क्या प्रतीिका की पावर उनके मिशन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी? इन सवालों के जवाब वक्त के गर्भ में छिपे हैं, पर इतना तय है कि यह सफर बहुत लंबा और रोमांचक होने वाला है।

बाकी आपका इस पूरे मामले पर क्या कहना है? क्या एक सन्यासी को शादी करनी चाहिए थी? क्या प्रतीिका की काबिलियत इस मिशन को सफल बनाएगी? अपनी राय जरूर साझा करें।

समाप्त