जिस स्कूल में तलाकशुदा पत्नी प्रिंसिपल थी उसी में बेटे का एडमिशन कराने पहुंचा पति, फिर जो हुआ.!!

नेहा की नई राह – संघर्ष, आत्मसम्मान और जीत
शुरुआत
राहुल अपने बेटे का एडमिशन करवाने एक प्राइवेट स्कूल में जाता है। वहां उसे पता चलता है कि बच्चों को पहले टेस्ट देना होता है, पास होने पर ही एडमिशन मिलता है। राहुल बेटे को टेस्ट के लिए भेजकर वेटिंग हॉल में बैठता है। तभी उसकी नजर स्कूल की प्रिंसिपल मैडम पर पड़ती है। उसे देख राहुल के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। वह छुपकर बाहर निकलने की कोशिश करता है, लेकिन प्रिंसिपल मैडम उसे देख लेती हैं और खुद भी हैरान रह जाती हैं।
आखिर क्या था इन दोनों के बीच? क्यों राहुल भागना चाहता था?
इस कहानी की शुरुआत होती है दिल्ली की एक साधारण लड़की नेहा से।
नेहा का बचपन और शादी
नेहा दिल्ली में अपने मां-बाप और दो बहनों के साथ रहती थी। वह सबसे बड़ी थी और ग्रेजुएशन कर रही थी। उसके पिता एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे। एक दिन उनके पास एक व्यक्ति आया, “आपकी बेटी के लिए मेरे पास अच्छा रिश्ता है। लड़का प्रॉपर्टी डीलिंग करता है, घर में किसी चीज की कमी नहीं है।”
नेहा के पिता ने चिंता जताई, “हम साधारण लोग हैं, दहेज कैसे देंगे?”
व्यक्ति बोला, “उन्हें दहेज की जरूरत नहीं, सिर्फ पढ़ी-लिखी, सुंदर और सुशील लड़की चाहिए।”
बात आगे बढ़ी, राहुल के परिवार ने नेहा की फोटो देखी, सब खुश हो गए। दोनों परिवारों की सहमति से शादी तय हो गई। दो महीने बाद धूमधाम से शादी हो गई।
शादी के बाद नेहा अपने ससुराल में पति राहुल और परिवार के साथ बहुत प्यार से रहने लगी। लेकिन यह प्यार ज्यादा दिन नहीं टिका।
ससुराल की सच्चाई
तीन महीने बाद ही ससुराल वाले नेहा से नौकरों की तरह बर्ताव करने लगे। गरीब परिवार का मजाक उड़ाते, दिन भर किचन और घर का काम करवाते। छोटी-सी गलती पर ताने मिलते—”तुम तो गरीब हो, कोई काम ढंग से आता ही नहीं।”
नेहा ने राहुल से शिकायत की, “तुम्हारी मां और बहन मुझे ताने मारती हैं, नौकरों की तरह काम कराती हैं।”
राहुल ने उल्टा डांटा, “तुम झोपड़पट्टी में रहती थी, हमने महल में रखा है। यहां सब काम सीखने होंगे। ज्यादा मत सोचो, चुपचाप काम करो।”
नेहा का दिल टूट गया। उसे राहुल से उम्मीद थी, लेकिन वह भी बदल गया।
मायके की सलाह और संघर्ष
नेहा ने मायके फोन किया, मां को सब बताया। मां ने समझाया, “बेटी, तीन महीने हुए हैं। धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। जब संतान होगी, सबका प्यार मिलेगा।”
नेहा ने मां की बात मान ली, सब कुछ इग्नोर करके काम में लगी रही। समय बीता, छह महीने बाद नेहा को पता चला कि वह प्रेग्नेंट है। वह बहुत खुश हुई, पति को बताया।
लेकिन राहुल ने गुस्से में कहा, “मुझे बच्चा नहीं चाहिए। मेडिसिन लो, गिरा दो।”
नेहा ने साफ मना कर दिया, “कुछ भी हो जाए, मैं बच्चे को जन्म दूंगी।”
दोनों के बीच झगड़े बढ़ने लगे। आखिरकार राहुल मजबूर हो गया।
राहुल का धोखा
एक रात नेहा जाग रही थी, राहुल सो रहा था। अचानक राहुल के फोन में कई मैसेज आए। नेहा ने देखा, तो पाया कि राहुल कई लड़कियों से चैटिंग करता है, कई गर्लफ्रेंड्स हैं। नेहा पूरी रात रोती रही।
सुबह नेहा ने राहुल से लड़ाई की, “मैं सब बर्दाश्त कर सकती हूं, लेकिन तुम्हारा धोखा नहीं।”
राहुल बोला, “यह मेरी पर्सनल लाइफ है। तुम्हें फालतू बातें जानने की जरूरत नहीं। खाना, घर, सब मिल रहा है। चुपचाप रहो।”
नेहा ने जवाब दिया, “शादी के बाद तुम्हारी जिंदगी पर मेरा भी हक है। मैं तुम्हें गलत रास्ते पर रोकूंगी।”
झगड़ा बढ़ गया। नेहा ने मां को फोन किया, “मां, मैं अब इस घर में नहीं रह सकती। राहुल मुझे धोखा देता है, मारता है, ताने मारता है।”
मां ने समझाया, “जल्दबाजी मत करो, वरना पछताना पड़ेगा।”
लेकिन उस दिन राहुल ने नेहा के साथ मारपीट की, घर से बाहर निकाल दिया।
नेहा का नया सफर
नेहा ने पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया, मायके लौट आई। पिता ने भी उसका साथ दिया। कुछ समय बाद तलाक हो गया। पांच महीने बाद नेहा ने एक बेटी को जन्म दिया।
नेहा ने तीन साल तक मायके में रहकर बेटी की परवरिश की। फिर अपनी दोस्त रिया से नौकरी के लिए मदद मांगी। रिया ने स्कूल में इंटरव्यू करवाया, नेहा टीचर बन गई।
नेहा बच्चों को फिजिक्स पढ़ाने लगी, ट्यूशन भी देने लगी। मेहनत और लगन से वह स्कूल की सबसे पसंदीदा टीचर बन गई। सभी उसे इज्जत देने लगे।
नई पहचान – प्रिंसिपल मैडम
इसी बीच स्कूल के प्रिंसिपल की तबीयत खराब हो गई। उन्होंने नेहा को प्रिंसिपल की जिम्मेदारी सौंप दी। नेहा ने स्कूल को बखूबी संभाला।
इसी दौरान राहुल अपने बेटे का एडमिशन कराने आया। नेहा को देखकर हैरान रह गया। पता चला, नेहा अब स्कूल की वाइस प्रिंसिपल है।
राहुल ने बताया, “तलाक के बाद मैंने दूसरी शादी की, मेरा बेटा है।”
नेहा ने भी बताया, “मेरी भी एक बेटी है, जो अब पांच साल की हो गई है।”
राहुल ने बेटी से मिलने की जिद की, नेहा ने साफ मना कर दिया, “जिस बच्ची को गिराने की बात करते थे, अब किस हक से उसे अपनी बेटी बता रहे हो?”
राहुल शर्मिंदा होकर लौट गया।
नेहा की आत्मनिर्भरता
राहुल स्कूल आता-जाता रहा, नेहा से मिलने की कोशिश करता रहा। नेहा ने गार्ड से कह दिया, “कोई पेरेंट्स बिना पूछे अंदर न आए।”
राहुल कभी नेहा से मिल नहीं पाया।
इसी बीच नेहा की मुलाकात अजय से हुई, जो मेडिकल स्टोर चलाता था। दोनों करीब आए, अजय ने प्रपोज किया। लेकिन जब अजय ने शादी से पहले होटल बुलाया, नेहा ने साफ मना कर दिया। अजय ने गालियां दीं, नेहा ने रिश्ता खत्म कर दिया।
नेहा ने फैसला किया, अब पूरी जिंदगी अपनी बेटी के साथ बिताएगी। किसी लड़के से बात नहीं करेगी, अपनी मेहनत से आगे बढ़ेगी।
कहानी का संदेश
नेहा जैसी महिलाओं का समाज को सम्मान करना चाहिए। तलाक के बाद कई लोग उनका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं, लेकिन नेहा ने हिम्मत और जज्बे से अपना नाम कमाया।
आज नेहा दिल्ली के उसी स्कूल में टीचर है, अपनी बेटी के साथ खुश है।
उसने कभी अपने कदमों को डगमगाने नहीं दिया।
अंतिम विचार
दोस्तों, आपको नेहा की कहानी कैसी लगी?
राहुल और अजय जैसे मनचलों के बारे में आपकी क्या राय है?
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मिलते हैं एक नई कहानी के साथ।
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