इटावा में महिला कांस्टेबल के इश्क में CRPF जवान ने UPSC छात्र मनीष यादव को दी द#र्दनाक मौ#त!
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यूपीएससी अभ्यर्थी की रहस्यमयी गुमशुदगी से लेकर दर्दनाक ह-त्-या तक — एक सच्ची घटना जिसने समाज को झकझोर दिया
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से सामने आई एक ह-त्-या की घटना ने न केवल एक परिवार को बर्बाद कर दिया, बल्कि पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि गुस्सा, अहंकार और गलत संगत किस तरह इंसान को अ-पराध की अंधेरी दुनिया में धकेल सकते हैं। यह कहानी है 23 वर्षीय मनीष यादव की, जो यूपीएससी की तैयारी कर रहा था और एक दिन अचानक लापता हो गया। कुछ दिनों बाद जो सच्चाई सामने आई, वह बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाली थी।
एक सपना, जो अधूरा रह गया
मनीष यादव एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखता था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। उसने बीएससी एग्रीकल्चर और बीएड की पढ़ाई पूरी की थी और अब वह यूपीएससी की तैयारी में जुटा हुआ था। उसका लक्ष्य था आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना। हर रोज सुबह 7:30 बजे घर से निकलता, लाइब्रेरी और कोचिंग में घंटों पढ़ाई करता और देर शाम घर लौटता।
परिवार को उससे बहुत उम्मीदें थीं। उसका बड़ा भाई उसे प्रेरित करता, माता-पिता उसकी सफलता के सपने देखते। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन 18 फरवरी 2026 की सुबह कुछ ऐसा हुआ जिसने सब कुछ बदल दिया।
अचानक गुमशुदगी
उस दिन भी मनीष रोज की तरह घर से निकला, लेकिन वह वापस नहीं लौटा। परिवार ने पहले सोचा कि शायद देर हो गई होगी, लेकिन जब रात तक उसका कोई पता नहीं चला, तो चिंता बढ़ गई। उसका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था।
परिवार ने उसके दोस्तों, कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी—हर जगह तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अंततः उसी रात भरथना थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। हालांकि, शुरुआती तौर पर पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
लाश मिलने की सूचना
19 फरवरी 2026 की रात करीब 10 बजे रेलवे ट्रैक के पास काम कर रहे कर्मचारियों को एक अज्ञात श-री-र के टुकड़े मिले। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो पाया कि श-री-र कई हिस्सों में बंटा हुआ था। यह दृश्य इतना भयावह था कि किसी का भी दिल दहल जाए।
पुलिस ने आसपास के थानों में सूचना भेजी कि यदि किसी युवक की गुमशुदगी दर्ज हुई हो तो आकर पहचान करें। यह सूचना मनीष के परिवार तक पहुंची और उन्हें मौके पर बुलाया गया।
पहचान और मातम
जब परिवार ने उस श-री-र को देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह मनीष ही था। उसकी इस हालत को देखकर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। बड़ा भाई तो यह दृश्य देखकर बेहोश हो गया।
अब सवाल यह था कि आखिर मनीष के साथ ऐसा किसने और क्यों किया?
जांच की शुरुआत
पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और मनीष की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाली गई। जांच के दौरान एक संदिग्ध कार दिखाई दी, जो रेलवे ट्रैक के आसपास घूम रही थी।
कार के नंबर के आधार पर मालिक का पता लगाया गया, जो एक मेडिकल स्टोर संचालक था। उसने बताया कि कार उसके पास है, लेकिन उसे दीपक नाम का युवक चलाता है।
साजिश का खुलासा
पुलिस ने दीपक को हिरासत में लेकर पूछताछ की। शुरुआत में उसने टालमटोल की, लेकिन सख्ती के बाद उसने सच्चाई उगल दी।
दीपक ने बताया कि इस पूरी साजिश के पीछे अभिषेक यादव नाम का युवक है, जो सीआरपीएफ में तैनात था। मनीष और अभिषेक पहले दोस्त थे। लेकिन विवाद की जड़ बनी अभिषेक की बहन आकांक्षा यादव।
प्रेम संबंध बना कारण
मनीष और आकांक्षा के बीच दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई थी। दोनों एक-दूसरे से बात करते थे, मिलते थे। जब यह बात अभिषेक को पता चली तो उसने इसका विरोध किया।
उसने कई बार दोनों को समझाया, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद उसने अपने दोस्त विपिन यादव के साथ मिलकर मनीष को सबक सिखाने की योजना बनाई।
ह-त्-या की योजना
17 फरवरी को अभिषेक जालंधर से इटावा आया। उसने दीपक और विपिन के साथ मिलकर योजना बनाई कि मनीष को रास्ते से हटाया जाए।
18 फरवरी की सुबह, जब मनीष अपने कोचिंग के लिए निकला, तो उन्होंने उसे रास्ते में कार में बैठा लिया। चूंकि वे एक-दूसरे को जानते थे, इसलिए मनीष को शक नहीं हुआ।
वारदात का अंजाम
कार में बैठते ही मनीष के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। उसे बुरी तरह पीटा गया। फिर उसे एक सुनसान जगह, सरसों के खेत में ले जाया गया।
वहां रस्सी से उसका गला घोंटकर ह-त्-या कर दी गई। इसके बाद भी आरोपियों ने चाकू से वार किए। इतना ही नहीं, बाद में उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह जिंदा न हो, उसे गो-ली भी मारी।
सबूत मिटाने की कोशिश
ह-त्-या के बाद आरोपियों ने श-री-र को बोरी में भरकर रेलवे ट्रैक पर रख दिया, ताकि ट्रेन से कटकर श-री-र के टुकड़े हो जाएं और यह एक दुर्घटना लगे।
लेकिन पुलिस की सतर्कता और जांच के चलते सच्चाई सामने आ गई।
आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस ने अभिषेक यादव, दीपक, विपिन और आकांक्षा यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया। सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। आकांक्षा पर भी आरोप है कि उसे इस साजिश की जानकारी थी, लेकिन उसने पुलिस को सूचित नहीं किया।
समाज के लिए सबक
यह घटना कई सवाल खड़े करती है। क्या गुस्सा इतना बड़ा हो सकता है कि इंसान ह-त्-या कर दे? क्या एक रिश्ते को खत्म करने का यही तरीका था?
अगर अभिषेक अपनी बहन से शांति से बात करता, या परिवार इस मामले को समझदारी से संभालता, तो शायद आज मनीष जिंदा होता।
निष्कर्ष
मनीष यादव की कहानी एक चेतावनी है—गुस्सा, अहंकार और गलत संगत इंसान को बर्बादी की ओर ले जाते हैं। एक तरफ एक परिवार ने अपना बेटा खो दिया, वहीं दूसरी तरफ आरोपियों के परिवारों ने भी अपने बच्चों का भविष्य खो दिया।
यह जरूरी है कि हम ऐसे मामलों से सीख लें और किसी भी परिस्थिति में कानून को अपने हाथ में न लें। संवाद, समझ और धैर्य ही किसी भी समस्या का समाधान हो सकते हैं।
जय हिंद।
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