महिला स्नान करने हरिद्वार गई थी और बीच रास्ते में हुआ बहुत बड़ा कां#ड/बाबा ने महिला को नशा दे दिया/
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भक्ति की आड़ में हैवानियत: मेरठ के दंपति की हरिद्वार में बलि, दो पाखंडी तांत्रिकों की खौफनाक दास्तां
मेरठ/हरिद्वार: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से शुरू हुई एक साधारण सी कहानी का अंत उत्तराखंड के पवित्र शहर हरिद्वार में इतना वीभत्स होगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। श्रद्धा और अंधविश्वास के बारीक धागे का फायदा उठाकर दो पाखंडी साधुओं ने न केवल एक महिला की अस्मत लूटी, बल्कि ‘अमर’ होने के सनकी जुनून में एक हंसते-खेलते दंपति की बलि चढ़ा दी।
किरदार और पृष्ठभूमि: मेरठ का वो गांव
इस घटना की जड़ें मेरठ जिले के इंचोली गांव में छिपी हैं। यहां रणधीर सिंह नाम का एक संपन्न किसान रहता था, जिसके पास 12 एकड़ जमीन थी। रणधीर आर्थिक रूप से मजबूत था, लेकिन उसका चरित्र विवादों में घिरा रहता था। वह अक्सर गरीब और विधवा महिलाओं को ब्याज पर पैसे देता था और पैसे न लौटा पाने की स्थिति में उनका शारीरिक शोषण करता था।

रणधीर की पत्नी चंपा देवी उसके बिल्कुल विपरीत थी। वह धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थी और साधु-संतों की सेवा करना अपना धर्म मानती थी। चंपा की इसी अटूट श्रद्धा को भांप लिया ज्ञान भूषण नाम के एक पाखंडी ने, जो साधु के भेष में घूमता था।
साजिश का आगाज: साधु का भेष और मन में पाप
2 मार्च 2026 को ज्ञान भूषण चंपा देवी के घर पहुंचा। करीब 6 फीट लंबा कद और चेहरे पर बनावटी तेज देखकर चंपा प्रभावित हो गई। दान-दक्षिणा लेते समय ज्ञान भूषण की नजर चंपा की खूबसूरती पर पड़ी और उसने उसे हासिल करने की ठान ली। उसने चंपा के मन में डर बिठाते हुए कहा, “तुम्हारे घर पर प्रेत छाया है और तुम्हारे पति पर भारी संकट आने वाला है।”
चंपा देवी, जो पहले से ही धार्मिक और डरी हुई थी, इस जाल में फंस गई। कुछ दिनों बाद, जब रणधीर सिंह का एक विवाद के कारण झगड़ा हुआ और उसके हाथ-पैर टूट गए, तो चंपा को लगा कि साधु की भविष्यवाणी सच हो गई है।
हरिद्वार की यात्रा: श्रद्धा जो मौत के घाट तक ले गई
4 अप्रैल 2026 को ज्ञान भूषण फिर चंपा के घर पहुंचा। रणधीर को लाचार हालत में देखकर उसने सुझाव दिया कि हरिद्वार में गंगा स्नान से ही उनकी मुसीबतें टलेंगी। उसने हरिद्वार में अपने एक साथी कमलनाथ के कमरे पर रुकने का इंतजाम भी बताया।
अगली सुबह, रणधीर और चंपा उस पाखंडी के साथ हरिद्वार पहुंच गए। रात करीब 8 बजे वे कमलनाथ के कमरे पर पहुंचे। वहां कमलनाथ और ज्ञान भूषण ने मिलकर एक शैतानी योजना बनाई। उन्होंने ढाबे से लाए खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया। खाना खाते ही चंपा और रणधीर बेहोश हो गए।
तीन रातें और हैवानियत का तांडव
जैसे ही दंपति बेहोश हुए, उन पाखंडी तांत्रिकों ने उन्हें रस्सियों से बांध दिया और उनके मुंह पर टेप लगा दी। अगली सुबह जब चंपा की आंख खुली, तो वह बिना कपड़ों के थी और रस्सियों से जकड़ी हुई थी। उसके सामने उसका लाचार पति भी बंधा हुआ था।
ज्ञान भूषण और कमलनाथ ने बताया कि वे कोई साधारण साधु नहीं, बल्कि तांत्रिक हैं। उन्होंने सनसनीखेज खुलासा किया कि वे अब तक पांच लोगों की बलि दे चुके हैं और रणधीर तथा चंपा की बलि के बाद उनकी ‘सात बलि’ पूरी हो जाएंगी, जिससे वे अमर हो जाएंगे। लगातार तीन रातों तक चंपा के साथ उन दोनों ने बारी-बारी से घिनौना काम किया, जबकि उसका पति मूकदर्शक बनकर सब देखने को मजबूर था।
चौथी रात: खौफनाक कत्ल और बलि
चौथी रात के करीब 12 बजे, इन हैवानों ने अपनी तांत्रिक क्रिया शुरू की। उन्होंने बड़ी बेरहमी से रणधीर और चंपा की गर्दन काट दी। मौत के घाट उतारने के बाद, उन्होंने लाशों को पास के एक खाली प्लॉट में दफनाने की योजना बनाई।
शराबी की नजर और पाखंडियों की गिरफ्तारी
रात करीब 1 बजे, जब वे कमलनाथ के कंधे पर चंपा की लाश लादकर प्लॉट की ओर जा रहे थे, तभी वहां अजीत नाम का एक शराबी व्यक्ति आ गया। अजीत वहां से शराब के लिए पैसे या सामान चुराने की फिराक में था, लेकिन जैसे ही उसने साधु के कंधे पर लाश देखी, वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा।
अजीत का शोर सुनकर पड़ोसी जाग गए और उन्होंने भागने की कोशिश कर रहे दोनों बाबाओं को दबोच लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब सख्ती से पूछताछ की और पिटाई की, तो ज्ञान भूषण टूट गया। उसने न केवल उन दोनों की लाशों का पता बताया, बल्कि यह भी कबूल किया कि वे कोई साधु नहीं बल्कि पुराने अपराधी हैं जो जेल से छूटने के बाद चंपा जैसे लोगों को ठगने का काम करते थे।
पुलिसिया कार्रवाई और अमर होने का भ्रम
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उन पर हत्या, बलात्कार और साजिश के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस की प्राथमिक जांच में पता चला है कि ये दोनों अपराधी पहले भी कई वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। कमलनाथ ने स्वीकार किया कि वह ‘अमर’ होने की सनक में सात बलि देना चाहता था।
निष्कर्ष: समाज के लिए चेतावनी
यह घटना हमें सचेत करती है कि अंधविश्वास और किसी भी अनजान व्यक्ति पर अंधा भरोसा करना कितना घातक हो सकता है। धर्म की आड़ में छिपे ये भेड़िये समाज के लिए नासूर हैं। चंपा देवी की श्रद्धा और रणधीर सिंह की लाचारी ने उन्हें एक ऐसी राह पर धकेल दिया जहां से कोई वापस नहीं आता।
मेरठ पुलिस और हरिद्वार पुलिस अब इस मामले में कड़ी चार्जशीट तैयार कर रही है। यह मामला कोर्ट में है, जहां उम्मीद की जा रही है कि इन दरिंदों को फांसी जैसी कठोरतम सजा मिलेगी।ư
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