मंदसौर | आखिर औरतें मर्दों से चाहती क्या है क्यों अपने पतियों के साथ ऐसा करती है ||

मंदसौर हत्याकांड: बेवफाई और खूनी साजिश की सच्ची दास्तां

इंसान की बुद्धि जब भ्रष्ट होती है, तो वह अपनों के खून का प्यासा बन जाता है। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के दूधाखेड़ी गांव में घटी यह घटना इसी ‘विपरीत बुद्धि’ का जीवंत उदाहरण है। ३९ वर्षीय धनराजनाथ, जो मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पाल रहे थे, उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि उनके घर का चिराग बुझाने वाली कोई और नहीं, बल्कि उनकी अपनी ही पत्नी होगी।

१. परिवार और संदिग्ध मित्रता

धनराजनाथ के परिवार में उनकी ३५ वर्षीय पत्नी धापू बाई और दो बच्चे (एक बेटा और एक बेटी) थे। धनराज का एक करीबी दोस्त था, ४० वर्षीय पंकज चौधरी। पंकज अक्सर धनराज के घर आता-जाता था। लेकिन इस मित्रता की आड़ में एक /अपवित्र कहानी/ लिखी जा रही थी। पंकज और धापू बाई के बीच धीरे-धीरे /अवैध प्रेम प्रसंग/ शुरू हो गया।

२. शक की चिंगारी और झगड़ा

पिछले ५ वर्षों से धापू बाई और पंकज एक-दूसरे के /निकट/ थे। वे फोन पर घंटों बातें करते और मौका मिलने पर /एकांत में मुलाकात/ भी करते थे। जब गांव में चर्चाएं शुरू हुईं, तो धनराज के कानों तक भी यह बात पहुंची। धनराज ने अपनी पत्नी से पूछताछ की, लेकिन धापू ने /छल-कपट/ का सहारा लेकर उसे गुमराह किया।

धापू बाई अक्सर झगड़ा कर अपने मायके चली जाती थी, ताकि वहां से वह पंकज से आसानी से मिल सके। दोनों ने तय कर लिया था कि वे साथ रहेंगे, लेकिन धनराज उनके रास्ते का कांटा बना हुआ था। अंततः धापू ने पंकज से कहा कि वह धनराज को /रास्ते से हटा/ दे।

३. १० अप्रैल की खूनी रात

साजिश के तहत धापू बाई ने धनराज का भरोसा जीता और उसे मीठी बातों में फंसाया। १० अप्रैल २०२६ को पास के एक कार्यक्रम में जाने के लिए धापू ने धनराज को राजी किया कि वे पंकज की गाड़ी से ही चलेंगे। धनराज ने इसे पुरानी दुश्मनी खत्म करने का मौका समझा और तैयार हो गया।

वापसी के दौरान, रास्ते में धनराज को कोई /नशीला पदार्थ/ पिला दिया गया। जब वह बेसुध होने लगा, तो पंकज उसे अपने खेत पर ले गया। वहां पंकज और धापू बाई ने मिलकर धनराज का /गला दबाकर/ उसे हमेशा के लिए शांत कर दिया।

४. बर्बरता और सबूत मिटाने की कोशिश

हत्या के बाद आरोपियों ने /दरिंदगी/ की सारी हदें पार कर दीं। सबूत मिटाने के लिए उन्होंने तलवार से शव के कई /हिस्से/ कर दिए। पंकज ने उन हिस्सों पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। जब शव पूरी तरह नहीं जला, तो अगले दिन पंकज ने एक जेसीबी (JCB) ड्राइवर को बुलाकर खेत में गहरा गड्ढा खुदवाया और अवशेषों को वहां दबा दिया।

हैरानी की बात यह थी कि खुद पंकज ही धापू बाई को लेकर थाने गया और धनराज की ‘गुमशुदगी’ की रिपोर्ट दर्ज कराई, ताकि पुलिस को उस पर शक न हो।

५. बेटी का साहस और पुलिस का खुलासा

पुलिस धनराज को ढूंढ रही थी, लेकिन सुराग नहीं मिल रहा था। तभी धनराज की बेटी ने पुलिस के सामने अपनी मां और पंकज अंकल पर शक जताया। उसने पुलिस को बताया कि उसकी मां का पंकज के साथ /प्रेम संबंध/ था और पिता अक्सर इसका विरोध करते थे।

पुलिस ने जब धापू बाई के कॉल डिटेल्स (CDR) निकाले, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। १० अप्रैल की रात १:३० बजे पंकज और धापू के बीच बातचीत हुई थी। पुलिस ने धापू को हिरासत में लिया और एक मनोवैज्ञानिक चाल चली। पुलिस ने झूठ बोला कि पंकज ने सब उगल दिया है। यह सुनते ही धापू टूट गई और अपना /गुनाह/ कबूल कर लिया।

६. जनता का आक्रोश और बुलडोजर की मांग

१३ अप्रैल २०२६ को पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर खेत से धनराज के शव के अवशेष बरामद किए। इस खबर के फैलते ही पूरे इलाके में कोहराम मच गया। गुस्साए ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने चक्का जाम कर दिया। लोगों की मांग थी कि हत्यारों के घरों पर बुलडोजर चलाया जाए और उन्हें /कड़ी से कड़ी/ सजा दी जाए।

निष्कर्ष

फिलहाल दोनों आरोपी जेल में हैं और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि /अंधा प्रेम/ और /बेवफाई/ किस कदर इंसान को जानवर बना देती है। धनराज की मौत ने दो बच्चों को अनाथ कर दिया और एक हँसता-खेलता परिवार उजड़ गया।

मुसाफिर क्राइम तक – हसमुद्दीन की रिपोर्ट