सरकारी आफिसर कि खूबसूरत बीवी ने यह क्या किया | Motivational story

वैवाहिक सत्य और एक /मर्यादित/ समझौता
अध्याय १: समाज का दबाव और चमन की चुप्पी
महाराष्ट्र के मुंबई शहर में चमन नाम का एक व्यक्ति रहता था। चमन एक उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी था, जिसके पास रुतबा, पैसा और बंगला सब कुछ था। लेकिन जब उसकी उम्र ३५ साल हो गई और उसने शादी नहीं की, तो रिश्तेदारों ने कानाफूसी शुरू कर दी। कोई कहता कि उसे अच्छी लड़की नहीं मिल रही, तो कोई कहता कि शायद वह बहुत ज्यादा दहेज चाहता है।
लेकिन चमन के मन के भीतर एक ऐसा /अंधेरा/ था जिसे वह किसी को बता नहीं सकता था। वह जानता था कि वह एक पूर्ण पुरुष के रूप में /अक्षम/ है। अंततः माता-पिता के दबाव में आकर उसने २५ साल की बीए शिक्षित लड़की, रीना से शादी कर ली। यह एक अरेंज मैरिज थी, क्योंकि चमन को डर था कि लव मैरिज में उसकी /कमजोरी/ पहले ही पकड़ी जाएगी।
अध्याय २: सुहागरात और /अधूरा/ सच
शादी के बाद पहली रात रीना ने बड़े उत्साह के साथ अपने पति का स्वागत किया। वह नई नवेली दुल्हन थी और अपने जीवनसाथी से प्रेम और /शारीरिक/ निकटता चाहती थी। लेकिन एक हफ्ता बीत गया, चमन ने उसे छुआ तक नहीं। वह हमेशा काम का बहाना बनाता या फिर थक जाने की बात कहता।
एक रात जब रीना ने खुद पहल की और उसके करीब आने की कोशिश की, तो चमन पीछे हट गया। उसने झल्लाकर कहा, “तुम्हें बस यही /गंदी/ चीजें सूझती हैं? क्या तुम शादी से पहले भी ऐसी ही थी?” यह सुनकर रीना के आंसू निकल आए। वह समझ नहीं पा रही थी कि उसका पति उससे /दूरी/ क्यों बना रहा है।
अध्याय ३: स्विट्जरलैंड की यात्रा और /विफलता/
चमन ने रीना को मनाने के लिए स्विट्जरलैंड की दो टिकटें बुक कीं। रीना को लगा कि शायद एकांत में सब ठीक हो जाएगा। इन दो-तीन महीनों में चमन ने चोरी-छिपे कई डॉक्टरों से इलाज भी कराया, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ था।
स्विट्जरलैंड के खूबसूरत नजारों के बीच जब रीना ने फिर से /संबंध/ बनाने का प्रयास किया, तो चमन फिर से /असफल/ रहा। अब रीना का सब्र टूट गया। उसने चिल्लाकर कहा, “तुमने मेरे साथ धोखा किया है! तुम एक पूर्ण पुरुष नहीं हो।” चमन डर गया और उसने रीना को धमकी दी, “अगर तुमने यह बात किसी को बताई, तो मैं /आत्महत्या/ कर लूंगा क्योंकि समाज में मेरी बहुत इज्जत है।”
मजबूर होकर रीना ने हालात से /समझौता/ कर लिया।
अध्याय ४: एक /पवित्र/ झूठ की योजना
शादी के दो साल बीत गए। घरवाले अब ‘खुशखबरी’ का इंतजार कर रहे थे। चमन की माँ अक्सर पूछती, “बहू, पोते का मुँह कब दिखाएगी?” रीना अंदर ही अंदर घुटती रहती थी। मुंबई के बंगले में रहते हुए एक दिन रीना की मुलाकात वहां काम करने वाली बुजुर्ग महिला की बेटी बबीता से हुई।
बबीता के पहले से चार बच्चे थे और वह पांचवीं बार /गर्भवती/ थी। वह गरीबी के कारण उस बच्चे को /हटाना/ चाहती थी। रीना के मन में एक विचार आया। उसने चमन से बात की और तय किया कि वे बबीता के उस बच्चे को गोद ले लेंगे, लेकिन दुनिया को यह बताएंगे कि यह बच्चा रीना का है।
अध्याय ५: गुड्डू का आगमन
रीना ने एक नाटक रचा और खुद को /गर्भवती/ बताना शुरू किया। उसने बबीता को एक अलग फ्लैट में रखा और उसकी पूरी देखभाल की। जब बबीता ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया, तो रीना ने उसे अपनी गोद में ले लिया। उस बच्चे का नाम ‘गुड्डू’ रखा गया।
बबीता ने रोते हुए आशीर्वाद दिया, “बहन, यह बच्चा आज से तुम्हारा है। इसे पाल-पोसकर बड़ा आदमी बनाना।” रीना और चमन ने गुड्डू को अपने सगे बेटे की तरह पाला। समाज और रिश्तेदारों को लगा कि चमन का /वंश/ आगे बढ़ गया है।
अध्याय ६: नेपाल का सफर और नया जीवन
गुड्डू के आने के बाद रीना खुश तो थी, लेकिन उसके मन में अभी भी एक /अधूरी/ इच्छा थी। उसकी एक सहेली ने उसे बताया कि नेपाल में एक जड़ी-बूटी विशेषज्ञ हैं जो इस तरह की /शारीरिक अक्षमता/ का सफल इलाज करते हैं।
चमन और रीना नेपाल गए। वहां करीब ६ महीने तक चमन का प्राकृतिक इलाज चला। धीरे-धीरे चमन के शरीर में सुधार होने लगा और वह पूरी तरह से /सामान्य/ हो गया। रीना की बरसों की तपस्या सफल हुई।
उपसंहार: एक निस्वार्थ फैसला
जब चमन ठीक हो गया, तो उनके पास मौका था कि वे अपना सगा बच्चा पैदा करें। लेकिन रीना और चमन ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया। उन्होंने तय किया कि वे गुड्डू के अलावा और कोई बच्चा नहीं करेंगे। उन्हें डर था कि अगर उनका अपना सगा बच्चा हुआ, तो गुड्डू के प्रति उनका प्यार कम हो सकता है।
आज वे एक सुखी परिवार हैं। वे न केवल गुड्डू को पाल रहे हैं, बल्कि बबीता के अन्य बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठा रहे हैं। चमन की /मर्यादा/ बच गई और रीना को उसका अधिकार मिल गया।
समाप्त
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