फोन के फटने से हुआ बहुत बड़ा हादसा/ S.P साहब भी चौंक गए/
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एक फोन, एक परिवार और एक विनाशकारी रात
गुजरात के सूरत जिले के पालनपुर इलाके में सोमनाथ सिंह का छोटा सा परिवार रहता था। सोमनाथ एक प्राइवेट स्कूल में चपरासी का काम करता था। दिन-रात मेहनत करता, स्कूल के बाद मजदूरी भी करता, लेकिन महीने के 12-13 हजार रुपये में घर का खर्च ठीक से नहीं चलता था। उसकी पत्नी रचना देवी और बेटी सोनम ही उसका संसार थीं।
सोनम ने पिछले साल 12वीं पास की थी, लेकिन पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता था। एक दिन सोमनाथ ने बेटी को समझाया, “बेटी, आगे पढ़ाई करो। पढ़ोगी नहीं तो मुसीबतें आएंगी।” सोनम अनमने मन से पास के कॉलेज में एडमिशन ले लेती है। कॉलेज में सहेलियों के पास स्मार्टफोन थे, मगर सोनम के पास नहीं। धीरे-धीरे उसे भी फोन की चाह होने लगी। एक दिन वह अपनी मां से बोली, “मां, मुझे भी स्मार्टफोन दिला दो। सबके पास है, मेरे पास नहीं। कहीं देर हो जाए तो तुम्हें फोन भी कर सकती हूं।”
रचना देवी जानती थी कि घर की हालत ठीक नहीं, लेकिन बेटी की बात उसे भी सही लगी। उसने पति से कहा, “बेटी कॉलेज जाती है, उसे फोन दिला दो।” सोमनाथ ने कहा, “इतने पैसे नहीं हैं, पढ़ाई कराऊं या फोन दिलाऊं?” रचना बोली, “कोई पुराना फोन ही दिला दो।”

आखिरकार सोमनाथ अपनी इकलौती बेटी के लिए पास की मोबाइल दुकान पर गया। दुकान पर जतिन नाम का लड़का बैठा था। सोमनाथ ने 3500 रुपये में एक पुराना स्मार्टफोन खरीद लिया और सोनम को दे दिया। सोनम बहुत खुश थी, क्योंकि पहली बार उसके पास स्मार्टफोन आया था। मां-बाप भी खुश थे, मगर कोई नहीं जानता था कि यही फोन आगे चलकर परिवार के लिए घातक साबित होगा।
कुछ दिन बीते। सोनम कॉलेज से आती, तो फोन में ही लगी रहती। फोन की बैटरी पुरानी थी, वह बार-बार चार्ज करती थी। 15 सितंबर की शाम को सोनम ने फोन चार्जिंग पर लगाया, लेकिन फोन चार्ज नहीं हो रहा था। उसने मां से कहा, “मेरा फोन खराब हो गया है, दुकान पर जाकर ठीक करवा लाती हूं।” वह जतिन की दुकान पर गई। जतिन ने कहा, “कोई अच्छा सा नया फोन ले लो।” सोनम बोली, “पिता ने मुश्किल से पुराना फोन लिया है, नया कहां से लूं?”
जतिन ने मौका तलाशा। दुकान खाली थी। उसने सोनम से कहा, “मैं तुम्हें नया फोन दे सकता हूं, लेकिन तुम्हें कीमत चुकानी होगी।” सोनम समझ गई, बोली, “तुम मुझे नया फोन दे दो, मैं तुम्हारी हर बात मान लूंगी।” जतिन खुश हो गया। उसने सोनम से कहा, “आज रात 11 बजे दुकान पर आना, फिर मैं तुम्हें नया फोन दूंगा।” सोनम राजी हो गई, पुराना फोन दुकान पर छोड़कर घर आ गई।
रात को सोनम अपने कमरे में लेट गई, मां-बाप दूसरे कमरे में। 11 बजे जब सब सो गए, सोनम दबे पांव दुकान पर पहुंची। जतिन ने शटर खोलकर सोनम को अंदर बुलाया। दोनों ने दुकान के अंदर गलत संबंध बनाए। जतिन ने सोनम को नया स्मार्टफोन दे दिया। सोनम मुस्कुराते हुए रात 12:30 बजे घर लौट आई। किसी को खबर नहीं थी कि लड़की गलत रास्ते पर चल चुकी है।
अब जतिन जब भी सोनम को बुलाता, वह दुकान पर जाती, पैसे भी लेती, और दोनों गलत संबंध बनाते। सोनम को पता नहीं था कि ये फोन आगे परिवार के लिए कितना घातक होगा।
तीन-चार दिन बाद एक रात सोनम अपने कमरे में फोन चला रही थी। पिता सोमनाथ अचानक कमरे में आया। उसने देखा कि बेटी के पास नया फोन है। पूछा, “ये फोन कहां से आया? पुराना फोन कहां गया?” सोनम ने झूठ बोला, “पापा, मेरा फोन खराब हो गया था, दुकान पर छोड़ दिया है। ये मेरी सहेली का फोन है, ठीक होते ही वापस कर दूंगी।” सोमनाथ ने बात मान ली।
कुछ दिन बाद 24 सितंबर की रात जतिन ने सोनम को फोन किया, “आज रात दुकान पर आना।” सोनम तैयार हो गई। खाना खाकर सब अपने-अपने कमरे में चले गए। 11 बजे सोनम फिर दुकान पर गई। जतिन ने शटर खोला, सोनम को अंदर बुलाया। लेकिन आज किस्मत खराब थी। पड़ोसी ईश्वर सिंह, जो शराबी था, सोनम को दुकान में जाते देख रहा था। उसने पहले भी रचना देवी को जतिन की दुकान पर आते-जाते देखा था।
ईश्वर सिंह ने सोमनाथ को बताया, “तुम्हारी बेटी गलत रास्ते पर चल चुकी है, जतिन की दुकान में है।” सोमनाथ को यकीन नहीं हुआ। ईश्वर ने कहा, “पहले बेटी को देखो।” सोमनाथ ने कमरे में देखा, सोनम नहीं थी। अब उसे यकीन हुआ। वह ईश्वर सिंह के साथ दुकान पर गया। शटर पर दस्तक दी। जतिन ने 10 मिनट बाद शटर खोला। सोमनाथ ने देखा, बेटी दुकान में थी। उसने जतिन की पिटाई की, बेटी को घर ले आया।
ईश्वर सिंह ने सोमनाथ को बताया, “तेरी पत्नी भी जतिन से मिलती थी। मैंने खुद देखा है।” अब सोमनाथ का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसने पत्नी की भी पिटाई की। पड़ोसी तमाशा देख रहे थे। मामला शांत हो गया, मगर सोमनाथ टूट गया था। उसे लगा, पत्नी और बेटी दोनों ने धोखा दिया है।
2 अक्टूबर की सुबह सोमनाथ स्कूल नहीं गया। शहर में जाकर रस्सी, नशीला पदार्थ, पेट्रोल खरीदा। शाम को खाना बनाया, उसमें नशीला पदार्थ मिला दिया। पत्नी-बेटी बेहोश हो गईं। रात 10 बजे सोमनाथ ने फोन को चार्जिंग पर लगाया, पेट्रोल छिड़का, पत्नी-बेटी के हाथ-पैर बांधे, उन पर पेट्रोल डाला, पूरे घर में पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। पत्नी-बेटी जलकर राख हो गईं। सोमनाथ बच निकला।
सुबह पड़ोसी ने देखा, घर में आग बुझ चुकी थी। भीतर जली हुई लाशें थीं। पुलिस को खबर दी गई। पुलिस ने जांच की, लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस स्टेशन पहुंचने पर देखा, सोमनाथ पहले से ही वहां बैठा था। उसने कहा, “फोन फटने से घर में आग लग गई।” पुलिस ने विश्वास नहीं किया, सोमनाथ को गिरफ्तार किया, पिटाई की। थोड़ी देर में सोमनाथ ने सच कबूल लिया—उसने ही अपने परिवार को मार डाला था।
पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, चार्जशीट दायर की। आगे अदालत क्या फैसला करेगी, ये भविष्य के गर्भ में है। लेकिन सोमनाथ ने जो बहाना बनाया था—फोन के फटने का—वह गलत था। उसने अपने ही हाथों से अपने परिवार को खत्म कर दिया।
कहानी का संदेश:
गलत राह, झूठ और धोखे का अंत हमेशा दुखद होता है। एक छोटी सी चाहत—स्मार्टफोन—ने पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया। रिश्तों में विश्वास, संवाद और संयम जरूरी है। अगर कहानी ने आपको झकझोर दिया, तो कमेंट में लिखें—”परिवार सबसे बड़ा धन है।”
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