जज साहब अपनी गाडी से हॉस्पिटल जा रहे थे ; लेकिन पुलीस वालो ने गाडी रोकी और पैसे मांगे फिर ….

पूरी कहानी: गरीब चायवाले के बेटे से जज बनने और न्याय की मिसाल
शुरुआत – जज साहब का अपमान
कानपुर शहर की एक सुबह। जज साहब अपनी पत्नी को अस्पताल ले जाने के लिए जल्दी में थे। रास्ते में एक दरोगा ने उनकी गाड़ी रोक ली और बिना वजह चालान काटने लगा। जब जज साहब ने वजह पूछी, तो दरोगा गुस्से में आकर जज साहब को थप्पड़ मार देता है और उनकी गाड़ी भी जब्त करवा देता है। भरे बाजार में जज साहब का अपमान होता है। लेकिन जज साहब ने जो किया, वह पूरे शहर के लिए मिसाल बन गया।
रवि की कहानी – चाय वाले का बेटा
कानपुर के एक गरीब मोहल्ले में रवि अपनी मां के साथ रहता था। उसके पिता का साया बचपन में ही उठ गया था। मां चौराहे पर चाय-समोसा बेचकर उसका पालन-पोषण करती थी। रवि पढ़ाई में तेज था, स्कूल से आते ही मां की मदद करता था। उसकी मां हमेशा कहती थी, “तू अपने पिता पर गया है, बहुत तेज दिमाग के थे।”
रवि अक्सर पूछता, “हम इतने गरीब क्यों हैं? पापा क्या करते थे?”
मां बताती, “तेरे पिता सरकारी वकील थे। गरीबों के केस मुफ्त में लड़ते थे, कभी रिश्वत या पैसा नहीं लिया।”
रवि के पिता ने एक गरीब का केस लिया था, जिसकी जमीन विधायक ने कब्जा कर ली थी। कोर्ट में सबूत विधायक के खिलाफ थे, लेकिन जज ने विधायक के पक्ष में फैसला दिया। रवि के पिता को धमकियां मिलीं, वे डिप्रेशन में चले गए और अंतत: हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। रवि की मां ने उसे बताया, “तेरे पिता चाहते थे कि तू एक दिन जज बने, ताकि न्याय व्यवस्था में सुधार हो सके।”
रवि का संघर्ष
रवि ने ठान लिया कि वह एक दिन जज बनेगा। स्कूल में अच्छे नंबर लाता, मां के साथ चाय की टपरी पर भी काम करता। 12वीं के बाद एलएलबी की पढ़ाई की, कोर्ट में असिस्टेंट वकील बनकर कई बड़े वकीलों के अंडर काम सीखा। उसका दिमाग तेज था, जल्दी ही कोर्ट में पहचान बन गई। उसने पहला केस एक गरीब आदमी का लड़ा, जिसके भाई ने उसकी जमीन हड़प ली थी। रवि ने केस जीत लिया, उसकी खूब वाहवाही हुई।
धीरे-धीरे रवि की आर्थिक हालत सुधरने लगी। घर लिया, मां की स्थिति बेहतर हुई, शादी भी हो गई, दो बच्चे हुए। रवि ने जज बनने के लिए परीक्षा दी और अच्छे नंबरों के साथ पास होकर न्यायाधीश बन गया। उसके पिता का सपना अब पूरा हो चुका था।
पिता का अधूरा केस – न्याय की लड़ाई
जज बनने के बाद भी रवि के मन में पिता का अधूरा केस था। उसने उस गरीब आदमी के बच्चों को खोजा, जो अब मजदूरी कर रहे थे। उनसे बात की, उन्हें केस दोबारा लड़ने के लिए तैयार किया। विधायक अब भी ताकतवर था, जमीन पर फैक्ट्री बना चुका था। केस दोबारा खुला, सबूतों से साबित हो गया कि जमीन गरीब की थी। रवि को धमकियाँ मिलीं, लेकिन उसने हार नहीं मानी। आखिरकार फैसला गरीब के बच्चों के हक में गया, जमीन उन्हें वापस मिल गई। रवि ने पिता की मौत का बदला ले लिया।
रवि की शादी और नया संघर्ष
रवि ने अपनी मां से वादा किया था कि जब तक पिता का बदला नहीं लेगा, शादी नहीं करेगा। 35 साल की उम्र में उसने सुहानी नामक वकील से शादी की। सुहानी गर्भवती हुई, रवि खुश था। एक रात पत्नी को दर्द हुआ, रवि कार निकालकर अस्पताल ले जाने लगा। रास्ते में नाके पर पुलिसवालों ने गाड़ी रोक ली, पैसे मांगने लगे। रवि ने बताया कि पत्नी गर्भवती है, जल्दी जाना है, लेकिन दरोगा ने एक न सुनी। रवि ने जज का आईडी कार्ड दिखाया, तब जाकर दरोगा ने माफी मांगी और रवि को जाने दिया।
अस्पताल पहुँचकर डॉक्टर ने कहा, “अगर थोड़ी देर और हो जाती, तो पत्नी और बच्ची दोनों की जान खतरे में थी।” रवि बहुत गुस्सा हुआ। उसने ठान लिया कि इन पुलिसवालों को सबक सिखाना है।
जज साहब का प्लान – पुलिसवालों की पोल खोलना
रवि ने रात को साधारण कपड़े पहनकर उसी नाके पर जाना शुरू किया। शर्ट की जेब में कैमरा वाला पेन लगाया। पुलिसवालों ने फिर गाड़ी रोकी, पैसे मांगे, थप्पड़ मारे, गाड़ी सील की और रवि को थाने ले गए। रवि ने फोन मांगकर अपने दोस्त एसपी को फोन किया, जो उस शहर का पुलिस कप्तान था। एसपी तुरंत थाने पहुँचा, दरोगा को खूब डांटा, “तुमने एक जज को जेल में डाला है!”
दरोगा ने माफी मांगी, लेकिन रवि ने सबूत इकट्ठा कर लिए थे। उसने कोर्ट में सब पुलिसवालों के खिलाफ केस किया – गरीबों से पैसे लेने, बदतमीजी करने, रिश्वत मांगने के जुर्म में। कोर्ट ने सभी दरोगा को निलंबित किया, 5-5 साल की सजा और लाखों रुपये का जुर्माना लगाया।
सीख
इस घटना से सीख मिलती है कि मेहनत, ईमानदारी और संघर्ष से कोई भी गरीब लड़का बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है। रवि ने अपने पिता का सपना पूरा किया, अन्याय का बदला लिया और समाज को न्याय की मिसाल दी।
कभी भी किसी गरीब या आम आदमी को कमजोर मत समझो। सही वक्त पर उसकी आवाज सबसे बुलंद होती है।
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