करवा चौथ पर || पत्नी को सरप्राइज देने घर पहुचा पति जो देखा उसे देख सब बदल गया |

करवा चौथ की रात — विश्वास का इम्तिहान
अध्याय 1: गाँव की गलियों से कॉलेज तक
इंदौर जिले के बालोदी गाँव में राजेश का बचपन गरीबी, संघर्ष और परिवार के संस्कारों के बीच बीता। उसके माता-पिता और बड़ा भाई, जो पहले ही शादीशुदा था, राजेश को पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित करते थे। गाँव के सीमित संसाधनों के बावजूद, राजेश ने इंदौर शहर के एक अच्छे कॉलेज में दाखिला लिया।
कॉलेज में उसकी मुलाकात अंजलि से हुई। अंजलि सुंदर थी, लेकिन उसके परिवार की छवि समाज में अच्छी नहीं थी। राजेश को पहली नज़र में अंजलि पसंद आ गई। धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती गहरी होती गई। वे साथ पढ़ते, घूमते, सपने देखते। अंजलि भी राजेश की ईमानदारी और मेहनत से प्रभावित थी।
अध्याय 2: परिवार की दीवारें और प्यार की जिद
राजेश ने अपने माता-पिता से अंजलि से शादी की इच्छा जताई। माता-पिता ने साफ मना कर दिया, “उसके परिवार के लोग अच्छे नहीं हैं, बेटा। उसकी नानी ने जो किया, उसका असर उसकी मां और अब उस पर भी है। समाज में बदनामी है।”
राजेश ने तर्क दिया, “जो कुछ हुआ, वह अंजलि ने नहीं किया। वह बहुत अच्छी लड़की है।”
माता-पिता ने भावुक होकर कहा, “समाज की बातें हमें भी सुननी पड़ती हैं। तुम समझते क्यों नहीं?”
लेकिन प्यार की जिद के आगे हर दीवार छोटी पड़ गई। राजेश ने घरवालों की मर्जी के खिलाफ जाकर अंजलि से शादी कर ली। शादी के बाद जब वह अंजलि को घर लाया, तो माता-पिता ने दरवाजा बंद कर दिया। राजेश ने गिड़गिड़ाया, समझाया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ।
आखिरकार, राजेश ने घर छोड़ दिया। इंदौर शहर में किराए का मकान लिया, और वहीं अपनी नई जिंदगी शुरू की।
अध्याय 3: संघर्ष, सपने और नया परिवार
शहर में रहना आसान नहीं था। राजेश ने छोटी-मोटी नौकरी की, ट्यूशन पढ़ाया, पार्ट टाइम काम किया। अंजलि ने भी सिलाई, कढ़ाई सीख ली। दोनों ने मिलकर घर चलाया। धीरे-धीरे, उनकी जिंदगी पटरी पर आने लगी। तीन साल बाद उनके घर एक बेटे का जन्म हुआ। बेटे के आने से दोनों की खुशियाँ दुगनी हो गईं।
अंजलि ने राजेश से कहा, “हमारा बच्चा बड़ा हो रहा है। क्या हम हमेशा किराए के मकान में रहेंगे? उसे अपना घर चाहिए, अपनी पहचान चाहिए।”
राजेश ने महसूस किया कि अब उसे कुछ बड़ा करना होगा। लेकिन इंदौर में घर खरीदना आसान नहीं था। पैसे कम थे, सपने बड़े थे।
अध्याय 4: विदेश जाने का फैसला और दूरियाँ
एक दिन राजेश को पता चला कि कतर में नौकरी के अच्छे मौके हैं। वहाँ मजदूरी के बदले अच्छा पैसा मिलता है। उसने अंजलि से बात की, “अगर मैं कुछ साल विदेश चला जाऊं, तो हम अपना घर खरीद सकते हैं।”
अंजलि ने डरते हुए कहा, “मुझे अकेले रहने से डर लगता है। रोज फोन करना, वादा करो।”
राजेश ने वादा किया, “हर दिन फोन करूंगा, हर महीने पैसे भेजूंगा।”
विदेश जाते समय दोनों की आंखों में आंसू थे। लेकिन सपनों के लिए यह बलिदान जरूरी था। कतर में राजेश ने दिन-रात मेहनत की। हर महीने पैसे भेजता, रोज फोन करता। अंजलि भी बेटे की देखभाल करती, घर संभालती। शुरूआत में सब ठीक था।
अध्याय 5: अंजलि का बदलता व्यवहार और राजेश का शक
दो साल बीते। राजेश की मेहनत रंग ला रही थी। लेकिन अब अंजलि का व्यवहार बदलने लगा। पहले वह हर छोटी बात पर राजेश को फोन करती, अब बहाने बनाने लगी — “तबीयत खराब है”, “बेटा सो रहा है”, “बाद में बात करूंगी।”
राजेश ने सोचा, “शायद बच्चे की जिम्मेदारी में व्यस्त रहती होगी।” लेकिन उसके मन में कहीं न कहीं शक भी था। क्या अंजलि बदल रही है? क्या उसके परिवार की बदनामी सच साबित हो रही है?
फिर भी, राजेश ने खुद को समझाया, “नहीं, अंजलि मुझसे बहुत प्यार करती है।”
अध्याय 6: करवा चौथ का सरप्राइज और कड़वा सच
करवा चौथ आने वाला था। राजेश ने अंजलि के लिए एक्स्ट्रा पैसे भेजे, कहा, “अच्छे से शॉपिंग करो, तुम खुश रहो, मैं हूं तुम्हारे साथ।”
अंजलि ने नए कपड़े खरीदे, राजेश को तस्वीरें भेजीं। राजेश खुश था। तभी उसकी कंपनी ने उसे इंडिया बुलाया — कुछ काम था, और अधिकारी को राजेश की जरूरत थी।
राजेश ने सोचा, “इस बार करवा चौथ पर पत्नी को सरप्राइज दूंगा।” उसने अंजलि को कुछ नहीं बताया, बस कैजुअली बात की।
रात 8 बजे वह अपने किराए के घर पहुंचा। बाहर एक अनजान बाइक खड़ी थी। राजेश ने सोचा, “शायद पड़ोसी की होगी।” चुपके-चुपके घर के अंदर गया। हॉल में जो देखा, उसकी आंखें फटी रह गईं — अंजलि अपने बचपन के दोस्त के साथ बैठी थी, दोनों के बीच घनिष्ठता देखकर राजेश का दिल टूट गया।
राजेश चुपचाप बाहर निकल आया, आंगन में खड़ा रहा, फिर सीधा अपने माता-पिता के पास गया। रोते हुए सारी बात बताई। माता-पिता ने कहा, “देखा, हमने पहले ही कहा था कि उस परिवार की लड़की ठीक नहीं है।” राजेश ने अपनी गलती मानी, लेकिन दिल में गहरा घाव लेकर घरवालों के पास लौट आया।
अध्याय 7: रिश्ते का अंत, तन्हाई और गुस्सा
राजेश ने विदेश लौटने का फैसला किया। अब उसने अंजलि से कोई संपर्क नहीं रखा, पैसे भेजना बंद कर दिया। अंजलि ने कई बार फोन किया, लेकिन राजेश ने नंबर ब्लैकलिस्ट कर दिया। परेशान होकर अंजलि ने दूसरे नंबर से फोन किया।
राजेश ने दो टूक जवाब दिया, “अब तुम मेरे लिए खत्म हो चुकी हो।”
अंजलि ने सफाई दी, “मैं अकेली थी, मार्केट में बचपन का दोस्त मिला, गलती हो गई, माफ कर दो।”
राजेश ने कहा, “मैंने अपनी आंखों से सब देखा है, अब कोई सफाई मत दो।”
राजेश ने साफ कहा, “अगर बच्चे को पालना है तो रख लो, वरना मेरे घरवालों के पास भेज दो। अब कभी मुझे फोन मत करना।”
अंजलि फूट-फूटकर रोती रही, लेकिन राजेश ने उसकी एक न सुनी।
कुछ दिन बाद अंजलि ने अपने दोस्त के साथ सोशल मीडिया पर फोटो डाल दी। राजेश ने देखा तो और भी गुस्सा आया। उसने फिर फोन किया, “अब तुम्हें मेरी जरूरत नहीं, अपने नए दोस्त के साथ जीवन बिताओ।”
अंजलि ने जवाब दिया, “ठीक है, अब मैं उसी के साथ रहूंगी।”
अध्याय 8: नया जीवन, पुराना घाव
राजेश इंडिया लौट आया, अपना बिजनेस शुरू किया, परिवार के साथ रहने लगा। शादी के लिए घरवाले कहते, लेकिन राजेश ने साफ मना कर दिया। “मैंने एक बार शादी की, अब नहीं करूंगा।”
वह अपने बेटे की याद में जीता रहा, लेकिन अंजलि से कोई लगाव नहीं रहा। काम में व्यस्त रहता, लेकिन दिल के किसी कोने में अकेलापन था।
अध्याय 9: माफी, दर्द और बच्चे की मासूमियत
एक दिन शाम को राजेश घर लौटा तो देखा, अंजलि अपने बच्चे को गोद में लेकर घर आई। हाथ जोड़कर माफी मांगने लगी, “मुझे नौकरानी बना लो, लेकिन घर से मत निकालो।”
राजेश गुस्से में डंडा उठाकर उसे भगाने लगा। तभी उसका बेटा रोते हुए बोला, “पापा, आप ऐसा क्यों कर रहे हो?” बच्चे की मासूमियत और आंसू देखकर राजेश का दिल पिघल गया। माता-पिता ने भी कहा, “बच्चे की खातिर उसे रहने दे।”
राजेश ने शर्त रखी, “तुम घर में रह सकती हो, लेकिन किसी से बात नहीं करोगी, किसी मामले में दखल नहीं दोगी।” अंजलि ने हाथ जोड़कर कहा, “जैसा कहोगे, वैसा करूंगी।”
अध्याय 10: अंजलि की सजा और जिंदगी की सीख
अंजलि को घर में नौकरानी की तरह रहने दिया गया, सिर्फ बच्चे की खातिर। अंजलि ने कोशिश की, लेकिन उसे कभी परिवार का प्यार नहीं मिला। बच्चा बड़ा होता गया, लेकिन मां की जिंदगी जिल्लत भरी रही। कोई उसे नए कपड़े नहीं देता, ना ही परिवार के मामलों में शामिल करता।
एक दिन राजेश ने उससे पूछा, “तुम्हारा वह दोस्त कहाँ है, जिसके साथ फोटो डाली थी?”
अंजलि ने रोते हुए कहा, “उसने भी मुझे धोखा दे दिया। कुछ दिन खर्चा चलाया, फिर छोड़ दिया। अब लोग मेरा गलत फायदा उठाना चाहते हैं, इसलिए मैं आपके पास आई हूं।”
राजेश ने कहा, “ठीक है, नौकरानी की तरह रहो, सिर्फ बच्चे की वजह से।”
अध्याय 11: समाज, परिवार और अंतहीन दर्द
समाज में किसी को पता नहीं चला कि अंजलि घर में किस हाल में रह रही है। राजेश के माता-पिता ने पोते को अपनाया, लेकिन अंजलि की तरफ कभी प्यार नहीं दिखाया। राजेश ने भी कभी उसे पत्नी का दर्जा नहीं दिया। अंजलि ने खुद को पूरी तरह तोड़ दिया, अपनी गलती की सजा भुगतती रही।
राजेश ने अपने बेटे को अच्छी शिक्षा दी, उसकी हर जरूरत पूरी की। लेकिन अंजलि के लिए सिर्फ दो रोटियां थीं, कोई सम्मान नहीं। बच्चे ने मां-बाप के रिश्ते में दर्द देखा, लेकिन कभी शिकायत नहीं की।
अध्याय 12: समय का पहिया और जिंदगी की सीख
समय बीतता गया। राजेश का बेटा बड़ा हो गया, पढ़ाई में अच्छा रहा। राजेश ने अपना कारोबार बढ़ाया, परिवार को संभाला। लेकिन दिल में एक टीस हमेशा बनी रही — प्यार, विश्वास और रिश्तों के टूटने की।
अंजलि ने अपनी गलती मान ली थी, लेकिन उसकी सजा कभी खत्म नहीं हुई। वह सिर्फ अपने बेटे के लिए जीती रही, हर दिन भगवान से माफी मांगती रही।
सीख और संदेश
विश्वास एक बार टूट जाए तो दोबारा नहीं जुड़ता।
रिश्तों में ईमानदारी सबसे जरूरी है।
गलतियों की सजा सिर्फ करने वाले को नहीं, पूरे परिवार को भुगतनी पड़ती है।
कभी-कभी माफ करना भी खुद के लिए जरूरी होता है, लेकिन हर बार माफ करना सही नहीं।
बच्चों की खातिर बड़े फैसले लेना पड़ते हैं।
समाज की सोच बदलनी चाहिए, पर गलतियों की जिम्मेदारी भी जरूरी है।
हर इंसान को दूसरा मौका मिलना चाहिए, लेकिन विश्वास का टूटना सबसे बड़ा घाव है।
प्यार सिर्फ खुशी में नहीं, मुश्किलों में साथ देने का नाम है।
अपनों की गलतियों को समझना, उन्हें सुधारने का मौका देना, यही इंसानियत है।
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