महिला पूजा करने मंदिर में चली गई और फिर हुआ बहुत बड़ा हादसा/

इंदु की आखिरी पूजा – एक गांव की सच्चाई

बीकानेर जिले के राजस सरासर गांव में धर्मपाल सिंह रहते थे। धर्मपाल की तीन बेटियां थीं – रजनी, बबीता और सबसे छोटी इंदु। धर्मपाल ने बड़ी मुश्किल से पाई-पाई जोड़कर दो बड़ी बेटियों की शादी कर दी थी और पांच लाख का कर्ज उठा लिया था। अब उसकी चिंता थी इंदु की शादी की, जो 22 साल की हो चुकी थी। इंदु बहुत धार्मिक प्रवृत्ति की लड़की थी, हर सुबह पांच बजे मंदिर जाती, पूजा करती, और अपने पिता का सिर गर्व से ऊँचा रखती थी।

गांव में सब कहते – “बेटी हो तो इंदु जैसी।” मगर धर्मपाल को डर था, कहीं उसकी जवान बेटी के साथ कोई ऊँच-नीच न हो जाए, जिससे बदनामी हो। एक दिन, जब घर में राशन खत्म हो गया, इंदु कुछ पैसे लेकर पास की दुकान पर गई। दुकानदार राजेंद्र ने पहले का उधार लौटाने को कहा, इंदु ने वादा किया अगले महीने सब चुका देगी। लेकिन राजेंद्र की नियत खराब हो गई। उसने इंदु को स्टोर रूम में बुलाया, उधार माफ करने का लालच दिया। इंदु ने गुस्से में तमाचा मार दिया। राजेंद्र ने बदले में इंदु के कपड़े फाड़ने की कोशिश की। इंदु ने शोर मचाया, पड़ोसी इकट्ठा हुए, लेकिन राजेंद्र के पक्ष में बोलने लगे क्योंकि वह सभी को उधार देता था।

इंदु रोती हुई घर लौटी। पिता धर्मपाल शाम को आया, बेटी ने सब बताया। धर्मपाल डर गया, सोचने लगा कि अब इंदु की शादी जल्दी कर देनी चाहिए। कुछ दिन बाद अजीत नाम का लड़का मिला – माता-पिता नहीं, सिर्फ छोटा भाई प्रवीण। इंदु और अजीत की शादी हो गई। इंदु ससुराल चली गई।

प्रवीण एक आंख से अंधा था, दूसरी आंख से महिलाओं पर गलत नजर रखता था। उसकी नजर भाभी इंदु पर भी थी। एक रात, जब अजीत फैक्ट्री में काम करने गया, प्रवीण शराब पीकर घर लौटा। इंदु को खाना देने के बाद उसकी नियत खराब हो गई। दरवाजा बंद किया, इंदु को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन इंदु बहादुर थी, तमाचा मारा, शोर मचाया, पड़ोसी आए, अजीत को बुलाया। अजीत ने भाई की पिटाई की और घर से निकाल दिया। इंदु और अजीत खुश रहने लगे, लेकिन किस्मत ने फिर करवट ली।

एक दिन अजीत फैक्ट्री जाते वक्त सड़क हादसे का शिकार हो गया। गंभीर चोटें आईं, अस्पताल में भर्ती हुआ। इंदु ने सेवा की, दवा के साथ दुआ की जरूरत महसूस की। वह रोज मंदिर जाने लगी। एक सुबह, पूजा करके बाहर निकली तो मंदिर के पुजारी कनकनाथ ने उसे रोका। पुजारी ने इंदु का दुख सुना, विश्वास दिलाया, प्रसाद दिया। प्रसाद खाते ही इंदु बेहोश हो गई। पुजारी ने उसे मंदिर के तहखाने में ले जाकर बांध दिया और उसके साथ घिनौना अपराध किया।

इंदु के पति अजीत और दोस्त लाल सिंह ने मंदिर में खोज की, मगर पुजारी ने झूठ बोलकर टाल दिया। पुलिस भी पुजारी की बातों पर यकीन कर बैठी। इंदु गायब रही। अगली सुबह, मंदिर में एक महिला पूजा करने आई, उसके बच्चे खेलते-खेलते तहखाने में चले गए। वहां उन्होंने इंदु को रस्सियों से बंधा, मुंह पर पट्टी, पास में सांप देखा। बच्चे शोर मचाते बाहर भागे, गांव वाले तहखाने में पहुंचे। इंदु के मुंह से झाग निकल रहे थे – सांप ने काट लिया था। इंदु दम तोड़ चुकी थी।

गांव के सुरेश कुमार ने पुलिस को बुलाया। पुलिस ने तहखाने में इंदु की लाश देखी, पुजारी को गिरफ्तार किया। कड़ी पूछताछ में कनकनाथ ने कबूल किया कि वह कई गांवों में पुजारी बनकर महिलाओं को बहलाता, फुसलाता, उनके साथ गलत काम करता था। पुलिस ने उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। अब अदालत तय करेगी उसकी सजा।

संदेश:
इंदु की कहानी दर्दनाक है, मगर यह समाज के लिए चेतावनी है – सतर्क रहें, अंधविश्वास और झूठे धर्म के जाल में न फंसें। बेटियों को आत्मनिर्भर और साहसी बनाएं, ताकि वे हर मुश्किल का सामना कर सकें।

अगर आपको यह कहानी पढ़कर कुछ सीखने को मिला, तो इसे शेयर करें। सतर्क रहें, जागरूक रहें।
जय हिंद, वंदे मातरम।