मुजफ्फरनगर की ये सगी बहनों ने जो कारनामा किया है उसे देख खुद पुलिस भी हैरान है ||

खू/न के रिश्ते और नफ/रत की दीवार
भूमिका
इस दुनिया में हर समस्या का समाधान बातचीत से संभव है, लेकिन जब नफ/रत का ज/हर अपनों के खू/न में घुल जाए, तो नतीजे रूह कंपा देने वाले होते हैं। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के मोरना गांव में हुई यह घटना समाज के लिए एक ऐसा सवाल छोड़ गई है, जिसका उत्तर ढूंढना आज भी मुश्किल है। यह कहानी है एक ऐसे पि/ता की जिसे अपनी ही औलादों ने मौ/त के घाट उतार दिया और उन बेटियों की जिन्होंने रिश्तों की मर्यादा को ता/र-ता/र कर दिया।
शांतिपूर्ण मोरना और रामप्रसाद का परिवार
मुजफ्फरनगर के भोपा थाना क्षेत्र के अंतर्गत बसा मोरना एक शांत और खेती-किसानी पर निर्भर गांव है। इसी गांव में 55 वर्षीय रामप्रसाद अपने परिवार के साथ रहते थे। रामप्रसाद एक संपन्न किसान थे, जिनके पास करीब 25-26 बीघा उपजाऊ जमीन थी। उनके परिवार में उनकी पत्नी चंद्रकली और कुल छह बच्चे थे—चार बेटियां और दो बेटे।
रामप्रसाद अपनी दो बड़ी बेटियों, लता और शिल्पी की शादी पहले ही कर चुके थे। घर में अब तीसरे नंबर का बेटा अमित (33 वर्ष), चौथे नंबर की बेटी कोमल (32 वर्ष), पांचवें नंबर का बेटा सुमित और सबसे छोटी 16 वर्षीय नाबालि/ग बेटी रह रहे थे। अमित और सुमित अपने पि/ता के साथ खेती के काम में हाथ बंटाते थे। बाहर से देखने पर यह एक खुशहाल और समृद्ध किसान परिवार नजर आता था, लेकिन घर की चारदीवारी के भीतर नफ/रत और भेदभाव की एक गहरी खाई बन रही थी।
वह काली रात: 22 फरवरी 2026
फरवरी की सर्द रात थी। 22 फरवरी 2026 को रामप्रसाद का पूरा परिवार एक साथ खाना खाता है। चंद्रकली ने सबके लिए खाना परोसा था। खाने के बाद, परंपरा के अनुसार सब अपने-अपने कमरों में चले गए। रामप्रसाद अक्सर घर के बरामदे में खाट बिछाकर सोते थे ताकि घर की रखवाली भी हो सके और ताजी हवा भी मिले। उस रात भी वे बरामदे में सो गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह रामप्रसाद की आखिरी रात होने वाली है।
अगली सुबह, 23 फरवरी को करीब 7 बजे जब चंद्रकली की नींद खुली, वह अपनी नित्य क्रिया के लिए बाहर निकली। बरामदे की ओर जाते ही उसकी नजर खाट पर सो रहे पति पर पड़ी। उसने उन्हें जगाने की कोशिश की, लेकिन जो नजारा उसने देखा, उससे उसकी चीख निकल गई। रामप्रसाद का शरीर खू/न से लथपथ था। उनके गले और पेट पर किसी तेजधा/र हथिया/र से बेरहमी से हम/ला किया गया था। खाट के नीचे खू/न जम चुका था।
चंद्रकली की दहाड़ सुनकर दोनों बेटे अमित-सुमित और दोनों बेटियां कोमल व छोटी बहन दौड़कर बाहर आए। पि/ता की ला/श देखकर पूरा घर मा/तम में डूब गया। गांव वाले इकट्ठा हो गए और तुरंत भोपा थाने को सूचना दी गई।
पुलिस की तफ्तीश और उलझता मामला
सूचना मिलते ही पुलिस टीम फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और डॉग स्क्वायड के साथ मौके पर पहुंची। शुरुआती जांच में पुलिस को लगा कि शायद यह लू/टपा/ट के इरादे से की गई ह/त्या है। मुमकिन था कि कोई चो/र घर में घुसा हो और रामप्रसाद के जाग जाने पर उसने हम/ला कर दिया हो। लेकिन अजीब बात यह थी कि घर से कोई भी कीमती सामान गायब नहीं था।
जब डॉग स्क्वायड (खोजी कुत्ता) को छोड़ा गया, तो उसने पुलिस के कान खड़े कर दिए। कुत्ता रामप्रसाद की ला/श के पास से भागकर घर के अंदर गया, फिर बाहर लगे नल (कल) के पास गया और वापस ला/श के पास आ गया। वह घर की सीमाओं से बाहर नहीं गया। इसका साफ मतलब था कि ह/त्यारा कोई बाहरी नहीं, बल्कि घर का ही कोई सदस्य था या कोई ऐसा जो घर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ था।
पुलिस ने चंद्रकली की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुक/दमा दर्ज किया, लेकिन उनका शक अब परिवार पर गहराने लगा था।
कोमल का अतीत और पारिवारिक कलह
पूछताछ के दौरान गांव की महिलाओं और पड़ोसियों ने पुलिस को एक महत्वपूर्ण जानकारी दी। 32 वर्षीय कोमल, जो घर की अविवाहित बेटी थी, उसका अपने पि/ता के साथ अक्सर झग/ड़ा होता था। कोमल पढ़ाई-लिखाई में कमजोर थी और आठवीं के बाद स्कूल छोड़ दिया था। उसकी उम्र बढ़ती जा रही थी, लेकिन रामप्रसाद उसकी शादी को लेकर गंभीर नहीं थे।
पड़ोसियों ने बताया कि कोमल पिछले कुछ महीनों से परिवार से अलग होकर खुद अपना खाना बना रही थी। रामप्रसाद उसे अक्सर “बोझ” कहते थे और कभी-कभी उसकी पिटा/ई भी कर देते थे। कोमल के मन में अपने पि/ता और भाइयों के प्रति गहरी नफ/रत बैठ गई थी। उसे लगता था कि उसके पि/ता बेटों को ज्यादा अहमियत देते हैं और उसे सिर्फ अप/मान मिलता है।
साजिश का पर्दाफाश
पुलिस ने जब कोमल और उसकी छोटी बहन को अलग-अलग ले जाकर सख्ती से पूछताछ की, तो कोमल टूट गई। उसने जो सच उगला, उसने समाज के रोंगटे खड़े कर दिए।
कोमल ने बताया कि ह/त्या से कुछ दिन पहले उसके बड़े भाई अमित ने उसे और उसकी छोटी बहन को बुरी तरह पी/टा था। वजह सिर्फ इतनी थी कि कोमल मोबाइल पर रील्स (Reels) देखती थी और वैसी ही आधुनिक जीवनशैली की मांग करती थी। अमित को लगता था कि मोबाइल उनकी बहनों को बिगाड़ रहा है। उस पिटा/ई ने कोमल के भीतर बरसों से सुलग रही आग को ज्वाला बना दिया। उसने तय कर लिया कि वह इस “रोज-रोज के जु/ल्म” को खत्म कर देगी।
कोमल ने अपनी 16 वर्षीय छोटी बहन को भी अपनी बातों में फंसा लिया। उसने बहन को यकीन दिलाया कि पि/ता के मर/ने के बाद ही उन्हें आजादी मिलेगी और जायदाद में हिस्सा भी।
कत्ल का खौफनाक तरीका
कोमल ने एक शातिर योजना बनाई। उसने अपने एक परिचित के जरिए नीं/द की गोलियां मंगवाईं। 22 फरवरी की रात, कोमल ने खुद खीर बनाई और उसमें चुपके से नीं/द की गोलियां मिला दीं। रामप्रसाद, चंद्रकली और दोनों भाइयों ने वह खीर खाई और गहरी नीं/द में सो गए। कोमल और उसकी छोटी बहन ने वह खीर नहीं खाई थी।
आधी रात को, जब पूरा घर सन्नाटे में डूबा था, दोनों बहनें उठीं। कोमल ने हाथ में गंडा/सा (तेजधा/र हथिया/र) लिया और छोटी बहन को साथ लेकर बरामदे में पहुंची। छोटी बहन ने पि/ता के दोनों पैर कसकर पकड़ लिए ताकि वे छटपटा न सकें। कोमल ने पूरी ताकत से पि/ता के गले पर वा/र किया। एक के बाद एक कई वा/र उनके पेट और गर्दन पर किए गए। रामप्रसाद को चीख/ने तक का मौका नहीं मिला।
ह/त्या के बाद, दोनों ने अपनी चुन्नी से फर्श पर गिरा खू/न साफ किया। हथिया/र और खू/न से सनी चुन्नी को घर के पिछले हिस्से में भूसे के ढेर में छिपा दिया। फिर नल पर जाकर हाथ धोए और चुपचाप मां के बगल में जाकर सो गईं, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
अंजाम: सलाखों के पीछे
पुलिस ने कोमल की निशानदेही पर भूसे के ढेर से ह/त्या में इस्तेमाल हथिया/र और कपड़े बरामद कर लिए। 32 साल की कोमल को गिर/फ्तार कर जे/ल भेज दिया गया, जबकि उसकी छोटी बहन को नाबालि/ग होने के कारण सुध/ार गृह (बाल सुध/ार गृह) भेजा गया।
रामप्रसाद का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन मोरना गांव के लोग आज भी स्तब्ध हैं। लोग सवाल करते हैं—गलती किसकी थी? क्या उस पि/ता की, जिसने बेटी को बोझ समझा और भेदभाव किया? या उन बेटियों की, जिन्होंने गुस्से में आकर उस पि/ता का ही खू/न कर दिया जिसने उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया था?
निष्कर्ष
यह कहानी हमें सिखाती है कि परिवार में संवादहीनता और भेदभाव विना/श का कारण बनते हैं। क्रो/ध में लिया गया फैसला कभी सही नहीं होता। कोमल ने अपनी “आजादी” के लिए पि/ता को मा/र तो दिया, लेकिन अब उसकी पूरी जिंदगी जे/ल की सलाखों के पीछे बीतने वाली है। समस्या चाहे कितनी भी बड़ी हो, ह/त्या उसका समाधान कभी नहीं हो सकती।
News
मंदसौर | आखिर औरतें मर्दों से चाहती क्या है क्यों अपने पतियों के साथ ऐसा करती है ||
मंदसौर | आखिर औरतें मर्दों से चाहती क्या है क्यों अपने पतियों के साथ ऐसा करती है || मंदसौर हत्याकांड:…
उस रात मुझे टीटी के साथ समझौता करना पड़ा | मेरी मजबूरी का फायदा उठाया | Emotional True Story”
उस रात मुझे टीटी के साथ समझौता करना पड़ा 😭 | मेरी मजबूरी का फायदा उठाया | ट्रेन का वह…
दो सगे बेटों ने अपने पिता के साथ कर दिया बड़ा कां#ड/असली वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/
दो सगे बेटों ने अपने पिता के साथ कर दिया बड़ा कां#ड/असली वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/ लोन…
Police के रवैये से दुखी पीड़िता ने जान दे दी |Chitrakoot में Dalit लड़की का Gang Rape
Police के रवैये से दुखी पीड़िता ने जान दे दी |Chitrakoot में Dalit लड़की का Gang Rape न्याय की प्रतीक्षा…
Asha Bhosle Funeral: आशा भोसले के कितने बच्चे थे,बेटा बहू क्या करते है |Kids Details,Son,Daughter..
Asha Bhosle Funeral: आशा भोसले के कितने बच्चे थे,बेटा बहू क्या करते है |Kids Details,Son,Daughter.. आशा भोसले: सुरों की मलिका…
सरकारी आफिसर कि खूबसूरत बीवी ने यह क्या किया | Motivational story
सरकारी आफिसर कि खूबसूरत बीवी ने यह क्या किया | Motivational story वैवाहिक सत्य और एक /मर्यादित/ समझौता अध्याय १:…
End of content
No more pages to load






