DM बनने के बाद झोपडी मे पहुँची पत्नी ; तलाक के बाद भी पत्नी होने का फर्ज निभाया फिर आगे ….

“संघर्ष और सफलता – प्रिया और राजवीर की कहानी”

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में राजवीर नाम का युवक अपने माता-पिता के साथ रहता था। राजवीर पढ़ा-लिखा था और सरकारी डिपार्टमेंट में क्लर्क की नौकरी करता था। उसके मां-बाप ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन बेटे की सरकारी नौकरी पर गर्व करते थे।

इसी प्रदेश के एक शहर में प्रिया नामक लड़की रहती थी। प्रिया पढ़ाई-लिखाई में काफी होशियार थी। उसके घरवाले चाहते थे कि वह राजवीर से शादी करे, क्योंकि राजवीर सरकारी नौकर था और उसकी जिंदगी सुरक्षित मानी जाती थी। प्रिया ने शर्त रखी, “शादी के बाद भी मैं अपनी पढ़ाई जारी रखूंगी।” राजवीर उसकी सुंदरता और आत्मविश्वास पर मोहित हो गया और मान गया।

शादी के बाद प्रिया गांव आ गई। वहां राजवीर के घरवाले, खासकर सास-ससुर, देवर-ननद, पढ़ाई के विरोधी थे। वे प्रिया से कहते, “अब पढ़-लिखकर क्या करोगी? शादी हो गई है, अब बच्चे होंगे, घर संभालो!” लेकिन प्रिया ने ठान लिया था कि वह घर के कामों के साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखेगी।

राजवीर रोज सुबह शहर नौकरी के लिए चला जाता, शाम को लौटता। इस बीच प्रिया को ससुराल वालों से ताने सुनने पड़ते, “अब क्या कलेक्टर बनेगी?” बार-बार की मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर प्रिया ने राजवीर से तलाक की बात की। तलाक के बाद वह मायके लौट आई और यूपीएससी की तैयारी करने लगी। दो साल बाद वह कलेक्टर बन गई।

भाग्य का खेल देखिए, प्रिया की पोस्टिंग उसी डिपार्टमेंट में हो गई, जहां राजवीर क्लर्क था। जब प्रिया सफेद कार में ऑफिस पहुंची, सबने उसका स्वागत किया। राजवीर भी वहीं था, नजरें झुका लीं। प्रिया ने भी उसे देखा, लेकिन भावनाओं को दबा लिया।

ऑफिस में प्रिया का पर्सनल असिस्टेंट रॉकी था। प्रिया ने रॉकी से राजवीर के घर के बारे में जानकारी मंगवाई। पता चला, राजवीर अकेले एक कमरे में रहता है, न मां-बाप, न भाई-बहन, न पत्नी-बच्चे। प्रिया को एहसास हुआ कि वह आज भी अकेला है।

ऑफिस में एक अधिकारी नितिन था, जो भ्रष्टाचार करता था। प्रिया ने उसकी सारी गलत गतिविधियों पर रोक लगा दी। नितिन ने गुस्से में प्रिया को अपशब्द कहे, तो राजवीर ने उसका विरोध किया और चेतावनी दी, “अगर प्रिया मैम के बारे में कुछ कहा तो जान से मार दूंगा!” ऑफिस में अफवाहें फैल गईं कि दोनों के बीच कुछ रिश्ता है।

प्रिया ने राजवीर को बुलाया और डांटा, “तुम्हारी वजह से ऑफिस में बातें हो रही हैं!” राजवीर ने भावुक होकर कहा, “बेशक तुम मेरी जिंदगी से जा चुकी हो, लेकिन दिल में आज भी हो। तुम्हारे बारे में कोई गलत बोलेगा तो सहन नहीं करूंगा।”

एक दिन राजवीर ऑफिस नहीं आया। पता चला, उसके साथ मारपीट हुई है और वह अस्पताल में भर्ती है। प्रिया सब छोड़कर हॉस्पिटल पहुंची, राजवीर को देखकर भावुक हो गई। उसने ऑफिस की जिम्मेदारी रॉकी को सौंप दी और राजवीर के पास बैठी रही। डॉक्टरों ने कहा, “राजवीर अब खतरे से बाहर है।”

कुछ दिन बाद प्रिया राजवीर के घर गई। देखा, वह अकेला बिस्तर पर पड़ा है। दोनों ने दिल खोलकर बातें कीं। प्रिया ने बताया, “मैंने तलाक पेपर पर साइन नहीं किए थे। मैं तुमसे अलग नहीं होना चाहती थी, लेकिन मजबूरी थी। तुम्हारे मां-बाप मुझे पढ़ने नहीं देते थे, ताने देते थे।” राजवीर ने कहा, “मैं भी तुम्हारी पढ़ाई के खिलाफ नहीं था, लेकिन रोज-रोज की लड़ाई से परेशान था।”

दोनों रो पड़े, गले मिले। प्रिया ने रॉकी को बताया, “राजवीर अब भी मेरे पति हैं, मैंने तलाकनामे पर साइन नहीं किए।” रॉकी ने माफी मांगी। पता चला, राजवीर पर हमला नितिन के आदमियों ने करवाया था। प्रिया ने नितिन को सस्पेंड कर दिया।

फिर प्रिया और राजवीर ने दोबारा शादी की। ऑफिस में पार्टी हुई, सबने बधाई दी। दोनों हमेशा के लिए एक हो गए।

कहानी का संदेश:
यह कहानी आज भी कई गांवों में दोहराई जाती है, जब कोई पढ़ी-लिखी लड़की गांव में शादी करके जाती है और ससुराल वाले उसकी पढ़ाई से जलते हैं। लेकिन हर लड़की एक जैसी नहीं होती। कुछ अपने परिवार के लिए त्याग करती हैं, कुछ अपने सपनों के लिए लड़ती हैं। हमें हर लड़की को गलत नजर से नहीं देखना चाहिए। एक मछली तालाब को गंदा कर सकती है, लेकिन सारे तालाब की मछलियां गंदी नहीं होतीं।

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