महिला ने लड़के से कहा तुम्हें पैसे दूंगा तुम मेरे साथ वो करो पति करता
धोखे की बाउंड्री: एक गार्ड और मालकिन की खौफनाक दास्तान
अध्याय 1: गुलाबी शहर का एक आलीशान बंगला
राजस्थान की राजधानी जयपुर, जिसे ‘गुलाबी शहर’ कहा जाता है, अपनी खूबसूरती और राजसी ठाठ-बाट के लिए मशहूर है। इसी शहर के एक पॉश इलाके में एक आलीशान बंगला था, जिसके चारों तरफ ऊँची बाउंड्री वॉल थी। इस बंगले में ‘विवेक चौहान’ नाम का एक अमीर बिजनेसमैन अपनी पत्नी ‘अविनाश चौहान’ के साथ रहता था।
अविनाश चौहान, जिसकी उम्र लगभग 32 साल थी, बेहद सुंदर और आधुनिक खयालों वाली महिला थी। उसकी शादी विवेक से 18 जनवरी 2019 को धौलपुर में हुई थी। विवेक अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था और उसकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखता था। लेकिन बिजनेस के सिलसिले में विवेक को अक्सर मुंबई, चेन्नई और दिल्ली जैसे शहरों के दौरों पर रहना पड़ता था। घर में विवेक के बूढ़े माता-पिता भी रहते थे, लेकिन अधिकांश समय अविनाश अकेली और बोर महसूस करती थी।
अध्याय 2: राजीव का आगमन
एक दिन अविनाश ने विवेक से कहा, “आप अक्सर बाहर रहते हैं और आसपास का माहौल ठीक नहीं है। हमें घर की सुरक्षा के लिए एक परमानेंट सिक्योरिटी गार्ड रखना चाहिए।” विवेक ने तुरंत सहमति दे दी और एक नामी सिक्योरिटी एजेंसी से संपर्क किया।
अगले ही दिन, 27 साल का एक नौजवान लड़का बंगले पर पहुँचा। उसका नाम था ‘राजीव’। राजीव उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात का रहने वाला था। वह देखने में बहुत सुंदर, लंबा और गठीला था। गरीबी के कारण वह जयपुर नौकरी की तलाश में आया था। विवेक ने उसे काम पर रख लिया और बंगले के गेट के पास ही उसके रहने और खाने की व्यवस्था कर दी गई। राजीव अपनी ड्यूटी के प्रति बहुत ईमानदार था और उसे दुनियादारी से ज्यादा मतलब नहीं था।
अध्याय 3: नजरों का खेल और पहली मुलाकात
राजीव की सुंदरता ने पहली ही नजर में अविनाश का ध्यान खींच लिया। वह अक्सर अपनी बालकनी से उसे देखती रहती। एक दिन अचानक अविनाश के कमरे का पंखा खराब हो गया। उसने आवाज दी, “राजीव! जरा इधर आओ, देखो यह पंखा क्यों नहीं चल रहा?”
राजीव अंदर आया। उसे बिजली के काम की थोड़ी जानकारी थी। उसने बोर्ड खोला और फ्यूज ठीक कर दिया। अविनाश उसे गौर से देख रही थी। काम खत्म होने के बाद उसने राजीव को नाश्ता और पानी दिया। बातों-बातों में उसने पूछा, “घर में कौन-कौन है? शादी हुई या नहीं?” राजीव ने सादगी से जवाब दिया कि माता-पिता और छोटे भाई-बहन हैं, और शादी की बात अभी चल रही है। उस दिन पहली बार दोनों की नजरें मिलीं और अविनाश के मन में एक अजीब सी हलचल पैदा हो गई।
अध्याय 4: मजबूरियां और हदों का टूटना
अब अविनाश अक्सर बहाने बनाकर राजीव को अंदर बुलाने लगी। कभी ठंडा पानी मांगने के लिए तो कभी कुछ सामान ऊपर रखवाने के लिए। एक सुबह जब विवेक काम के सिलसिले में शहर से बाहर गया था, अविनाश ने राजीव को अपने बेडरूम में बुलाया। उसने पहले ही घर के सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए थे।
जब राजीव अंदर पहुँचा, तो अविनाश ने उससे प्यार भरी बातें शुरू कर दीं। राजीव घबरा गया और बोला, “मैडम, मैं तो बस एक गार्ड हूँ, आप यह सब क्या कह रही हैं?” लेकिन अविनाश ने उसे मजबूर करना शुरू कर दिया। उसने साफ शब्दों में कहा, “मेरे पति बिजनेस में व्यस्त रहते हैं और मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूँ। अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी, तो मैं तुम्हारी नौकरी छुड़वा दूँगी और तुम पर गलत इल्जाम लगा दूँगी।”
राजीव जवान था और सामने इतनी सुंदर महिला का प्रलोभन देख वह खुद पर काबू नहीं रख सका। उस दिन अविनाश ने राजीव के साथ वो सब किया जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। राजीव ने उसे ऐसी संतुष्टि दी कि अविनाश उसकी दीवानी हो गई। जाते वक्त उसने राजीव को ₹2000 दिए और कहा कि यह सिलसिला जारी रहेगा।
अध्याय 5: रात का अंधेरा और नाजायज रिश्ता
धीरे-धीरे यह उनका रोज का काम बन गया। जब भी विवेक घर पर नहीं होता, राजीव अंदर होता। एक रात लगभग 2 बजे, विवेक अचानक एक मीटिंग के लिए ड्राइवर के साथ बाहर निकल गया। अविनाश ने तुरंत राजीव को फोन किया, “राजीव, जाग रहे हो? साहब चले गए हैं, अंदर आ जाओ।”
राजीव अंदर पहुँचा और उस रात उन्होंने सारी हदें पार कर दीं। राजीव वहीं सो गया और सुबह 7 बजे उसकी आँख खुली। वह डरा हुआ था, पर अविनाश ने उसे आश्वस्त किया कि किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। लेकिन जैसा कि कहा जाता है, पाप का घड़ा एक दिन जरूर भरता है।
अध्याय 6: विवेक का शक और बिछाया गया जाल
करीब 6 महीने बीत चुके थे। विवेक चौहान को अपनी पत्नी के व्यवहार में बदलाव महसूस होने लगा था। अविनाश अब पहले की तरह विवेक के करीब नहीं आती थी और अक्सर फोन पर व्यस्त रहती थी। विवेक ने सच जानने के लिए एक नाटक रचा।
एक दिन उसने अविनाश से कहा, “मुझे अर्जेंट काम से तीन-चार दिनों के लिए मुंबई जाना है।” वह घर से निकला, लेकिन वास्तव में वह शहर में ही रुक गया। रात के 1 बजे उसने गुपचुप तरीके से बंगले के पास पहुँचकर देखा। राजीव गेट पर नहीं था। विवेक दीवार फांदकर अंदर घुसा और बेडरूम की खिड़की से जो देखा, उसने उसके पैरों तले जमीन खिसका दी। उसकी पत्नी उस गार्ड के साथ आपत्तिजनक हालत में थी। विवेक का खून खौल उठा, लेकिन उसने शोर नहीं मचाया। वह चुपचाप वहाँ से निकल गया।
अध्याय 7: मौत का कुआं
विवेक ने अपनी पत्नी या राजीव से कुछ नहीं कहा। उसने दो दिनों तक इस बात को पी लिया और अपने एक भरोसेमंद दोस्त को सब बताया। तीसरे दिन रात को विवेक घर लौटा। उसने राजीव से बड़े प्यार से कहा, “राजीव, आज मुझे एक सुनसान जगह पर कुछ काम है और मेरा ड्राइवर नहीं है, तुम मेरे साथ चलो।”
राजीव बिना किसी शक के गाड़ी में बैठ गया। विवेक उसे जयपुर से दूर एक सुनसान इलाके में ले गया, जहाँ एक पुराना और गहरा कुआं था। वहाँ पहुँचकर विवेक का असली रूप सामने आया। उसने राजीव से कहा, “मुझे सब पता है कि तुम और मेरी पत्नी क्या गुल खिला रहे थे।” राजीव माफी मांगने लगा, लेकिन विवेक ने एक गमछा निकाला और राजीव का गला घोंट दिया। राजीव की मौके पर ही मौत हो गई। विवेक ने उसकी लाश को कुएं में फेंक दिया और वापस आ गया।
अध्याय 8: राज का पर्दाफाश
कुछ दिनों बाद उस कुएं से बदबू आने लगी। गाँव वालों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने लाश निकाली, जो काफी फूल चुकी थी। राजीव की जेब से मिले आधार कार्ड और सिक्योरिटी गार्ड की वर्दी से उसकी पहचान हो गई। पुलिस जब विवेक चौहान के बंगले पहुँची, तो वहाँ के सीसीटीवी कैमरों का रिकॉर्ड चेक किया गया। हालांकि घटना वाली रात के फुटेज डिलीट थे, पर पुलिस की सख्ती के आगे विवेक टूट गया।
पुलिस ने जब अविनाश से पूछताछ की, तो उसने पहले तो मना किया, लेकिन बाद में रोते हुए स्वीकार किया कि उसके राजीव के साथ संबंध थे। विवेक ने अपना जुर्म कबूल कर लिया कि उसने अपनी इज्जत बचाने के लिए राजीव को मौत के घाट उतारा।
निष्कर्ष और सीख
पुलिस ने विवेक चौहान के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और उसे जेल भेज दिया गया। यह कहानी हमें सिखाती है कि क्षणिक सुख और लालच का अंत हमेशा बुरा होता है। विश्वास की नींव पर ही घर टिके होते हैं, और जब वह नींव हिलती है, तो पूरा परिवार तबाह हो जाता है। हमेशा अपनी मर्यादा में रहना ही इंसान की सबसे बड़ी सुरक्षा है।
News
मंदसौर | आखिर औरतें मर्दों से चाहती क्या है क्यों अपने पतियों के साथ ऐसा करती है ||
मंदसौर | आखिर औरतें मर्दों से चाहती क्या है क्यों अपने पतियों के साथ ऐसा करती है || मंदसौर हत्याकांड:…
उस रात मुझे टीटी के साथ समझौता करना पड़ा | मेरी मजबूरी का फायदा उठाया | Emotional True Story”
उस रात मुझे टीटी के साथ समझौता करना पड़ा 😭 | मेरी मजबूरी का फायदा उठाया | ट्रेन का वह…
दो सगे बेटों ने अपने पिता के साथ कर दिया बड़ा कां#ड/असली वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/
दो सगे बेटों ने अपने पिता के साथ कर दिया बड़ा कां#ड/असली वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/ लोन…
Police के रवैये से दुखी पीड़िता ने जान दे दी |Chitrakoot में Dalit लड़की का Gang Rape
Police के रवैये से दुखी पीड़िता ने जान दे दी |Chitrakoot में Dalit लड़की का Gang Rape न्याय की प्रतीक्षा…
Asha Bhosle Funeral: आशा भोसले के कितने बच्चे थे,बेटा बहू क्या करते है |Kids Details,Son,Daughter..
Asha Bhosle Funeral: आशा भोसले के कितने बच्चे थे,बेटा बहू क्या करते है |Kids Details,Son,Daughter.. आशा भोसले: सुरों की मलिका…
सरकारी आफिसर कि खूबसूरत बीवी ने यह क्या किया | Motivational story
सरकारी आफिसर कि खूबसूरत बीवी ने यह क्या किया | Motivational story वैवाहिक सत्य और एक /मर्यादित/ समझौता अध्याय १:…
End of content
No more pages to load






